ममता के हार की वजह जानने के लिए पहले भवानीपुर को समझना होगा……………

ममता बनर्जी भवानीपुर की सीट हार गईं मगर यह सवाल सबके जेहन में बार बार कैसे आ रहा है? ऐसा इसलिए क्योंकि सभी को मालूम है कि ममता बनर्जी भवानीपुर की वोटर हैं, वहीं रहती है,वहीं काली घाट में उनका घर है. बांग्ला में उनको घोरो मेय यानि घर की बेटी कहा जाता है तो […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 6 मई 2026, 05:25 AM 4 मिनट read
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ममता के हार की वजह जानने के लिए पहले भवानीपुर को समझना होगा……………
Photo: UB India News Archive

ममता बनर्जी भवानीपुर की सीट हार गईं मगर यह सवाल सबके जेहन में बार बार कैसे आ रहा है? ऐसा इसलिए क्योंकि सभी को मालूम है कि ममता बनर्जी भवानीपुर की वोटर हैं, वहीं रहती है,वहीं काली घाट में उनका घर है. बांग्ला में उनको घोरो मेय यानि घर की बेटी कहा जाता है तो इतना सब के होने के बाद ममता बनर्जी क्यों हार गईं?

पहले भवानीपुर को समझिए 

ममता बनर्जी के भवानीपुर में हार की वजह जानने के लिए आपको पहले भवानीपुर को समझना होगा.भवानीपुर विधानसभा सीट में सब तरह के लोग रहते हैं और यह पूर्ण रूप से कोलकाता की शहरी सीट है. विशुद्ध शहरी सीट होने के नाते और बंगाली हिंदुओं के यहां से कहीं और बसने की वजह से यहां गुजराती और मारवाड़ी वोटरों की संख्या बढ़ी है.भवानीपुर में मैं जब भी अपना शो ‘बाबा का ढाबा’ करने गया तो मुझे बड़ी संख्या में गुजराती और मारवाड़ी मिले. यही नहीं इस इलाके में सिख मतदाता भी हैं,यहां एक गुरुद्वारा भी है.यहां पर मुझे फाफड़ा, जलेबी बेचते हुए दुकानें दिखीं जहां पर लोगों की भारी भीड़ थी.ये गुजरातियों का प्रिय नाश्ता है .आम तौर पर बंगाली पूरी और आलू की सब्जी खाते हैं.

आरजी कर की घटना ने ममता की छवि को किया कमजोर 

पिछली बार की तुलना में ये समुदाय ममता बनर्जी से छिटक गया था क्योंकि ये समुदाय बिजनेस करता है और उन्हें लगा कि यहां व्यापार के लिए उतना कुछ नहीं किया जा रहा है जितना किया जाना चाहिए.चूंकि यह शहरी सीट है इसलिए महिला सुरक्षा भी एक मुद्दा बना, खासकर आरजी कर की घटना के बाद आम शहरी के मन में ममता बनर्जी की छवि धूमिल हुई.आरजी कर की घटना का असर यहां की महिलाओं और युवा वोटरों पर भी पड़ा.

ममता सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचा 

ममता बनर्जी के लक्ष्मी भंडार और महिलाओं से संबंधित अन्य योजनाओं का लाभ टीएमसी सुप्रीमो को यहां इसलिए नहीं मिल पाया क्योंकि इस शहरी क्षेत्र की महिलाओं ने उस स्कीम का फायदा ही नहीं लिया.इसलिए इस बार उन्होंने वोट भी ममता को नहीं दिया. भवानीपुर के अन्य मतदाताओं में बिहार, झारखंड और ओडिशा से बड़ी संख्या में लोग हैं.ओडिशा और बिहार में बीजेपी या एनडीए की सरकार है.इसलिए यहां पीढ़ियों से रहने वाले ये लोग भी लगता है इस बार बदल गए.

SIR ने भी किया खेला

ममता बनर्जी के हार की एक वजह एसआईआर में 42 हजार वोटों का कटना.इतनी ही पिछड़ी बार ममता बनर्जी की लीड थी.मगर लोकसभा चुनाव में भवानीपुर में तृणमूल कांग्रेस की बढ़त कम हुई थी और रही सही कसर एसआईआर ने पूरी कर दी. एक और महत्वपूर्ण कारण है कि चुनाव के ठीक पहले आईपैक के पैक अप होने के कारण तृणमूल कांग्रेस को मिलने वाला बैकअप नहीं मिल पाया जिससे बूथ मैनेजमेंट पर असर पड़ा.क्योंकि वोटरों को बूथ तक लाने की जिम्मेदारी इसी आईपैक पर थी.इसका खामियाजा तृणमूल कांग्रेस को पूरे बंगाल में झेलना पड़ा.

बंगाली हिंदू और गैर बंगाली हिंदू दोनों को साध गई बीजेपी

ममता बनर्जी के खिलाफ 15 साल की सत्ता विरोधी लहर तो थी ही, इससे कोई इंकार नहीं कर सकता.दूसरी तरफ बीजेपी ने ममता बनर्जी के खिलाफ प्रचार बहुत अच्छा चलाया.जिसमें ममता बनर्जी को भ्रष्ट और तृणमूल कांग्रेस पर सिंडिकेट चलाने का आरोप लगा कर अच्छा माहौल बनाया. अब बात करते हैं कि भवानीपुर में बंगाली हिंदू और गैर बंगाली हिंदू की.भवानीपुर में करीब 42 फीसदी बंगाली हिंदू हैं और 34 फीसदी गैर बंगाली हिंदू है.इसको ध्यान में रखकर ममता बनर्जी ने मछली को चुनावी मुद्दा बनाया.मगर इस बार बीजेपी ने गैर बंगाली हिंदू के साथ साथ बंगाली हिंदुओं में भी सेंध लगाई है.

वैसे ममता बनर्जी को अपने खिसकते वोट बैंक का अहसास हो गया था. यही वजह है कि इस बार उन्होंने भवानीपुर में खूब पदयात्रा की.लोगों से मिलीं. मुझे बहुत सारे लोग मिले जिन्होंने बताया कि दीदी इतना तो भवानीपुर में नहीं घूमती थीं.शायद इन्हीं सब का असर रहा कि ममता बनर्जी की हार का आंकड़ा 15 हजार के आसपास ही रहा मगर अब सबसे बड़ा सवाल है कि क्या दो जगह से जीते हुए सुवेंदु अधिकारी अपनी एक सीट छोड़ेंगे? तो क्या ममता बनर्जी उस सीट से उपचुनाव लड़ कर विधानसभा में आना चाहेंगी?

 

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