उड़ानों पर महंगाई की मार!

दुनियाभर में हवाई सफर महंगा और मुश्किल होता जा रहा है। जेट फ्यूल की कीमतों में तेज उछाल के चलते कई बड़ी एयरलाइंस अब उड़ानें घटाने और कुछ रूट बंद करने को मजबूर हो गई हैं। इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ रहा है, जहां टिकट महंगे हो रहे हैं और कई शहरों के बीच […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
रविवार, 19 अप्रैल 2026, 07:55 AM 3 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
उड़ानों पर महंगाई की मार!
Photo: UB India News Archive

दुनियाभर में हवाई सफर महंगा और मुश्किल होता जा रहा है। जेट फ्यूल की कीमतों में तेज उछाल के चलते कई बड़ी एयरलाइंस अब उड़ानें घटाने और कुछ रूट बंद करने को मजबूर हो गई हैं। इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ रहा है, जहां टिकट महंगे हो रहे हैं और कई शहरों के बीच कनेक्टिविटी कमजोर पड़ने लगी है।

ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव और तेल सप्लाई में बाधा के कारण जेट फ्यूल की कीमतें आसमान छू रही हैं। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग पर अनिश्चितता ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इसका असर अब सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यूरोप, अमेरिका और एशिया तक फैल चुका है।

एयरलाइंस ने घटाईं उड़ानें

कई बड़ी एयरलाइंस जैसे KLM, यूनाइटेड एयरलाइंस, लुफ्थांसा और कैथे पैसिफिक ने अपने फ्लाइट शेड्यूल में कटौती शुरू कर दी है। कुछ कंपनियों ने पुराने और ज्यादा फ्यूल खर्च करने वाले विमानों को भी ग्राउंड कर दिया है। डेटा के मुताबिक, मई महीने में वैश्विक उड़ानों की क्षमता करीब 3% तक घटा दी गई है और आगे और कटौती की आशंका जताई जा रही है।

यात्रियों पर सीधा असर

उड़ानों में कटौती का मतलब है कम सीटें और ज्यादा किराया। कई एयरलाइंस लंबी दूरी की उड़ानों पर 400 डॉलर तक का अतिरिक्त फ्यूल चार्ज भी जोड़ रही हैं। इससे यात्रियों का बजट बिगड़ रहा है और ट्रैवल प्लानिंग मुश्किल हो रही है।

फ्यूल की कमी भी बनी चिंता

सिर्फ कीमत ही नहीं, बल्कि जेट फ्यूल की उपलब्धता भी चिंता का कारण बन रही है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का कहना है कि यूरोप में जेट फ्यूल का स्टॉक सीमित समय के लिए ही बचा है। अगर स्थिति जल्दी नहीं सुधरी, तो उड़ानों पर और बड़ा असर पड़ सकता है।

ग्लोबल ट्रैवल सीजन पर खतरा

आने वाले समर ट्रैवल सीजन को एयरलाइंस के लिए सबसे अहम माना जाता है, लेकिन मौजूदा हालात इस सीजन को कमजोर कर सकते हैं। कई कम लोकप्रिय रूट पहले ही बंद किए जा चुके हैं, जिससे छोटे शहरों की कनेक्टिविटी पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है।

आगे क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जेट फ्यूल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो एयरलाइंस और ज्यादा कटौती कर सकती हैं। इससे ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री पर दबाव बढ़ेगा और यात्रियों को आने वाले महीनों में और परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी
खास खबर

खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]

UB India News27 अग॰
पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………
खास खबर

पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………

पंजाब में 25 सालों तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान 2020 में यह ढाई दशक पुरानी दोस्ती टूट गई थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज हो गई है. बीजेपी […]

UB India News27 अग॰
अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?
खास खबर

अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव आया है. एक ओर दोनों देश व्यापार, वैश्विक मंचों और बहुपक्षीय संगठनों में साथ दिखते हैं तो दूसरी ओर हिमालयी सीमा पर तनाव ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है. ऐसे वक्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल […]

UB India News27 अग॰
भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..
खास खबर

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या आने वाले कुछ सालों में दोगुनी होकर करीब 3 हजार तक पहुंच सकती है. जापान दौरे पर पहुंचे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जापान की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए तैयार हैं. पीयूष गोयल ने ये भी कहा कि टेक्नोलॉजी की कमी […]

UB India News27 अग॰