संसद ने गुरुवार को 79 केंद्रीय कानूनों में 784 प्रविधानों में संशोधन करने वाला एक विधेयक पारित किया, जिसका उद्देश्य छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना और उन्हें तर्कसंगत बनाना है, ताकि व्यापारिक माहौल को और बेहतर बनाया जा सके और लोगों को उत्पीड़न से बचाया जा सके। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल द्वारा विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देने के बाद जन विश्वास (प्रविधान संशोधन) विधेयक, 2026 राज्यसभा में ध्वनि मत से पारित हो गया। यह विधेयक बुधवार को लोकसभा में पारित हुआ था। उन्होंने कहा कि इस कानून से नागरिकों और लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को लाभ होगा।
उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि गलती करने वालों में कोई भय नहीं रहेगा। भय उन लोगों में रहेगा जो जानबूझकर कानून तोड़ते हैं।” विधेयक में 57 प्रविधानों से कारावास और 158 प्रविधानों से जुर्माने को हटाने का प्रस्ताव है।
साथ ही, 17 प्रविधानों में कारावास की अवधि कम करने और 113 प्रविधानों में कारावास और जुर्माने को दंड में परिवर्तित करने का प्रस्ताव है। इसमें जीवनयापन को सुगम बनाने के लिए नई दिल्ली नगर परिषद अधिनियम, 1994 और मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत 67 संशोधनों का भी प्रस्ताव है।
गोयल ने कहा कि विधेयक महिलाओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करता और रेलवे अधिनियम में किए गए कुछ बदलाव महिला हितैषी हैं। विधेयक में मोटर वाहन अधिनियम के तहत 20 संशोधन करने का भी प्रस्ताव है, जिसका उद्देश्य मोटर वाहन अधिनियम के तहत कुछ अनुपालनों में छूट प्रदान करना और कानूनी अस्पष्टताओं को दूर करना है। इनमें किसी विशेष क्षेत्राधिकार के बजाय पूरे राज्य में वाहन पंजीकरण की अनुमति देना, ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण को उसकी समाप्ति तिथि से नहीं बल्कि नवीनीकरण की तिथि से प्रभावी बनाना, लाइसेंस की समाप्ति के बाद आवेदन करने पर लाइसेंस की वैधता समाप्त होने की तिथि से प्रभावी बनाना और लाइसेंस की वैधता समाप्त होने के बाद 30 दिनों की छूट अवधि प्रदान करना शामिल है, जिसके दौरान लाइसेंस प्रभावी बना रहेगा।
विधेयक में आरबीआइ अधिनियम, 1934, बीमा अधिनियम और पेंशन निधि नियामक एवं विकास प्राधिकरण अधिनियम में भी संशोधन प्रस्तावित हैं।
- जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026 को 27 मार्च, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। इसका उद्देश्य 80 केंद्रीय अधिनियमों में संशोधन करके अपराधों और दंडों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना या उन्हें तर्कसंगत बनाना है। यह विधेयक 18 अगस्त, 2025 को पेश किए गए जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2025 के स्थान पर लाया गया है। 2025 के विधेयक में 17 केंद्रीय अधिनियमों में संशोधन का प्रस्ताव था और इसे लोकसभा की एक चयन समिति (अध्यक्ष: श्री तेजस्वी सूर्या) को भेजा गया था। समिति ने 13 मार्च, 2026 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की और 17 अधिनियमों में और बदलावों की सिफारिश की, साथ ही 65 अन्य अधिनियमों में संशोधन की भी सिफारिश की। 2025 का विधेयक 17 मार्च, 2026 को वापस ले लिया गया था।
- अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाना: विधेयक कई अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाकर उनके लिए नागरिक दंड का प्रावधान करता है। उदाहरण के लिए, औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 के तहत, अधिनियम का उल्लंघन करते हुए सौंदर्य प्रसाधनों का निर्माण और बिक्री एक वर्ष तक के कारावास, 20,000 रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडनीय है। विधेयक में इसके स्थान पर एक लाख रुपये या जब्त किए गए सौंदर्य प्रसाधनों के मूल्य का तीन गुना, जो भी अधिक हो, का नागरिक दंड लगाने का प्रावधान है। इसी प्रकार, राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के तहत, राजमार्ग को दुर्गम या कम सुरक्षित बनाना पांच वर्ष तक के कारावास, जुर्माने या दोनों से दंडनीय है। विधेयक में इसके स्थान पर 10 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये तक का नागरिक दंड लगाने का प्रावधान है।
- कारावास की सजा का उन्मूलन: कुछ मामलों में, विधेयक किसी अपराध के लिए कारावास की सजा को समाप्त करता है। उदाहरण के लिए, भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 के तहत, निरस्त वसीयतनामा या प्रशासन पत्र को वापस न करने पर तीन महीने तक का कारावास, जुर्माना या दोनों का दंड दिया जा सकता है। विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत, किसी आदेश या निर्देश का पालन न करने पर तीन महीने तक का कारावास, जुर्माना या दोनों का दंड दिया जा सकता है। विधेयक इसके बजाय केवल जुर्माना लगाता है और जुर्माने की अधिकतम राशि भी बढ़ाता है।
- अपराधों का निरस्तीकरण: विधेयक कई अपराधों को निरस्त करता है। इनमें निम्नलिखित अपराध शामिल हैं: (i) दिल्ली पुलिस अधिनियम, 1978 के तहत आग लगने की झूठी सूचना देना, (ii) दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 के तहत जन्म और मृत्यु की सूचना न देना, और (iii) कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के तहत कॉपीराइट रजिस्टर में गलत प्रविष्टियाँ करना।
- जुर्माने और दंडों में संशोधन: विधेयक कई अपराधों के लिए जुर्माने और दंडों के मौद्रिक मूल्य में संशोधन करता है। इसमें यह भी प्रावधान है कि इसके द्वारा निर्दिष्ट जुर्माने और दंडों में प्रत्येक तीन वर्ष में संबंधित न्यूनतम राशि का 10% की वृद्धि होगी।
- प्रथम और द्वितीय अपराध पर चेतावनी: विधेयक कुछ अधिनियमों में संशोधन करता है ताकि अपराध के प्रथम या द्वितीय मामलों में सलाह या चेतावनी जारी की जा सके। उदाहरण के लिए, प्रशिक्षु अधिनियम, 1961 के तहत, सूचना देने से इनकार करना और प्रशिक्षु से अतिरिक्त समय काम करवाना जैसे अपराध जुर्माने से दंडनीय हैं। विधेयक में प्रावधान है कि प्रथम उल्लंघन पर सलाह जारी की जाएगी और द्वितीय उल्लंघन पर चेतावनी जारी की जाएगी। बाद के उल्लंघनों पर नागरिक दंड लगाया जाएगा।
- सुधार नोटिस: यह विधेयक विधिक मापन अधिनियम, 2009 के अंतर्गत सुधार नोटिस जारी करने का प्रावधान करता है। इस अधिनियम के तहत, गैर-मानक बाट और माप का निर्माण, उपयोग या बिक्री जैसे कई अपराध जुर्माने से दंडनीय हैं। विधेयक में इसके विपरीत यह प्रावधान है कि प्रथम अपराध की स्थिति में सुधार नोटिस जारी किया जा सकता है। ऐसे नोटिस में निर्धारित समय के भीतर नियमों का पालन न करने की स्थिति में सुधार करना अनिवार्य होगा। कुछ मामलों में, दूसरे अपराध के लिए नागरिक दंड लगाया जाएगा, और उसके बाद के अपराधों के लिए आपराधिक जुर्माना लगाया जाएगा।
- दंड निर्धारण : विधेयक कुछ अधिनियमों में संशोधन करता है ताकि जांच करने और दंड निर्धारित करने के लिए न्यायनिर्णायक अधिकारियों की नियुक्ति का प्रावधान किया जा सके। इसमें न्यायनिर्णायक अधिकारियों के निर्णयों के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई के लिए अपीलीय प्राधिकारियों की नियुक्ति का भी प्रावधान है।
- नई दिल्ली नगर निगम क्षेत्र में संपत्ति कर और विज्ञापन कर: यह विधेयक नई दिल्ली नगर परिषद अधिनियम, 1994 में संशोधन करता है। अधिनियम में संपत्ति कर लगाने का प्रावधान है। विधेयक में निर्दिष्ट किया गया है कि संपत्ति कर में भवन कर और खाली भूमि कर शामिल होंगे। यह खाली भूमि और भवनों के लिए आधार मूल्य की अनुशंसा करने और संपत्ति कर के निर्धारण एवं संशोधन के तरीके पर विचार करने के लिए एक नगर निगम मूल्यांकन समिति की स्थापना करता है। विधेयक संपत्ति कर संबंधी शिकायतों के निवारण के लिए एक कठिनाई एवं विसंगति समिति का गठन करता है। विधेयक विज्ञापन कर लगाने के प्रावधानों को भी हटाता है।
- जन विश्वास अधिनियम, 2023 के अंतर्गत जुर्माने और दंडों के संशोधन का तरीका: जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) अधिनियम, 2023 में निर्दिष्ट जुर्माने और दंडों के संशोधन का प्रावधान प्रत्येक तीन वर्ष में किया जाएगा। विधेयक में यह भी कहा गया है कि यदि किसी अधिनियम में पहले से ही संशोधन की विधि निर्धारित है, तो उस अधिनियम की विधि लागू होगी।








