पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु समेत पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे सोमवार को आएंगे। एग्जिट पोल ने इनमें से कई राज्यों में हार-जीत को लेकर ठोस संकेत दिए हैं। मगर बंगाल पर सबकी नजरें टिकी हैं कि भाजपा ऐतिहासिक जीत दर्ज कर पहली बार राज्य में सरकार बनाएगी या ममता बनर्जी की फिर से ताजपोशी होगी।
एग्जिट पोल को देखें तो केरल, असम और पुडुचेरी में स्थिति करीब-करीब स्पष्ट है। असम में भाजपा और पुडुचेरी में एनडीए की वापसी हो सकती है। तमिलनाडु में डीएमके की वापसी संभव है, लेकिन अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके भी वहां बड़े दल के रूप में उभर रही है। केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ की जीत की संभावना है। हालांकि, पश्चिम बंगाल को लेकर एग्जिट पोल भी स्पष्ट नहीं है।
लोकसभा चुनाव के बाद कई राज्यों में कमल खिला : 2024 में लोकसभा चुनावों के बाद ये विधानसभाओं के तीसरे दौर के चुनाव हैं। इससे पहले दो दौर में हुए विधानसभा चुनावों में एनडीए को अच्छी सफलता मिली थी। लोकसभा चुनावों में सीटें घटने के बावजूद राज्यों में एनडीए की ताकत बढ़ी है। बिहार, दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र में उसकी वापस हुई है। इसलिए पश्चिम बंगाल में यदि भाजपा जीतती है तो अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश समेत सात राज्यों के चुनाव में उसकी रणनीति को नई ताकत मिलेगी। दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हार होती है तो यह विपक्ष के लिए बड़ा झटका साबित होगा।
बंगाल में 432 पर्यवेक्षक तैनात : चुनाव आयोग ने पांचों राज्यों में मतदान की तैयारियां पूरी कर ली हैं। आयोग का विशेष ध्यान पश्चिम बंगाल पर है। यहां मतों की पारदर्शी और सुचारू गिनती सुनिश्चित करने के लिए 432 मतगणना पर्यवेक्षकों की तैनाती की गई है। संवेदनशील जिलों में अतिरिक्त पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं। सुबह 8 बजे से शुरू होने वाली मतगणना 293 विधानसभा क्षेत्रों के 2,920 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेगी। वहीं, तमिलनाडु में कुल 4023 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होगा।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के मतगणना केंद्र पर मतों की गिनती से एक दिन पहले रविवार को हंगामा हुआ। टीएमसी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जहां ईवीएम रखी गई थीं, वहां भाजपा के झंडे वाले वाहन को प्रवेश करने दिया गया।
केरल में मतदान प्रतिशत बढ़ा : चुनाव आयोग
तिरुवनंतपुरम। केरल में नौ अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में सेवा मतदाताओं के डाक मतपत्रों को शामिल करने के बाद मतदान प्रतिशत बढ़कर करीब 79.70 प्रतिशत हो गया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी रतन यू केलकर ने रविवार को यह जानकारी दी। चुनाव के बाद मतदान प्रतिशत 79.63 प्रतिशत रहा था, जिसमें डाक मतपत्र शामिल नहीं थे।








