मध्य प्रदेश के जबलपुर में बरगी डैम के बैकवॉटर (नर्मदा नदी के जलाशय) में गुरुवार की शाम एक बड़ा हादसा हो गया. एक पर्यटन क्रूज अचानक तेज आंधी-तूफान और ऊंची लहरों की वजह से पलट गया. इस घटना में अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग लापता हैं. यह हादसा […]
By UB India News • Patna, Bihar शुक्रवार, 1 मई 2026, 08:01 AM • 5 मिनट read
मध्य प्रदेश के जबलपुर में बरगी डैम के बैकवॉटर (नर्मदा नदी के जलाशय) में गुरुवार की शाम एक बड़ा हादसा हो गया. एक पर्यटन क्रूज अचानक तेज आंधी-तूफान और ऊंची लहरों की वजह से पलट गया. इस घटना में अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग लापता हैं. यह हादसा खमरिया टापू के पास हुआ, जहां क्रूज पर्यटकों को घुमाने ले जा रहा था. बरगी सीएसपी ने कहा कि अभी तक हादसे में 9 व्यक्तियों की मौत हो गई है। क्रूज में 43 व्यक्ति सवार थे, जिसमें से 28 व्यक्तियों को बचा लिया गया है बाकी लापता है, जिनकी तलाश जारी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हादसे के समय इस क्रूज पर करीब 29 से 43 लोग सवार थे. इनमें पर्यटकों के साथ-साथ कैप्टन और दो क्रू मेंबर भी शामिल थे, जो क्रूज के संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे थे.
किस क्रूड में हुआ हादसा?
यह क्रूज मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा संचालित की जाती थी और बरगी डैम पर चलने वाली प्रमुख क्रूज में से एक थी. साल 2006 में तैयार हुई इस क्रूज को खास तौर पर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था. इसकी क्षमता लगभग 60 यात्रियों की थी और इसमें बैठने, घूमने और डैम के खूबसूरत नज़ारों का आनंद लेने की सुविधा दी जाती थी, जिससे यह परिवार और पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय रही थी.
बरगी डैम हादसे में अभी राहत और बचाव कार्य चल रहा है। शुक्रवार की सुबह भी डैम से पांच शव निकाले गए हैं। अब प्रशासन ने बताया है कि क्रूज पर 43 लोग सवार थे। इनमें 28 लोगों को बचा लिया गया है। वहीं, बचे हुए छह लोगों की तलाश जारी है। रेस्क्यू के दौरान एक मार्मिक तस्वीर सामने आई है, एक-दूसरे से लिपटे हुए मां-बेटे के शव को निकाला गया है। इस मंजर को देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखों में आंसू आ गए।
सीने से बेटे के चिपकाए रही मां
शुक्रवार को बरगी डैम में रेस्क्यू के दौरान एक तस्वीर ने सभी को रुला दिया। एक महिला की लाश मिली है। वह अपने सीने से मासूम बेटे को चिपकाए थी। पानी के बहाव के बीच मां ने अपने बेटे का साथ नहीं छोड़ा। मां लाइफ जैकेट पहनी थी लेकिन बेटा ऐसे ही था। दुखद बात यह रही कि दोनों की जान नहीं बच पाई। रेस्क्यू टीम ने जब दोनों का शव निकाला दो वहां चीख पुकार मच गई। हर आंखें नम थी। महिला का नाम मरिना मैसी है और बेटे का नाम त्रिशान है। वह चार साल का था। दोनों दिल्ली से घूमने जबलपुर आए थे। पिता प्रदीप और बेटी सिया की जान बच गई है।
किसी ने लाइफ जैकेट नहीं दी
हादसे में बची सिया ने कहा कि हमलोग करीब साढ़े पांच बजे क्रूज पर चढ़े थे। हमें किसी ने लाइफ जैकेट नहीं दिया था। क्रूज बीच में पहुंची तो एकदम से तूफान आ गया। इसके बाद हमलोग क्रूज के नीचे वाले पार्ट में चले गए। मेरे पापा और एक अन्य अंकल ने लॉकर तोड़कर लाइफ जैकेट निकाली। पानी की तेज लहरें शिप के अंदर आ रही थी। हमलोग लाइफ जैकेट में बाहर निकल आए। मेरी मम्मी और भाई नहीं बचे हैं। गांव के लोगों ने आकर मदद शुरू की।
हादसे की मुख्य वजह अचानक आई तेज आंधी और तूफान बताई गई है. शाम करीब 5 बजे मौसम अचानक बदल गया और हवा की रफ्तार 60-70 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई, जिससे ऊंची लहरें उठने लगीं. क्रूज का संतुलन बिगड़ गया और वह कुछ ही मिनटों में पलटकर डूब गया.
क्रूज बैकवॉटर में लगभग 300 मीटर दूर किनारे से थी. पानी गहरा था (लगभग 20 फीट तक जहाज डूबा हुआ है). कुछ यात्रियों का कहना है कि लाइफ जैकेट हादसा शुरू होने के बाद दी गईं, जिससे घबराहट में कई लोग उन्हें पहन नहीं पाए. कुछ सर्वाइवर्स ने क्रू सदस्यों पर लापरवाही का आरोप भी लगाया है कि उन्होंने मौसम खराब होने पर क्रूज को किनारे नहीं लाया. एक बड़ा सवाल ये भी है कि मौसम विभाग ने हादसे से एक दिन पहले ही तेज हवाओं की चेतावनी दी थी, फिर भी क्रूज रवाना हुई.
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
हादसा होते ही स्थानीय लोगों, नाविकों और प्रशासन ने तुरंत बचाव शुरू कर दिया. SDRF, NDRF और आर्मी की टीमें रात भर काम करती रहीं. अब तक 22-24 लोगों को बचा लिया गया है. गोताखोर डूबी क्रूज के अंदर और आसपास सर्च कर रहे हैं. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की. अभी भी कुछ लोग लापता हैं, इसलिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है.
मंत्री ने दिए जांच के आदेश
आदेश के बाद पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि घटना की जांच के आदेश हमने विभाग को दिए हैं। अगर लापरवाही हुई है तो कठोर कार्रवाई की जाएगी। अभी तक नौ लोगों के शव मिले हैं। उन्होंने कहा कि 29 लोगों के टिकट थे। बच्चों के टिकट नहीं लगते हैं। इसलिए सवारों की संख्या अधिक है। सीसीटीवी फुटेज से पता चला है कि कुल 43 लोग सवार थे।
गौरतलब है कि हादसे में एक अन्य यात्री कोरी ने कहा कि किसी भी यात्री ने ‘लाइफ जैकेट’ नहीं पहन रखी थी। उन्हें अंदर कहीं रखा गया था। जब पानी भरने लगा तो उन्हें बांटने की कोशिश की गई जिससे अफरा-तफरी और धक्का-मुक्की मच गई। कुछ ही पलों में नाव पलट गई।