तमिलनाडु विधानसभा की सभी 234 सीटों और पश्चिम बंगाल में पहले फेज की 152 सीटों के लिए आज शाम 5 बजे चुनाव पचार थम जाएगा। बंगाल में दूसरे फेज की वोटिंग 29 अप्रैल को होगी। रिजल्ट 4 मई को आएंगे।
उधर, गृह मंत्री अमित शाह ने दार्जिलिंग में एक रैली की। उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस, टीएमसी ने दार्जिलिंग के लोगों और मेरे गोरखा भाइयों के साथ घोखा और अन्याय किया है। मैं वादा करता हूं कि जैसे ही यहां भाजपा की सरकार बनेगी, गोरखाओं की लंबे समय से चली आ रही समस्या 6 महीने के भीतर हल कर दी जाएगी।’
तमिलनाडु में इन पार्टियों के बीच मुकाबला
तमिलनाडु में 4,023 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला द्रमुक और अन्नाद्रमुक गठबंधन के बीच है। कई सीटों पर अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके त्रिकोणीय मुकाबले में है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस चुनाव में 5,73 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के पात्र हैं। मतदान को बढ़ावा देने और 100 प्रतिशत मतदान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, चुनाव आयोग ने राज्य भर में व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किए हैं।
तमिलनाडु में 23 अप्रैल को विधानसभा चुनाव होना है. राज्य के 402 सीटों पर टोटल 4023 कैंडिडेट खडे़ हैं. रिजल्ट की घोषणा 4 मई की काउंटिग के बाद की जाएगी. वहीं, चुनाव से पहले एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने 3992 कैंडिडेट के एफिडेविट का एनालिसिस किया. आइये जानते हैं कि ADR ने इन कैंडिडेट्स को लेकर क्या चौंकाने वाले खुलासे किए…
कितने पढ़े-लिखे हैं नेताजी?
ADR की रिपोर्ट के मुताबिक, 402 सीटों के 3992 उम्मीदवारों में से 1822 ग्रेजुएट या उससे अधिक पढ़े-लिखे हैं. इनमें से 1711 कैंडिडेट्स ने 5वीं से 12वीं तक की पढ़ाई की है. हैरानी करने वाली बात ये है कि चुनावी मैदान में उतरे 95 कैंडिडेट पूरी तरह अनपढ़ यानि अनएजुकेटेड हैं और 56 उम्मीदवार साक्षर यानि सिर्फ पढ़ना-लिखना जानते हैं.
तमिलनाडु के जनप्रतिनिधि कितने अमीर?
करोड़पति कैंडिडेट्स
तमिलनाडु का विधानसभा चुनाव काफी महंगा दिखाई पड़ रहा है, क्योंकि मैदान में दावेदारी पेश कर रहा हर चौथा उम्मीदवार करोड़पति है और 22 तो अरबपति यानि 100 करोड़ से ज्यादा संपत्ति वाले कैंडिडेट्स हैं. वहीं, सभी उम्मीदवारों की औसत संपत्ति की बात करें तो ये 5.17 करोड़ रुपये आंकी गई है, जो पिछले चुनाव के 1.72 करोड़ के मुकाबले कई गुना ज्यादा है. बता दें कि इस चुनाव में लीमारोज मार्टिन, सी जोसेफ विजय और आधव अर्जुना सबसे अमीर कैंडिडेट हैं, जबकि एम मोहन कुमार, टी सेल्वराज, पी गुणसेकरन और ए जेगन सलामंदोस ने अपनी संपत्ति ‘शून्य’ घोषित की है.
तमिलनाडु के करोड़पति-अरबपति कैंडिडेट्स
कितने कैंडिडेट का क्रिमिनल रिकॉर्ड?
ADR रिपोर्ट के अनुसार, 18 प्रतिशत यानी 722 कैंडिडेट्स ने अपने पर अपराधिक मुकदमे दर्ज होने की घोषणा की है, जिसमें से 404 पर गंभीर मामले हैं. पार्टी के लिहाज से अन्नाद्रमुक (AIADMK) के 69 प्रतिशत, कांग्रेस के 50%, भाजपा के 48% और द्रमुक-टीवीके के 40-40 प्रतिशत कैंडिडे्टस का रिकॉर्ड दागी पाया गया है.
आधी आबादी की कितनी भागीदारी?
तमिलनाडु चुनाव में टोटल 3992 उम्मीदवारों में से केवल 442 यानी मात्र 11 प्रतिशत महिला उम्मीदवार ही इस बार चुनाव लड़ रही हैं. जाते-जाते बता दें कि ADR के ये आंकड़े दिखाते हैं कि विधानसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए अभी भी राजनीतिक दलों को बहुत काम करने की जरूरत है.
तमिलनाडु में स्टालिन सरकार की वापसी हो सकती है। DMK गठबंधन को 120 से 140 सीटें मिल सकती हैं। इनमें DMK को 100 से 110, कांग्रेस को 10 से 15 और गठबंधन की बाकी पार्टियों को भी 10 से 15 सीटें मिल सकती हैं।
2021 का रिजल्ट: DMK को 133 और कांग्रेस को 18 सीटें मिली थीं। गठबंधन ने 159 सीटें जीती थीं। DMK ने अपने दम पर बहुमत हासिल किया था।
दूसरी बड़ी पार्टी AIADMK के गठबंधन को 90 से 100 सीटें मिलने के आसार हैं। AIADMK को 70 से 80 सीटें मिल सकती हैं। 27 सीटों पर लड़ रही BJP का खाता खुलना मुश्किल है, लेकिन पार्टी ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया, तो 5 तक सीटें मिल सकती हैं। कोयंबटूर साउथ, तिरुनेलवेली, नागरकोइल, मोडाकुरिची और कारैकुडी सीट पर जीत के ज्यादा चांस हैं। गठबंधन की बाकी पार्टियों को 5 से 10 सीटें मिल सकती हैं।
- 2021 का रिजल्ट: AIADMK ने 66 और BJP ने 4 सीटें जीती थीं। गठबंधन को सिर्फ 75 सीटें मिली थीं।
3. तमिल फिल्मों से सुपरस्टार थलापति विजय की नई पार्टी TVK की एंट्री फीकी दिख रही है। पार्टी को 5 से 15 सीटें मिल सकती हैं। हालांकि, पार्टी का वोट शेयर 12% रह सकता है।
- 2021 का रिजल्ट: TVK पहली बार चुनाव लड़ रही है। पिछली बार एक्टर सीमान की पार्टी नाम तमिलर काची (NTK) और कमल हासन की मक्कल नीधि मय्यम (MNM) का खाता नहीं खुला था।
स्टालिन की वापसी की वजहें
मजबूत गठबंधन, महिलाओं में पॉपुलर योजनाएं और स्टालिन की इमेज
- गठबंधन: स्टालिन ने सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस को चुनाव के पहले मजबूत किया। गठबंधन को मैनेज करना उनकी सबसे बड़ी खासियत मानी जाती है। स्थानीय और जातियों वाली पार्टियों को साथ लाए।
- योजनाएं: कलैगनार मगलिर उरीमाई थोगाई योजना के तहत हर महिला को एक हजार रुपए महीने दिए गए। ये पैसा करीब 1 करोड़ महिलाओं को मिला। सरकारी बसों में महिलाओं के लिए फ्री सफर बड़ा फैक्टर है।
- सरकारी स्कूल से पढ़कर कॉलेज में जाने वाली लड़कियों को हर महीने एक हजार रुपए दिए गए। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए फ्री कोचिंग, लाइब्रेरी, रीडिंग रूम, स्कॉलरशिप प्रोग्राम चलाए। इनका फायदा लेने वाले युवा फर्स्ट टाइम वोटर हैं। तमिलनाडु में करीब 12.51 लाख युवा पहली बार वोट डालेंगे।
- इकलौती कमजोरी: गठबंधन की कमजोरी कांग्रेस है। उसे 28 सीटें मिली हैं। पार्टी के स्टार प्रचारक राज्य में कम ही एक्टिव रहे। कांग्रेस ने प्रचार का पूरा जिम्मा DMK को सौंप दिया।
AIADMK-BJP क्यों पीछे
AIADMK में झगड़ा, हिंदुत्व कार्ड का फेल होना, स्टालिन को घेर नहीं पाए
- गुटबाजी: पूर्व CM जयललिता की मौत के बाद से AIADMK में लीडरशिप का संकट रहा है। दो बड़े लीडर पलानीस्वामी और पन्नीरसेल्वम के बीच झगड़ा रहा। इससे पार्टी समर्थकों और वोटर्स को साफ नेतृत्व नहीं दिखता।
- स्टालिन के खिलाफ मुद्दा नहीं: AIADMK और BJP स्टालिन सरकार के खिलाफ बड़े मुद्दे और नैरेटिव तैयार नहीं कर सके। 2021 के बाद लोकसभा से लेकर स्थानीय चुनाव तक DMK ने ही जीते हैं। AIADMK भ्रष्टाचार, महिला सुरक्षा और महंगाई जैसे मुद्दे उठा रही है, लेकिन इनका असर नहीं दिखता।
- हिंदुत्व कार्ड बेअसर: BJP ने तमिलनाडु में तिरुपरनकुंद्रम के दरगाह विवाद के जरिए हिंदुत्व कार्ड खेला है। पूरी मशीनरी प्रचार में उतरी, लेकिन इसका टेस्ट बाकी है। हिंदुत्व का मुद्दा तमिलनाडु की द्रविड़ पॉलिटिक्स में काम नहीं करता।
- BJP का कमजोर होना: AIADMK पश्चिम और दक्षिण तमिलनाडु में ज्यादा मजबूत है। 140 सीटों वाले सेंट्रल, नॉर्थ और डेल्टा रीजन में विपक्षी गठबंधन कमजोर है। खासकर BJP इन इलाकों में बिल्कुल भी नहीं है। पार्टी के अंदर फूट भी दिखी। उसने फायरब्रांड नेता अन्नामलाई को अध्यक्ष पद से हटाया, फिर चुनाव में कोई जिम्मेदारी नहीं दी। BJP का कैडर मानता है कि AIADMK के दबाव में ऐसा किया गया। अन्नामलाई लगातार AIADMK के बड़े नेताओं के खिलाफ बयान दे रहे थे।
बंगाल में पहले चरण में कितनी सीटों पर चुनाव?
बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए 23 अप्रैल को 16 जिलों की 152 सीटों पर मतदान होगा। इनमें उत्तर बंगाल के आठ, दक्षिण बंगाल के तीन व जंगलमहल अंचल के पांच जिले शामिल हैं।
मुर्शिदाबाद की 22, कूचबिहार की नौ, जलपाईगुड़ी की सात, अलीपुरद्वार की पांच, कलिंपोंग की एक, दार्जिलिंग की पांच, उत्तर दिनाजपुर की नौ, दक्षिण दिनाजपुर की छह, मालदा की 12, बीरभूम की 11, पश्चिम बर्द्धमान की नौ, पूर्व मेदिनीपुर की 16, पश्चिम मेदिनीपुर की 15, झाड़ग्राम की चार, पुरुलिया की नौ व बांकुड़ा की 12 सीटें शामिल हैं।
पहले चरण में कुल 1,478 प्रत्याशी मैदान में हैं। मतदाताओं की कुल संख्या तीन करोड़ 60 लाख 77 हजार 171 है, जिनमें एक करोड़ 84 लाख 99 हजार 496 पुरुष, एक करोड़ 75 लाख 77 हजार 210 महिला व 465 ट्रांसजेंडर शामिल हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए 23 अप्रैल को 16 जिलों की 152 सीटों पर मतदान होगा. इनमें उत्तर बंगाल के आठ, दक्षिण बंगाल के तीन व जंगलमहल अंचल के 5 जिले शामिल हैं. पहले चरण के दौरान मतदान सुबह 7 बजे से शुरू होगा, जो शाम 6 बजे तक जारी रहेगा. हालांकि, कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा कारणों से समय थोड़ा बदला जा सकता है (जैसे शाम 5 बजे तक), लेकिन सामान्य तौर पर 7 बजे से मतदान शुरू होता है.
पहले चरण में ज्यादातर दक्षिण और पश्चिम बंगाल के जिले शामिल हैं. इनमें पुरुलिया, बांकुरा, झाड़ग्राम, पश्चिम मेदिनीपुर, पूर्व मेदिनीपुर और दक्षिण 24 परगना जैसे जिले आते हैं. इसके अलावा कोलकाता और हावड़ा की कुछ सीटों पर भी इसी चरण में मतदान होगा. इन इलाकों में कई ऐसी सीटें हैं जो काफी चर्चा में रहती हैं और राजनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. जैसे नंदीग्राम, खड़गपुर, पुरुलिया, बांकुरा और झाड़ग्राम. इन सीटों पर आमतौर पर कड़ा मुकाबला देखने को मिलता है
पहले चरण ता चुनाव क्यों है खास?
पहले चरण को खास इसलिए भी माना जाता है क्योंकि यह पूरे चुनाव का माहौल तय करता है. यहां के नतीजों से यह अंदाजा लगने लगता है कि आगे के चरणों में किस पार्टी को बढ़त मिल सकती है. खासकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और बीजेपी (BJP) के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलता है. इसके अलावा, इस चरण में आने वाले कई इलाके ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्र हैं, जहां वोटिंग का तरीका और मुद्दे बाकी शहरों से अलग होते हैं. इसलिए यहां का मतदान पैटर्न भी अलग नजर आता है और यह चुनाव को दिलचस्प बना देता है.
पश्चिम बंगाल की हॉट सीट
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में कई ऐसी सीटें हैं जो सबसे ज्यादा चर्चा में हैं और इन्हें हॉट सीट माना जा रहा है. इन सीटों पर बड़े नेताओं की साख दांव पर है और मुकाबला काफी कड़ा देखने को मिल रहा है. सबसे ज्यादा चर्चा भवानीपुर सीट की हो रही है. यह सीट बहुत अहम मानी जाती है क्योंकि यहां से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव लड़ रही हैं. उनके सामने बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी हैं, जिससे यह मुकाबला सीधा और बेहद दिलचस्प हो गया है. इसे सत्ता और प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है.
पानीहाटी सीट सुर्खियों में
पानीहाटी सीट भी इस बार सुर्खियों में है. यह सीट उत्तर 24 परगना जिले में आती है. हाल में हुए एक बड़े आपराधिक मामले के बाद यह सीट चर्चा में आई. बीजेपी ने यहां पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ को उम्मीदवार बनाया है, जबकि टीएमसी की तरफ से तीर्थंकर घोष मैदान में हैं. इस वजह से यहां चुनाव भावनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तर पर अहम बन गया है. नंदीग्राम सीट भी एक बार फिर केंद्र में है. यह इलाका पहले ममता बनर्जी का मजबूत गढ़ माना जाता था, लेकिन अब यहां सुवेंदु अधिकारी की चुनौती के कारण मुकाबला बहुत कड़ा हो गया है. इस सीट पर हर किसी की नजर बनी हुई है. मालदा और मुर्शिदाबाद जिले की कई सीटें भी इस बार खास हैं. यहां मुकाबला सीधा नहीं बल्कि तीन तरफा हो गया है, क्योंकि कांग्रेस भी अलग से चुनाव लड़ रही है. टीएमसी का दबदबा होने के बावजूद मुकाबला दिलचस्प और अनिश्चित माना जा रहा है.
बंगाल में बीजेपी और टीएमसी में कांटे की टक्कर
चुनाव आयोग ने कहा कि वह शराब की निगरानी से जुड़ी गतिविधियों समेत कई स्रोतों से शराब बैन के अपने नतीजे पर पहुंचे हैं। चुनाव आयोग ने बताया कि अप्रैल में शराब की बिक्री पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले ज्यादा रही है। बता दें कि बंगाल चुनाव में सत्ताधारी टीएमसी और बीजेपी के बीच जोरदार टक्कर देखने को मिल रही है।
‘बंगाल में होगा स्वतंत्र चुनाव’
- सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि बंगाल में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने के लिए वे कोई कसर नहीं छोड़ेंगे
- आयोग ने कहा कि राज्य सरकार, स्थानीय निकायों या स्वायत्त निकायों के किसी भी कर्मचारी को चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी
- वहीं, टीएमसी ने चुनाव आयोग पर बीजेपी की मदद करने का आरोप लगाया है
- चुनाव की घोषणा के बाद से चुनाव आयोग ने राज्य में बड़े पैमाने पर नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों का फेरबदल भी किया है








