दुनिया में तनाव के बीच तेजी से बढ़ रहा सैन्य खर्च………..

विश्व भर में बढ़ती जियोपॉलिटिकल टेंशन और क्षेत्रीय संघर्षों के बीच Militarisation तेजी के साथ बढ़ रहा है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी SIPRI की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में ग्लोबल मिलिट्री खर्च बढ़कर 2.88 ट्रिलियन डॉलर तक जा पहुंचा है, जो पिछले साल के मुकाबले में 2.9 फीसदी ज्यादा है। यह आंकड़ा […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 1 मई 2026, 08:41 AM 3 मिनट read
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दुनिया में तनाव के बीच तेजी से बढ़ रहा सैन्य खर्च………..
Photo: UB India News Archive

विश्व भर में बढ़ती जियोपॉलिटिकल टेंशन और क्षेत्रीय संघर्षों के बीच Militarisation तेजी के साथ बढ़ रहा है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी SIPRI की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में ग्लोबल मिलिट्री खर्च बढ़कर 2.88 ट्रिलियन डॉलर तक जा पहुंचा है, जो पिछले साल के मुकाबले में 2.9 फीसदी ज्यादा है। यह आंकड़ा इस बात को दिखाता है कि विश्व का हर व्यक्ति एवरेज 350 अमेरिकी डॉलर डिफेंस पर खर्च कर रहा है।

5 देश मिलकर करते हैं दुनिया का 58% सैन्य खर्च

रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में सबसे ज्यादा सैन्य खर्च करने वाले देशों में अमेरिका टॉप पर रहा, जिसने 954 अरब डॉलर हथियारों पर खर्च किए। इसके बाद चीन ने 336 अरब डॉलर, रूस ने 190 अरब डॉलर, जर्मनी ने 114 अरब डॉलर और भारत ने 92 अरब डॉलर खर्च किए। विश्व के कुल सैन्य खर्च का लगभग 58 फीसदी हिस्सा इन 5 देशों का मिलाकर है।

देश का नाम 2025 में सैन्य खर्च
अमेरिका 954 अरब डॉलर
चीन 336 अरब डॉलर
रूस 190 अरब डॉलर
जर्मनी 114 अरब डॉलर
भारत 92 अरब डॉलर

53.5 ट्रिलियन डॉलर अमेरिका कर चुका है खर्च

दिलचस्प बात है कि अमेरिका का मिलिट्री बजट बाकी 6 बड़े देशों के कुल खर्च से भी अधिक है। अमेरिका, दूसरे विश्व युद्ध के बाद से ही लगातार सबसे बड़ा मिलिट्री बजट वाला देश बना हुआ है। अमेरिका, 1949 से अब तक लगभग 53.5 ट्रिलियन डॉलर अपने डिफेंस पर खर्च कर चुका है, जो वैश्विक कुल खर्च का आधे से भी ज्यादा है।

क्रीमिया पर कब्जे के बाद यूरोप ने भी बढ़ाया सैन्य खर्च

वैसे तो सैन्य खर्च आमतौर पर जंग या टेंशन के वक्त बढ़ता है और शांति के दौर में घट जाता है। लेकिन बीते एक दशक में अलग-अलग देशों का सैन्य खर्च लगातार बढ़ा है। 2014 में रूस के क्रीमिया पर कब्जे के बाद NATO देशों ने रक्षा बजट को GDP के 2 फीसदी तक ले जाने का टारगेट तय किया, जिसके बाद यूरोप में सैन्य खर्च तेजी से ऊपर गया।

प्रति व्यक्ति खर्च के मामले में टॉप पर कतर

सैन्य खर्च की बात करें तो प्रति व्यक्ति खर्च के केस में कतर टॉप है, जहां यह आंकड़ा 5 हजार 428 अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। इसके बाद, इजरायल और नॉर्वे दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं। वहीं, यूक्रेन में रूस के साथ चल रहे संघर्ष के चलते सैन्य खर्च में सबसे तेजी से बढ़ोतरी नजर आई है।

कुल मिलाकर, ग्लोबल लेवल पर बढ़ता सैन्य खर्च यह इशारा करता है कि विश्व फिर से अस्थिरता और सुरक्षा चिंताओं के दौर से गुजर रहा है, जहां देश अपनी सेना को मजबूत करने में जुटे हुए हैं।

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