क्या अब ममता विपक्षी दलों में ला सकती हैं एकमतता ?

पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में नई सरकारों के गठन की तैयारियां चल रही हैं। TVK नेता सुपरस्टार विजय शायद 7 मई को और असम में हिमंता विश्व शर्मा 11 मई के बाद शपथ लेंगे। बंगाल में नई बीजेपी सरकार नौ मई को रवींद्र जयंती के दिन शपथ लेगी। ये भी तय है […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 7 मई 2026, 05:36 AM 5 मिनट read
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क्या अब ममता विपक्षी दलों में ला सकती हैं एकमतता ?
Photo: UB India News Archive

पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में नई सरकारों के गठन की तैयारियां चल रही हैं। TVK नेता सुपरस्टार विजय शायद 7 मई को और असम में हिमंता विश्व शर्मा 11 मई के बाद शपथ लेंगे। बंगाल में नई बीजेपी सरकार नौ मई को रवींद्र जयंती के दिन शपथ लेगी।  ये भी तय है कि शुभेन्दु अधिकारी बंगाल के नए मुख्यमंत्री होंगे लेकिन मंगलवार को ममता बनर्जी ने कहा कि वो राज्यपाल को अपना इस्तीफा देने नहीं जाएंगी। ममता ने कहा कि वह चुनाव हारी नहीं हैं, उन्हें हराया गया है, वह इस्तीफा क्यों दे? वैसे चुनाव हारने के बाद इस्तीफा देने या न देने से कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन ममता के इस रुख से साफ है कि चुनावी झगड़ा खत्म नहीं हुआ है। ममता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने SIR के ज़रिए गड़बड़ी की, वोटों की गिनती में हेराफेरी की और बीजेपी को चुनाव में जिताया।

जहां तक नये सीएम का सवाल है, पुराना अनुभव तो ये कहता है कि मोदी के राज में ये बताना कि सीएम कौन बनेगा बड़ा रिस्की काम है लेकिन अगर शुभेंदु अधिकारी सीएम बनते हैं तो ये ममता के जले पर नमक छिड़कने जैसा होगा। एक ज़माने में शुभेंदु अधिकारी तृणमूल कांग्रेस में ममता के बाद दो नंबर के लीडर हुआ करते थे, उन्हीं शुभेंदु अधिकारी ने ममता को दो-दो बार विधानसभा चुनाव में हराकर उन्हें रुला दिया। शुभेंदु सिर्फ 6 साल पहले बीजेपी में शामिल हुए, ममता ने इन 6 सालों में शुभेंदु को खूब दौड़ाया, ममता की पुलिस ने शुभेंदु को खूब सताया।

अब अगर शुभेंदु सीएम बने तो ममता का जीना मुश्किल हो जाएगा। जो अपना था उससे खाई गई चोट ज्यादा दर्द देती है। इसका अहसास ममता को हर रोज़ होगा। ममता ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग ने SIR में वोट कटवाकर उन्हें हरवाया। मैंने अपने शो ‘आज की बात’ में उन 20 सीटों के नतीजे दिखाए, जहां SIR में सबसे ज्यादा वोट कटे थे, इनमें से ममता ने 12 सीटें जीती। तो कोई कैसे कह सकता है कि SIR के कारण ममता की हार हुई? चुनाव आयोग को दोषी ठहराने से पहले ये भी देखना चाहिए कि इस बार बंगाल में रिकॉर्ड 93 प्रतिशत वोटिंग हुई। इसका मतलब चुनाव आयोग ने किसी को वोट देने से नहीं रोका। इसलिए इधर-उधर की बात करने के बजाए कुछ आत्मचिंतन करना चाहिए और हार को मर्यादा के साथ स्वीकार करना चाहिए।

विपक्षी एकता

इस बार चुनाव नतीजों का एक असर ये हो रहा है कि INDIA गठबंधन को इन नतीजों ने फिर से ज़िंदा कर दिया। ममता बनर्जी पहले दावा करती थी कि मोदी का मुकाबला वही कर सकती हैं। तृणमूल कांग्रेस के नेता उन्हें  मोदी-विरोधी मोर्चे का नेता बनाने की मांग कर रहे थे लेकिन मंगलवार को ममता ने कहा कि चुनाव नतीजे आने के बाद वह अब फ्री हो गई हैं और वह पूरे देश में घूम कर बीजेपी के खिलाफ मुहिम चलाएंगी। ममता ने कहा, उन्हें सोनिया गांधी और राहुल गांधी से लेकर उद्धव ठाकरे और अरविंद केजरीवाल तक, विपक्ष के सभी नेताओं के फोन आए, अब वो भी INDIA गठबंधन को मजूबत करेंगी।

जम्मू कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला कह रहे हैं कि किसी राज्य में बीजेपी की इकतरफ़ा जीत का ऐसा नतीजा कोई पहली बार तो आया नहीं, लेकिन हर चुनाव में होता यही है कि विरोधी दल पहले आपस में लड़ते हैं, फिर बीजेपी की जीत के बाद एलायंस मज़बूत करने की बातें करते हैं, ऐसे में पहले ये तय करना होगा कि ये गठबंधन संसद के लिए है या फिर राज्यों के चुनावों में भी लागू होगा। कुछ दिन पहले राहुल गांधी ने बंगाल में अपने प्रचार के समय नरेंद्र मोदी की ताकत बढ़ाने के लिए ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया था।

ममता ने ‘एकला चलो’ का नारा दिया था, राहुल ने TVK के विजय के साथ जाने का ऑफर ठुकराया था, केजरीवाल ने कांग्रेस पर बीजेपी की B टीम होने का आरोप लगाया था, लेकिन आज ऐसा लगा कि ममता की हार ने राहुल गांधी, अखिलेश यादव, अरविंद केजरीवाल सबको डरा दिया है। अगर मोदी ममता को हरा सकते हैं तो बाकी किसी की क्या बिसात है? अब सबको लगता है कि इनमें से कोई अकेले मोदी का मुकाबला नहीं कर सकता। इसलिए सबको साथ चलना पड़ेगा। लेकिन इस वक्त ये सब ख्याली पुलाव है। पंजाब में केजरीवाल कांग्रेस से लड़ेंगे, तमिलनाडु में राहुल DMK का साथ छोड़कर विजय के साथ चलेंगे, सब अपनी-अपनी सुविधा देखेंगे, तो फिर हम साथ-साथ हैं का क्या होगा?

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