मोतिहारी में 3 दिनों के अंदर जहरीली शराब से 7 लोगों की मौत

मोतिहारी में 3 दिनों के अंदर जहरीली शराब से 7 लोगों की मौत हो गई है। वहीं, 14 की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। इनमें से 6 की आंखों की रोशनी चली गई है। सभी का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। मृतकों में चंदू कुमार, प्रमोद यादव, परीक्षण मांझी, हीरालाल भगत, […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शनिवार, 4 अप्रैल 2026, 07:57 AM 10 मिनट read
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मोतिहारी में 3 दिनों के अंदर जहरीली शराब से 7 लोगों की मौत
Photo: UB India News Archive

मोतिहारी में 3 दिनों के अंदर जहरीली शराब से 7 लोगों की मौत हो गई है। वहीं, 14 की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। इनमें से 6 की आंखों की रोशनी चली गई है। सभी का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है।

मृतकों में चंदू कुमार, प्रमोद यादव, परीक्षण मांझी, हीरालाल भगत, लालकिशोर राय, संपत साह और लड्डू साह हैं। पहले दिन गुरुवार को 2 मौतें हुईं। वहीं शुक्रवार को 3 और शनिवार की सुबह 2 की मौत हुई है।

जहरीली शराब से बीमार लोगों में लोहा ठाकुर, राहुल कुमार, रविंद्र यादव (35), दिनेश यादव (28), उमेश राम समेत 14 लोग शामिल हैं। इनमें तीन की स्थिति गंभीर बनी हुई है।

परीक्षण मांझी की बेटी की एक महीने बाद 13 मई को शादी होने वाली थी। घर में इसकी तैयारी चल रही थी, लेकिन इससे पहले ही ये हादसा हो गया। वहीं शत्रुध्न ने कान पकड़े की अब कभी शराब नहीं पिऊंगा।

मेरे साथ शराब पीने वाले कई लोग मर गए

अस्पताल में भर्ती हरदिया निवासी रमेश यादव ने बताया, “दिन भर मजदूरी करने के बाद बुधवार शाम महादलित बस्ती में जाकर शराब पी थी। मेरे साथ कई लोगों ने भी शराब पी थी। मैंने 30-30 रुपए के दो पाउच पिए और घर आकर सो गया।

सुबह उठने पर साथ में शराब पीने वालों की हालत बिगड़ने लगी। मेरे सिर में दर्द था और आंखों से धुंधला दिखने लगा, जिसके बाद गुरुवार सुबह सदर अस्पताल पहुंचा, जहां मैं भर्ती हूं। अब जिंदगी में कभी शराब नहीं पिऊंगा।”

उन्होंने बताया कि उनके साथ शराब पीने वाले चार लोगों की मौत हो चुकी है। जेरियाट्रिक वार्ड में भर्ती सभी मरीजों ने स्प्रिट की पाउच पीने की बात स्वीकार की है।

पहले जानिए कहां से आ रही शराब, कितने में बिक रही

मोतिहारी के कन्हैया और राजा पिछले 10 साल से शराब तस्करी में सक्रिय हैं। दोनों भाई अवैध शराब भट्टी चलाकर स्प्रिट बनाते हैं और अपने नेटवर्क के जरिए गांवों में सप्लाई करवाते हैं। ये लोग परसोना के खलीफा और सुनील शाह को शराब देते हैं, जो आगे नागा राय और जम्मू बैठा तक पहुंचाते हैं।

नागा राय तुरकौलिया के परसोना में, जबकि जम्मू बैठा रघुनाथपुर के बालगंगा गांव में जहरीली शराब की डिलीवरी करता है। दोनों 50 रुपए प्रति ग्लास शराब बेचते हैं। शुक्रवार देर रात तक राजा, खलीफा, सुनील, नागा राय और जम्मू बैठा को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि कन्हैया फरार है।

प्रमोद, रावण, दिनेश और उमेश ने एक साथ खेत में बैठकर शराब पी थी, जो नागा राय ने पहुंचाई थी। वहीं राहुल, चंदू और संपत को शराब जम्मू बैठा ने दी थी।

एक महीने बाद थी बेटी की शादी

घटना के बाद परीक्षण मांझी के बड़े बेटे राकेश ने बताया, “मेरे पिता ही घर के एकमात्र कमाने वाले व्यक्ति थे। वही खेती-बाड़ी और मजदूरी कर घर चलाते थे। एक महीने बाद मेरी बहन की शादी होने वाली थी। घर में इसको लेकर तैयारियां चल रही थी। सारा काम वही देख रहे थे। सब कुछ लगभग तय हो चुका था, पैसा भी धीरे-धीरे जुटाया जा रहा था, लेकिन अब समझ नहीं आ रहा कि बहन की शादी कैसे होगी?

गुरुवार की रात पापा मोतिहारी शहर से काम कर गांव लौट रहे थे। जब वो घर आए तो उनकी तबीयत खराब हो गई। हमलोगों को लगा तेज धूप के कारण चक्कर आ रहा होगा, लेकिन हमें नहीं पता था कि उन्होंने जहरीली शराब पी है। गुरुवार की देर रात उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई। हमलोग अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन शुक्रवार की अहले सुबह उनकी मौत हो गई।”

50-100 रुपए की शराब ले सकती है जान

परीक्षण की पत्नी ने बताया, “वो हमेशा से शराब पीते थे। हमलोग हर बार समझाते थे कि मत पियो, लेकिन वो मानते नहीं थे। रोज कहीं न कहीं से शराब लाकर पी लेते थे। कई बार मना किया, डांटा भी, लेकिन आदत छूट नहीं रही थी।

गांव में अवैध शराब मिलना कोई बड़ी बात नहीं है। यहां आसानी से मिल जाती है। लोग 50-100 रुपए में खरीद लेते हैं और पी लेते हैं। किसी को अंदाजा नहीं होता कि यह जान भी ले सकती है।”

घटना वाले दिन को याद करते हुए उन्होंने बताया, “पहले तो किसी को शक नहीं हुआ। हमने सोचा कि सामान्य तबीयत खराब है, लेकिन जब आंखों से दिखना कम होने लगा और हालत बिगड़ने लगी, तब समझ आया कि कुछ गड़बड़ है।”

पत्नी ने कहा, “कमाने वाला चला गया, अब घर चलाना मुश्किल हो गया है। अब बच्चों का क्या होगा, यही चिंता सता रही है।”

छोटे भाई के कंधे पर आई बहन की शादी की जिम्मेदारियां

घर के आंगन में जहां कभी शादी की तैयारियों की गूंज थी, अब सन्नाटा पसरा है। महिलाएं रो-रोकर बेसुध हैं, जबकि पुरुष चुपचाप बैठकर हालात समझने की कोशिश कर रहे हैं।

परिवार का कहना है कि अब तक बेटे को इन जिम्मेदारियों से दूर रखा गया था, लेकिन अचानक सब कुछ उसके कंधों पर आ गया है। कम उम्र में ही उसे घर चलाने से लेकर बहन की शादी तक की जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी।

पीड़ित परिवार ने सरकार से मदद की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि समय रहते आर्थिक सहायता नहीं मिली, तो बेटी की शादी कर पाना बेहद मुश्किल हो जाएगा।

रात 8 बजे प्रमोद की बेटे से आखिरी बार हुई बात

परीक्षण मांझी के परिवार से बात करने के बाद टीम गांव के दूसरे छोर पर प्रमोद यादव के घर पहुंची, जहां सन्नाटा पसरा था। यहां प्रमोद के बेटे छोटू से बातचीत हुई।

छोटू ने बताया, “पापा अस्पताल में भर्ती थे। जैसे ही मुझे पता चला, मैंने उन्हें कॉल किया। मैंने पूछा- पापा, आपको साफ दिख रहा है? उन्होंने कहा- हां, मैं ठीक हूं, तुम चिंता मत करो और पढ़ाई पर ध्यान दो।

इसके बाद उन्होंने मां से पानी मांगा, मुंह से पाइप हटाने को कहा, पानी पिया और लेट गए। 2 अप्रैल की रात 8 बजे उनसे मेरी आखिरी बात हुई थी।”

प्रमोद यादव दूध बेचकर अपने बेटे को पटना में ग्रेजुएशन करवा रहे थे। दूध बेचकर ही उन्होंने 5 साल पहले अपना पक्का मकान बनाया था।

छोटू ने बताया, “पापा चाहते थे कि मैं सरकारी अफसर बनूं। बड़े अधिकारी बनकर घर का नाम रोशन करूं।”

4 लोगों ने मिलकर की थी शराब पार्टी

प्रमोद यादव के बड़े भाई ने बताया, “गुरुवार शाम 4 से 8 बजे तक मेरी उससे बात हुई, लेकिन इसके बाद वह कुछ बोल नहीं पाया। शराब पीने की बात उसने मुझे नहीं बताई थी, बल्कि चचेरे भाई को बताया था कि चार लोग मिलकर खेत में शराब पी रहे थे। इतना कहते ही उसकी तबीयत बिगड़ गई। अगर शराबबंदी सही से लागू होती, तो मेरे भाई की मौत नहीं होती। हर जगह जहरीली शराब मिल रही है।”

इसके बाद टीम संपत साह के घर की ओर बढ़ी, जहां 50 मीटर दूर से ही महिलाओं के रोने-चिल्लाने की आवाजें सुनाई दे रही थीं।

संपत को आंखों से दिखना बंद हो गया था

मृतक संपत के बेटे सर्वजीत ने बताया, “शुरुआत में लगा कि सामान्य तबीयत खराब है, लेकिन धीरे-धीरे हालत बिगड़ने लगी। शरीर गर्म हो रहा था और आंखों से कम दिखने लगा। वे बार-बार कह रहे थे कि सामने साफ नजर नहीं आ रहा।”

उन्होंने कहा, “पहले किसी को अंदाजा नहीं था कि मामला इतना गंभीर है। लगा डॉक्टर को दिखाने से ठीक हो जाएंगे, लेकिन हालत लगातार बिगड़ती गई। जब तक समझ पाते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।”

सर्वजीत ने बताया कि गांव में अफरा-तफरी मच गई थी। एक-एक कर लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। लोग इधर-उधर भाग रहे थे, लेकिन समय पर सही इलाज नहीं मिल पाया।

डॉक्टर बोले- शराब पीने वाले डरे नहीं, इलाज कराएं

सदर अस्पताल के डॉ. अनूप गौतम ने बताया, “रात से अब तक 8-9 लोग इलाज के लिए आए हैं। आज सुबह एक मरीज की मौत हुई है, जबकि 2 को रेफर किया गया है। 2 मरीजों की आंखों की रोशनी प्रभावित हुई है। उन्हें दवा दी गई है, जरूरत पड़ने पर रेफर किया जाएगा। जिसने भी शराब पी है और तबीयत बिगड़ी है, वह बिना डर के इलाज कराने आए।”

परिजनों ने हत्या का केस दर्ज कराया

मृतक प्रमोद यादव के परिजनों ने तुरकौलिया थाना में हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है। मामले के मुख्य साजिशकर्ता नागा राय को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जबकि परसोना के चौकीदार भरत राय को सस्पेंड कर दिया गया है।

साथ ही सदर SDPO के नेतृत्व में जांच के लिए SIT का गठन किया गया है। इसमें साइबर DSP और DIU प्रभारी भी शामिल हैं। SP स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर अलग-अलग टीमें बनाकर शराब तस्करों के खिलाफ छापेमारी की जा रही है।

नागा राय के अलावा छह अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि जहरीली शराब कहां से आई और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।

तेजस्वी बोले- बिहार में शराबबंदी फेल

मोतिहारी शराबकांड पर तेजस्वी यादव ने सरकार को घेरा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा, ‘4 लोगों की मौत, 6 लोगों की आंखों की रोशनी चले जाना और कई लोगों की हालत गंभीर होना अत्यंत दुखद है। यह बिल्कुल भी पहली बार नहीं है।

आंकड़ों के अनुसार, शराबबंदी लागू होने के बाद से अब तक बिहार में जहरीली शराब से 1300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। यह तो केवल सरकारी आंकड़ा है। हकीकत में यह संख्या इससे कहीं अधिक है। इतना ही नहीं, कई दर्जन लोग अपनी आंखों की रोशनी भी खो चुके हैं।

शराबबंदी कानून का मूल उद्देश्य अब पूरी तरह भटक चुका है। यह कानून सत्ताधारी भाजपा-जदयू के कुछ नेताओं, भ्रष्ट अधिकारियों और उनके संरक्षण में पल रहे शराब माफियाओं और भ्रष्ट तंत्र के लिए कमाई का कमाऊ पूत बन गया है।’

बिहार में 2016 से शराबबंदी लागू है

अप्रैल 2016 में बिहार सरकार ने राज्य में शराबबंदी लागू की। इसका उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ हिंसा कम करना और सामाजिक-स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारना था। यह पॉलिसी बिहार प्रोहिविजन एंड एक्साइज एक्ट 2016 पर आधारित है, जिसके तहत शराब के उत्पादन, बिक्री और सेवन पर पूरी तरह से बैन है।

अब जानिए देसी शराब से क्यों होती है मौत

देसी शराब में अमोनियम नाइट्रेट (यूरिया) और ऑक्सीटोसिन मिलाने से मेथेनॉल (मिथाइल एल्कोहल) बन जाता है। यही बाद में मौत का कारण बनता है। मेथेनॉल की अधिकता से शराब टॉक्सिक बन जाती है।

इसके बाद मेथेनॉल जब शरीर में मेटाबोलाइज होता है तो वो फार्मेल्डिहाइड बनाता है और बाद में फॉर्मिक एसिड बन जाता है, जो कि जहर है।

इसके शरीर में जाते ही ब्रेन और आंख सबसे पहले प्रभावित होती हैं। इसके बाद बॉडी के दूसरे ऑर्गन काम करना बंद कर देते हैं और व्यक्ति की मौत हो जाती है।

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