क्या सुवेंदु अधिकारी को मारने का था प्लान?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे आने के बाद राज्य की सियासत में ‘रक्तचरित्र’ का एक ऐसा खौफनाक अध्याय लिखा गया है, जिसने कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दी हैं. शनिवार को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह से पहले, भाजपा के कद्दावर नेता सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक और पूर्व वायुसेना जवान चंद्रनाथ रथ की […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 7 मई 2026, 05:56 AM 7 मिनट read
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क्या सुवेंदु अधिकारी को मारने का था प्लान?
Photo: UB India News Archive
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे आने के बाद राज्य की सियासत में ‘रक्तचरित्र’ का एक ऐसा खौफनाक अध्याय लिखा गया है, जिसने कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दी हैं. शनिवार को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह से पहले, भाजपा के कद्दावर नेता सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक और पूर्व वायुसेना जवान चंद्रनाथ रथ की सरेआम हत्या कर दी गई. लेकिन यह मामला सिर्फ एक पीए की मौत तक सीमित नहीं है. घटना की क्रोनोलॉजी, हमलावरों की तादाद, हथियारों की क्वालिटी और वारदात का तरीका (Modus Operandi) चिल्ला-चिल्ला कर कह रहा है कि यह एक बहुत बड़ी ‘टारगेट किलिंग’ की कोशिश थी. जिस सफेद स्कॉर्पियो को निशाना बनाया गया, वह अक्सर शुवेंदु के काफिले का हिस्सा रहती है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या सुवेंदु अधिकारी की जान लेने के लिए कोई पेशेवर ‘डेथ स्क्वाड’ भेजा गया था? इस हत्याकांड ने बंगाल की राजनीति में वो आग लगा दी है, जो आने वाले दिनों में बड़े तूफान का संकेत दे रही है.

सफेद स्कॉर्पियो और ‘टारगेट’ का जानलेवा कंफ्यूजन

बुधवार रात करीब 11 बजे जब चंद्रनाथ रथ कोलकाता से मध्यमग्राम लौट रहे थे, तो वे सफेद रंग की स्कॉर्पियो में सवार थे. इस गाड़ी पर ‘पश्चिम बंगाल विधानसभा’ का बोर्ड लगा हुआ था. यह वही पहचान है जो आमतौर पर विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी की गाड़ियों की होती है. पुलिस सूत्रों का प्रबल मानना है कि हमलावरों ने इसी बोर्ड और गाड़ी के मॉडल को देखकर यह अंदाजा लगाया कि भीतर सुवेंदु अधिकारी ही बैठे हैं. हमलावरों को शायद पक्की जानकारी थी कि शुवेंदु इसी रास्ते से गुजरने वाले हैं, लेकिन गाड़ी में उनके पीए को देखकर भी उन्होंने रहम नहीं किया.
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि हमलावर काफी दूर से गाड़ी का पीछा कर रहे थे. मध्यमग्राम के दोहरिया इलाके में एक छोटी कार ने अचानक ओवरटेक करके स्कॉर्पियो का रास्ता रोका. इससे पहले कि ड्राइवर बुद्धदेव कुछ समझ पाते, 4 बाइकों पर सवार 8 शूटरों ने खिड़की से सटाकर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं. यह हमला इतना सटीक और प्रोफेशनल था कि चंद्रनाथ को संभलने का एक मौका भी नहीं मिला. यह महज एक हत्या नहीं, बल्कि युद्ध स्तर पर की गई घेराबंदी थी.

8 बंदूकधारी और 4 गाड़ियों का अभेद्य चक्रव्यूह

एक साधारण पीए की हत्या के लिए 8 बंदूकधारियों और 5 गाड़ियों (4 बाइक + 1 कार) का इस्तेमाल किसी के गले नहीं उतर रहा है. पुलिस के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि यह ‘ओवरकिल’ (जरूरत से ज्यादा ताकत का इस्तेमाल) की स्थिति थी. आमतौर पर ऐसी घेराबंदी किसी बड़े राजनेता या वीवीआईपी को खत्म करने के लिए की जाती है. हमलावरों ने जिस ‘ग्लॉक 47X’ पिस्टल का इस्तेमाल किया, वह कोई गली-मोहल्ले के मामूली बदमाश इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि पेशेवर सुपारी किलर और ट्रेंड अपराधी ही ऐसे हथियारों का इस्तेमाल करते हैं.

वारदात की क्रोनोलॉजी देखिए:

पहले कार से रास्ता ब्लॉक किया गया, फिर बाइकों से घेराबंदी की गई और अंत में ड्राइवर की बगल वाली सीट (जहां अक्सर वीआईपी बैठते हैं) को निशाना बनाकर 12 राउंड गोलियां दागी गईं. यह पूरी प्लानिंग किसी ‘प्लान ए’ यानी सुवेंदु अधिकारी को रास्ते से हटाने के इरादे से की गई लगती है. जब शूटरों ने करीब से देखा कि गाड़ी में शुवेंदु नहीं बल्कि उनके पीए हैं, तब भी उन्होंने गोलियां चलाईं, जिसे ‘प्लान बी’ माना जा रहा है—यानी अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी के सबसे वफादार साथी को मारकर उसे मानसिक रूप से तोड़ने का आखिरी अल्टीमेटम देना.
प्रोफेशनल शूटर और फर्जी नंबर प्लेट का गहरा जाल
राज्य पुलिस के डीजीपी सिद्धनाथ गुप्ता ने खुद स्वीकार किया है कि हमलावरों ने जिस निसान माइक्रा कार का इस्तेमाल किया, उस पर लगी नंबर प्लेट फर्जी थी. वह नंबर सिलीगुड़ी का था, लेकिन जांच में वह किसी दूसरी गाड़ी का निकला. इससे साफ है कि इस कत्ल की साजिश हफ्तों पहले रची गई थी और इसके पीछे कोई बड़ा मास्टरमाइंड बैठा है. हमलावरों ने अपने चेहरे हेलमेट से ढके हुए थे और उन्हें चंद्रनाथ की लोकेशन की पल-पल की जानकारी कोई ‘इनसाइडर’ दे रहा था.
अस्पताल की रिपोर्ट के मुताबिक, चंद्रनाथ के सीने में जो दो गोलियां लगीं, वे सीधे दिल के आर-पार हो गईं. यह इस बात का सबूत है कि शूटर ‘शार्पशूटर’ थे और वे यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि गाड़ी में बैठा व्यक्ति किसी भी हाल में जिंदा न बचे. ड्राइवर बुद्धदेव बेरा को भी तीन गोलियां मारी गईं ताकि कोई गवाह जीवित न रहे. यह पूरी क्रोनोलॉजी किसी बड़े अंडरवर्ल्ड ऑपरेशन या टारगेटेड पॉलिटिकल असेसिनेशन की याद दिलाती है, जिसने बंगाल के प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है.

शपथ ग्रहण से पहले खौफ का तांडव और सियासी उबाल

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस हत्या का समय (Timing) सबसे ज्यादा संदिग्ध है. शनिवार को बंगाल में भाजपा की नई सरकार का शपथ ग्रहण होना है. ऐसे समय में सुवेंदु अधिकारी, जो इस जीत के सबसे बड़े नायकों में से एक हैं, उनके दाहिने हाथ की हत्या करना भाजपा के मनोबल को तोड़ने की एक सोची-समझी कोशिश हो सकती है. शुवेंदु ने घटना के बाद गुस्से में कहा कि “यह हमला असल में मुझ पर था, मेरे साथी ने मेरी जगह अपनी जान दे दी.”
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने भी इसे एक सोची-समझी राजनीतिक हत्या करार देते हुए कहा है कि विपक्षी खेमा शुवेंदु की सुरक्षा को भेदने की फिराक में है. दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस ने इसे भाजपा की अंदरूनी कलह बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की है. हालांकि, मध्यमग्राम की सड़कों पर जो खून बहा है, उसने यह साफ कर दिया है कि बंगाल में सत्ता का संघर्ष अब खूनी मोड़ ले चुका है.

अब तक के मुख्य घटनाक्रम और पुलिस की थ्योरी

प्वाइंट ब्लैंक रेंज फायरिंग: हमलावरों ने इतने करीब से गोलियां चलाईं कि कार की बॉडी पर एक भी निशान नहीं आया, सारी गोलियां सीधे शीशे को चीरती हुई चंद्रनाथ के शरीर में धंस गईं.
तीन-चार दिन की रेकी: पुलिस को संदेह है कि शूटर पिछले कई दिनों से शुवेंदु और चंद्रनाथ के रूट की रेकी कर रहे थे और बुधवार रात उन्हें लगा कि बड़ा शिकार उनके जाल में फंस गया है.
फर्जी कार का सुराग: पुलिस ने जो निसान माइक्रा जब्त की है, उसका सुराग सिलीगुड़ी से जुड़ रहा है, लेकिन फर्जी नंबर प्लेट ने जांच को पेचीदा बना दिया है.
ड्राइवर की जंग: कार ड्राइवर बुद्धदेव बेरा कोलकाता के अपोलो अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं, उनका बयान इस केस का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट हो सकता है.
सुरक्षा का घेरा: मध्यमग्राम और आसपास के इलाकों में केंद्रीय पुलिस बल (CAPF) की तैनाती कर दी गई है और राज्यपाल ने डीजीपी को 24 घंटे के भीतर ठोस कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.
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