संविधान संशोधन या चुनावी बिसात? 11 सवालों में समझें सरकार का प्लान और विपक्ष की टेंशन

भले ही बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव है. बिहार में नए सीएम ने शपथ ली है लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा आज से शुरू हो रहे संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र की है. सरकार से विपक्ष तक बैठकों का दौर चल रहा है. शह और मात के लिए रणनीति पर माथापच्ची हो रही है. 16 […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 16 अप्रैल 2026, 05:14 AM 9 मिनट read
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संविधान संशोधन या चुनावी बिसात? 11 सवालों में समझें सरकार का प्लान और विपक्ष की टेंशन
Photo: UB India News Archive

भले ही बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव है. बिहार में नए सीएम ने शपथ ली है लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा आज से शुरू हो रहे संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र की है. सरकार से विपक्ष तक बैठकों का दौर चल रहा है. शह और मात के लिए रणनीति पर माथापच्ची हो रही है. 16 से 18 अप्रैल तक चलने वाला ये विशेष सत्र संसद से लेकर देश की राजनीतिक दिशा तक के लिए काफी अहम है.

इन 11 सवालों में समझें पूरा समीकरण

1. संसद के विशेष सत्र में सरकार कितने विधेयक पेश करेगी?

  • संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026
  • परिसीमन विधेयक, 2026
  • केंद्र शासित प्रदेश विधेयक

2. ये बिल सरकार क्यों ला रही है?

  • लोकसभा में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का रास्ता साफ होगा.
  • नए बदलाव में लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 तक करने का प्रस्ताव है.
  • एक बिल में परिसीमन आयोग बनाए जाने का भी प्रपोजल है.

3. परिसीमन आयोग से जुड़े बिल में क्या है?

उत्तर: परिसीमन विधेयक का उद्देश्य देश में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों का पुनर्गठन करना है.

4. परिसीमन आयोग किसकी अध्यक्षता में काम करेगा?

उत्तर: परिसीमन आयोग के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड या मौजूदा जज होंगे. इनके अलावा मुख्य चुनाव आयुक्त या उनके द्वारा नामित कोई चुनाव आयुक्त और संबंधित राज्य के राज्य चुनाव आयुक्त भी सदस्य होंगे.

5. परिसीमन का आधार क्या होगा?

उत्तर: 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन की तैयारी है. अब तक 1971 की जनगणना के आधार तक की गई सीटों से काम चल रहा है.

6. 2011 की जनगणना को आधार क्यों बनाया जा रहा है?

उत्तर: ताकि 2029 के लोकसभा चुनाव से ही महिला आरक्षण लागू हो सके. अगर मौजूदा नियम के हिसाब से 2027 की जनगणना को आधार बनाया गया तो महिला आरक्षण लागू करने के लिए 2034 तक इंतजार करना पड़ेगा.

7. बिल अगर पास हुआ तो लोकसभा का गणित कितना बदल जाएगा?

उत्तर: इन तीनों बिल के पास होने पर लोकसभा की 543 सीटें बढ़कर करीब 850 हो सकती हैं, इनमें करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हो सकती हैं.

8. सरकार की क्या दलील है और विपक्ष का क्या स्टैंड है?

उत्तर: देखिए…सरकार कह रही है कि ये आधी आबादी को उनका हक देने का ऐतिहासिक मौका है…जबकि विपक्ष टाइमिंग पर सवाल उठा रहा है। विपक्ष का कहना है वो महिला आरक्षण के साथ है लेकिन परिसीमन के नाम पर पावर शिफ्ट मंजूर नहीं…

9. दक्षिण भारत से विरोध की आवाज क्यों आ रही है…उनका डर क्या है?

उत्तर: उन राज्यों को लगता है कि नई सीटों में उत्तर भारत मजबूत होगा जबकि दक्षिण का राजनीतिक वजन कम होगा. दक्षिण भारतीय राज्यों जैसे…तमिलनाडु…तेलंगाना…केरल और कर्नाटक की दलील है कि जनसंख्या नियंत्रण किया और अब नुकसान भी हमें ही हो?

10. राज्यों के डर पर सरकार का तर्क क्या है?

उत्तर: सरकार का तर्क है कि किसी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा

11. संविधान संशोधन की राह में सरकार के लिए मुश्किलें क्या हैं?

उत्तर: संविधान संशोधन के लिए दो तिहाई बहुमत चाहिए। सरकार के पास संसद के दोनों सदन में इतनी संख्या नहीं है. लोकसभा में NDA के पास करीब 292-293 सांसद हैं. अगर पूरा सदन मौजूद रहा तो बिल पास करवाने के लिए 362 वोट जरूरी होंगे यानि सरकार को करीब 70 अतिरिक्त वोट चाहिए. राज्यसभा में करीब 141 सीटें NDA के पास हैं जो बिल पास कराने के लिए जरूरी 164 के आंकड़े से दूर है.

यानी सरकार को विपक्ष का समर्थन चाहिए और विपक्ष को समय पर ऐतराज है. अभी बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव है. चुनावी राज्य तमिलनाडु के सीएम स्टालिन तो ये तक कह रहे हैं कि केंद्र सरकार संसद में जो परिसीमन संशोधन विधेयक लाने जा रही है, वो तमिलनाडु और दूसरे दक्षिणी राज्यों के खिलाफ ऐतिहासिक अन्याय है. तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने भी इस मामले में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की.

जिस तरीके से परिसीमन हो रहा है, वो मंजूर नहीं- रेमंत

उन्होंने साफ कहा कि हम महिला आरक्षण का समर्थन करते हैं लेकिन जिस तरीके से परिसीमन हो रहा है, वो मंजूर नहीं है. उन्होंने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा कि आनुपातिक मॉडल दक्षिण भारत की जनता और सरकारों को स्वीकार नहीं होगा, इससे विरोध बढ़ेगा. सरकार परिसीमन के लिए हाइब्रिड मॉडल अपनाए.

बीजेपी आग से खेल रही है- स्टालिन

उन्होंने कहा कि सरकार 50% सीट आनुपातिक आधार पर बढ़ाए और शेष सीट GSDP समेत दूसरे मानदंडों के आधार पर बढ़ाए. वहीं, तमिलनाडु के सीएम एम के स्टालिन ने कहा कि केंद्र सरकार कल संसद में जो परिसीमन संशोधन विधेयक पेश करने की योजना बना रही है, वो तमिलनाडु और दक्षिण भारतीय राज्यों के लिए किया गया एक ‘बहुत बड़ा ऐतिहासिक अन्याय’ है. दक्षिण में रहने वाला हर दक्षिण भारतीय गुस्से में उबल रहा है. बीजेपी आग से खेल रही है. कल पूरे तमिलनाडु में परिसीमन के विरोध में घरों और सार्वजनिक स्थानों पर काले झंडे फहराए जाएंगे.

खरगे के आवास पर विपक्ष की बैठक

विपक्ष ने भी बुधवार को इस मुद्दे पर बैठक की, इसमें तय किया गया कि वो इस बिल के खिलाफ वोट करेंगे. बैठक में टीएमसी भी शामिल हुई. हालांकि, सूत्रों के मुताबिक टीएमसी के रुख से राहुल गांधी असहज दिखे. टीएमसी की दलील से ज्यादातर दलों की राय अलग दिखी.

  • सूत्रों के मुताबिक, बैठक में TMC प्रतिनिधि सागरिका घोष ने कहा कि, चूंकि बंगाल में चुनाव चल रहा है इसलिए सभी सांसदों का संसद की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए आ पाना संभव नहीं है. हमारे 5 या 7 सांसद आ पाएंगे.
  • इसके बाद राहुल गांधी ने टिप्पणी की कि अगर सभी विपक्षी दलों के सांसद नहीं आएंगे तो एक तरह से ये बीजेपी को फायदा पहुंचाने वाली बात होगी.
  • इस पर DMK नेता टी आर बालू ने राहुल गांधी का पक्ष लेते हुए कहा कि, चुनाव तो हमारे प्रदेश में भी है लेकिन हम सब आ रहे हैं.
  • तभी आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी कहा कि, सभी दलों को अपने सांसदों की उपस्थिति अनिवार्य करनी चाहिए. ये मामला चुनाव से बड़ा है, अगर बीजेपी सरकार इसी तरह लोकतंत्र को कुचलेगी तो चुनाव ही बेमानी हो जाएंगे.
  • इस बीच ऑनलाइन जुड़े उद्धव ठाकरे और एक दो अन्य नेताओं ने कहा कि, मैं ममता दीदी से बात करूंगा ताकि सभी सांसद दिल्ली आएं. जिसके बाद सभी ने उम्मीद जताई कि, टीएमसी के सभी सांसद मौजूद रहेंगे.
  • हालांकि, ये संसद सत्र में पता चल जाएगा कि टीएमसी पूरी तरह विपक्ष के साथ है या वो खुद को किनारा कर रही है.

संसद में 850 सीटें करने का प्रावधान

महिला आरक्षण संशोधन बिल को लेकर विपक्ष का सबसे ज़्यादा विरोध दो मुद्दों पर है. पहला , संविधान संशोधन बिल में लोकसभा की सीटों की संख्या 850 करने का प्रावधान. दूसरा , सीटों की संख्या 850 करने और उसके परिसीमन के लिए किसी फॉर्मूले का ज़िक्र नहीं करना. परिसीमन बिल के सेक्शन 8 में सिर्फ़ इतना कहा गया है कि 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन आयोग सीटों का बंटवारा करेगा और उनका क्षेत्र तय करेगा. संख्या किस फॉर्मूले के आधार पर बढ़ाई जाएगी , उसका ज़िक्र नहीं किया गया है.

2011 की जनगणना का आधार?

इसी बात को लेकर विपक्ष अब बिल के विरोध में आ खड़ा हुआ है. उसका आरोप है कि 2011 की जनगणना के आधार पर अगर सीटों का बंटवारा किया गया तो तमिलनाडु , केरल और कर्नाटक जैसे दक्षिण भारत के राज्यों को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा क्योंकि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण को लेकर काफ़ी काम किया और जनसंख्या विकास दर को कम करने में सफलता पाई है.

संविधान संशोधन बिल क्या पास होगा

विपक्ष के विरोध का मतलब होगा कि सीटों के संख्या बढ़ाने के लिए लाए गए संविधान संशोधन बिल के पारित होने में कठिनाई. नियम के मुताबिक़ संविधान संशोधन बिल को पारित करवाने के लिए दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत होना चाहिए लेकिन सरकार के पास संख्या बल का अभाव है.

सरकार दे सकती है आश्वासन

ऐसे में सूत्रों का कहना है कि विपक्ष को आश्वस्त करने के लिए सरकार संसद में बहस के दौरान कुछ बड़ा आश्वासन दे सकती है या बिलों के कुछ प्रावधानों में बदलाव कर सकती है. उदाहरण के लिए , सरकार ये ऐलान कर सकती है कि 2011 की जनगणना के आधार पर केवल लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमा और क्षेत्रफल तय की जाएगी , न कि सीटों की संख्या बढ़ाई जाएगी.

आनुपातिक आधार पर बढ़ेगी संख्या

सरकार एक और आश्वासन ये दे सकती है कि सीटों की संख्या आनुपातिक तौर पर हर राज्य में 50 फीसदी बढ़ाई जाएगी. ऐसा करके सीटों की संख्या बढ़ाने में 2011 की जनगणना की भूमिका ख़त्म हो जाएगी और सभी राज्यों में जनसंख्या से अलग आनुपातिक रूप में सीटें बढ़ाई जा सकेंगी. पहले ख़बर यही आई थी कि सरकार सभी राज्यों में सीटों की संख्या 50 फ़ीसदी बढ़ा देगी और फिर परिसीमन करके उनकी सीमाएं तय की जाएगी.

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