क्या हर्षद मेहता जैसे स्कैम में शामिल ट्रंप?

साल 1992… भारत का सबसे बड़ा वित्तीय घोटाला तो आप सभी को याद होगा. जब गुजरात के हर्षद मेहता ने बैंकिंग सिस्टम और स्टॉक मार्केट को हिला दिया था और इनसाइडर ट्रेडिंग से करीब 5 हजार करोड़ रुपए का स्कैम किया था. वैसे ही आरोपों के कुछ छींटे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी पड़ रहे हैं. […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
मंगलवार, 21 अप्रैल 2026, 08:06 AM 8 मिनट read
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क्या हर्षद मेहता जैसे स्कैम में शामिल ट्रंप?
Photo: UB India News Archive

साल 1992… भारत का सबसे बड़ा वित्तीय घोटाला तो आप सभी को याद होगा. जब गुजरात के हर्षद मेहता ने बैंकिंग सिस्टम और स्टॉक मार्केट को हिला दिया था और इनसाइडर ट्रेडिंग से करीब 5 हजार करोड़ रुपए का स्कैम किया था. वैसे ही आरोपों के कुछ छींटे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी पड़ रहे हैं. ट्रंप के कई बड़े ऐलानों से ठीक पहले शेयर बाजार, ऑयल फ्यूचर्स और प्रेडिक्शन मार्केट में चौंकाने वाली ट्रेडिंग एक्टिविटीज देखी जा रही है. 

क्या होती है इनसाइडर ट्रेडिंग और ट्रंप का मामला क्या? 

इनसाइडर ट्रेडिंग क्या है और यह क्यों गैरकानूनी माना जाता है?  

इनसाइडर ट्रेडिंग का मतलब है कि ऐसी गोपनीय और गैर-सार्वजनिक जानकारी का इस्तेमाल करके शेयर, फ्यूचर्स, ऑप्शंस या अन्य सिक्योरिटीज में ट्रेडिंग करना, जिसकी जानकारी आम जनता को नहीं होती है. उदाहरण के लिए, युद्ध संबंधी फैसला या टैरिफ पॉलिसी जैसी कोई जरूरी सरकारी घोषणा, जिसका पहले पता हो और उसी आधार पर दांव लगा दिया जाए. यह अवैध है क्योंकि इससे उन लोगों को फायदा होता है जिनके पास अंदरूनी जानकारी है, जबकि आम निवेशक नुकसान उठाते हैं. इससे बाजार में नाइंसाफी होती है और निवेशकों का भरोसा टूटता है.

ट्रंप के मामले में देखें, तो कई बार उनके बयान सार्वजनिक होने से कुछ देर पहले ट्रेडिंग में अचानक तेज उछाल आ जाता है. एक्सपर्ट्स इसे गैरकानूनी इनसाइडर ट्रेडिंग का संकेत मानते हैं, यानी कुछ खास लोग पहले से ही सीक्रेट इन्फॉर्मेशन का पता लगा लेते हैं, जो आम आदमी के पास नहीं होती. इससे वे कमाते हैं करोड़ों-अरबों रुपए और आम आदमी को मिलता है नुकसान.

ट्रंप और इनसाइडर ट्रेडिंग के कौन-कौन से बड़े उदाहरण सामने आए हैं?

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के ऐलान से पहले ट्रेडिंग का पैटर्न साफ दिखता है. इसके 5 बड़े उदाहरण हैं:

1. 9 मार्च 2026: ईरान युद्ध पर ‘युद्ध लगभग पूरी तरह खत्म है’
ट्रंप ने CBS न्यूज को फोन इंटरव्यू में कहा कि ईरान के साथ संघर्ष लगभग खत्म हो गया है. जनता को इसकी जानकारी 19:16 GMT पर मिली, जब रिपोर्टर ने X पर पोस्ट किया, लेकिन ऑयल फ्यूचर्स में दांव 47 मिनट पहले, यानी 18:29 GMT पर बढ़ गए थे. नतीजतन तेल की कीमतें 25% गिर गईं. जिन ट्रेडर्स ने शॉर्ट सेलिंग की थी, उन्होंने लाखों-करोड़ों डॉलर का मुनाफा कमाया.

2. 23 मार्च 2026: तेहरान के साथ ‘पूर्ण और अंतिम समाधान’
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच शत्रुता का पूरा समाधान हो गया है. पोस्ट 11:04 GMT पर हुआ, लेकिन तेल में भारी दांव 14 मिनट पहले (10:48-10:50 GMT) लग चुके थे. नतीजतन, अमेरिकी तेल कीमतें 11% गिर गईं. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समय करीब 580 मिलियन डॉलर (लगभग 4.66 हजार करोड़ रुपये) के ट्रेड्स हुए, जिससे कुछ ट्रेडर्स को भारी फायदा हुआ.

3. 28 फरवरी 2026: ईरान पर अमेरिकी हमले का दांव
ब्लॉकचेन एनालिसिस साइट BubbleMaps ने खुलासा किया कि फरवरी में अचानक 6 नए अकाउंट बने. इन सबने ईरान पर हमले के पक्ष में भारी दांव लगाया. ट्रंप ने हमले की पुष्टि की तो इन अकाउंट्स ने कुल 12 लाख डॉलर कमाए. पांच अकाउंट तो इसके बाद कभी एक्टिव नहीं हुए.

4. 3 जनवरी 2026: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का मामला
Polymarket जैसे ऑनलाइन प्रेडिक्शन मार्केट पर ‘BurdenSome-Mix’ नाम का नया अकाउंट दिसंबर 2025 में बना. 30 दिसंबर से 2 जनवरी तक इसने मादुरो के पद छोड़ने पर 32,500 डॉलर लगाए. 3 जनवरी को मादुरो को पद से हटा दिया गया. अकाउंट ने 4.36 लाख डॉलर जीते और तुरंत यूजरनेम बदलकर इनएक्टिव हो गया.

5. 2-9 अप्रैल 2025: (लिबरेशन डे टैरिफ और 90 दिन का सीजफायर)
ट्रंप ने 2 अप्रैल 2025 को दुनिया भर से आयात पर भारी टैरिफ लगाने की घोषणा की, जिससे शेयर बाजार गिर गए, लेकिन एक हफ्ते बाद 9 अप्रैल को उन्होंने चीन को छोड़कर बाकी देशों के लिए 90 दिन का टैरिफ विराम घोषित किया. इस ऐलान से S&P 500 इंडेक्स 9.5% उछल गया, जो दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ी बढ़त थी. ट्रेडिंग डेटा दिखाता है कि 18:00 BST के बाद स्टॉक मार्केट ऊपर जाने पर अचानक भारी दांव लगाए गए और 18:18 BST पर ट्रंप का ऐलान आया. इस उछाल से कुछ ट्रेडर्स को करीब 20 मिलियन डॉलर का मुनाफा हुआ.

नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री पॉल क्रुगमैन ने मार्च 2026 में आरोप लगाया कि ट्रंप के करीबियों ने क्रूड ऑयल मार्केट में अंदरूनी जानकारी का फायदा उठाकर करोड़ों कमाए.

तो क्या ट्रंप सचमुच इनसाइडर ट्रेडिंग के मास्टरमाइंड हैं?

कुछ विश्लेषक इसे इनसाइडर ट्रेडिंग का साफ संकेत मानते हैं क्योंकि समयबद्ध ट्रेडिंग और गोपनीय जानकारी का मिलान संदिग्ध लगता है, लेकिन दूसरे कहते हैं कि ट्रेडर्स ट्रंप की अनप्रेडिक्टेबल स्टाइल को अब समझ चुके हैं, इसलिए वे पहले से पोजीशन ले लेते हैं. फिर भी, पैटर्न इतना दोहराया गया है कि जांच की मांग बढ़ गई है.

अमेरिकी कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमिशन (CFTC) ने मार्च 2026 के ईरान पॉलिसी शिफ्ट (23 मार्च और 7 अप्रैल) से पहले के तेल फ्यूचर्स ट्रेड्स की जांच शुरू कर दी है. CME ग्रुप और ICE प्लेटफॉर्म पर हुए ट्रेड्स की जांच हो रही है. कुछ सीनियर डेमोक्रेट सांसदों ने सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमिशन (SEC) को चिट्ठी लिखकर जांच की मांग की. व्हाइट हाउस ने स्टाफ को इनसाइडर ट्रेडिंग न करने की चेतावनी दी थी, लेकिन अभी तक कोई ठोस सबूत या गिरफ्तारी नहीं हुई है.

आम निवेशकों और बाजार पर इसका क्या असर पड़ रहा है?

इनसाइडर ट्रेडिंग का सबसे बड़ा असर यह है कि बाजार में समानता खत्म हो रही है. कुछ चुनिंदा ट्रेडर्स को ट्रंप के ऐलान से पहले गोपनीय जानकारी मिल जाती है, जिससे वे मिनटों या घंटों पहले भारी दांव लगा लेते हैं. इससे बाजार की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं.

आम लोग सोचते हैं कि बाजार पहले से ही तय हो चुका है. बड़े खिलाड़ी अंदरूनी जानकारी से खेल रहे हैं, जबकि छोटे निवेशक सिर्फ नुकसान उठाते हैं. यह बाजार में समानता का अंत कर देता है. ऐसे पैटर्न से निवेशकों का भरोसा डगमगाता है क्योंकि वे महसूस करते हैं कि उनके पास समान मौका नहीं है.

बाजार पर कुल मिलाकर असर यह है कि अस्थिरता बढ़ गई है. तेल और स्टॉक दोनों में अचानक उछाल-गिरावट से वोलेटिलिटी बढ़ी, जो अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करती है. महंगाई, तेल की कीमतें, कंपनियों के शेयर और यहां तक कि आम आदमी की जेब पर असर.

एक्सपर्ट्स का कहना है कि भले ही हर बार इनसाइडर ट्रेडिंग साबित न हो, लेकिन ‘दिखावा’ ही निवेशकों का भरोसा तोड़ने के लिए काफी है. छोटे ट्रेडर्स के लिए बाजार अब और जोखिम भरा लगने लगा है, जिससे कई लोग दूर रहने लगे हैं या सतर्क हो गए हैं.

इस मामले में आगे क्या हो सकता है?

अभी तक कोई ठोस सबूत या गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन जांच तेज हो गई है. अमेरिकी कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमिशन (CFTC) ने मार्च 2026 के ईरान नीति बदलाव से पहले के ऑयल फ्यूचर्स ट्रेड्स की जांच शुरू कर दी है. यह जांच CME ग्रुप और ICE प्लेटफॉर्म पर हुए ट्रेड्स पर केंद्रित है, जहां लाखों-करोड़ों डॉलर के ट्रेड्स मिनटों पहले हुए थे.

CFTC चेयरमैन माइकल सेलिग ने 16 अप्रैल 2026 को कांग्रेस की समिति में साफ कहा, ‘जो भी फ्रॉड, मैनिपुलेशन या इनसाइडर ट्रेडिंग करेगा, हम उसे ढूंढ लेंगे और कानून की पूरी ताकत उस पर लगाएंगे.’ उन्होंने बताया कि CFTC के पास सैकड़ों या हजारों जांच चल रही हैं और इनसाइडर ट्रेडिंग अब उनकी टॉप प्रायोट है.

एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि सबूत मिलने पर कानूनी कार्रवाई होगो, लेकिन ESSEC बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर पॉल ओडेन का कहना है कि यह साबित करना बहुत मुश्किल है. अगर वित्तीय प्राधिकरण यह पता नहीं लगा पाते कि जानकारी का स्रोत कौन है, तो वे मुकदमा नहीं चलाएंगे. फिर भी, पैटर्न इतना साफ है कि कांग्रेस में सुनवाई जारी रह सकती है और नई नियम-कानून बन सकते हैं. अगर जांच में कुछ भी गलत पाया गया तो ट्रंप प्रशासन पर राजनीतिक दबाव बढ़ेगा.

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