क्या है चीन की “डेथ वैन” , चीन के दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को मौत की सजा……………

चीन ने भ्रष्टाचार के मामलों में दो पूर्व रक्षा मंत्री ली शांगफू और वेई फेंगहे को मौत की सजा सुनाई है। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, दोनों को पहले 2 साल जेल में रखा जाएगा। अगर वह दो साल तक कोई नया अपराध नहीं करता तो सजा को आजीवन कारावास में बदला जा सकता […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 8 मई 2026, 10:27 AM 8 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
क्या है चीन की “डेथ वैन” , चीन के दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को मौत की सजा……………
Photo: UB India News Archive

चीन ने भ्रष्टाचार के मामलों में दो पूर्व रक्षा मंत्री ली शांगफू और वेई फेंगहे को मौत की सजा सुनाई है। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, दोनों को पहले 2 साल जेल में रखा जाएगा। अगर वह दो साल तक कोई नया अपराध नहीं करता तो सजा को आजीवन कारावास में बदला जा सकता है। ली शांगफू को पिछले साल अचानक पद से हटाया गया था, जबकि वेई फेंगहे भी सैन्य भ्रष्टाचार जांच के दायरे में आए थे। जिसके बाद दोनों को 2024 में चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी से निष्कासित किया गया था। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह कार्रवाई राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का हिस्सा है। पिछले कुछ वर्षों में चीन की सेना और रक्षा से जुड़े के कई वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है।

ली शांगफू पर रिश्वत और अनुशासन उल्लंघन के आरोप

चीन के पूर्व रक्षा मंत्री ली शांगफू को पिछले साल अक्टूबर में अचानक पद से हटा दिया गया था। वे करीब दो महीने तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए थे, जिससे कई तरह की अटकलें शुरू हो गई थीं। अब पहली बार चीनी अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़ी जांच चल रही थी। CCTV की रिपोर्ट के मुताबिक सैन्य अनुशासन जांच एजेंसी ने पाया कि ली ने गंभीर रूप से पार्टी अनुशासन और कानून का उल्लंघन’ किया। उन पर बड़े पैमाने पर रिश्वत लेने, दूसरों को रिश्वत देने और पद का दुरुपयोग करने के आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि ली की गतिविधियों से सेना के हथियार डेवलपमेंट और मिलिट्री इक्विपमेंट की इमेज को भारी नुकसान पहुंचा।

पूर्व रक्षा मंत्री वेई फेंगहे पर भी कार्रवाई

चीन के पूर्व रक्षा मंत्री वेई फेंगहे पर रिश्वत लेने और अपने पद का गलत इस्तेमाल करने के आरोप लगाए गए हैं। चीन की सैन्य अदालत ने उन्हें भ्रष्टाचार का दोषी माना है। जांच में सामने आया कि वेई फेंगहे ने रक्षा मंत्रालय और सेना से जुड़े फैसलों में फायदा पहुंचाने के बदले कथित तौर पर रिश्वत ली थी। वेई फेंगहे चीन के सीनियर सैन्य अधिकारियों में गिने जाते थे। वे चीन के पूर्व रक्षा मंत्री होने के साथ चीनी सेना में रॉकेट फोर्स के कमांडर भी रह चुके हैं। रॉकेट फोर्स चीन की मिसाइल और परमाणु हथियार सिस्टम को संभालती है।

रॉकेट फोर्स पर जांच का फोकस

रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन में चल रही भ्रष्टाचार जांच का सबसे बड़ा सेंटर PLA रॉकेट फोर्स और सेना के हथियार खरीद विभाग को माना जा रहा है। PLA रॉकेट फोर्स चीन की सेना की वह खास यूनिट है, जो देश की परमाणु मिसाइलों और लॉन्ग रेंज की बैलिस्टिक मिसाइलों को संभालती है।

इसे चीन की सैन्य ताकत का बेहद अहम हिस्सा माना जाता है, क्योंकि यही यूनिट जरूरत पड़ने पर परमाणु हमला करने की क्षमता रखती है। जांच एजेंसियों को शक है कि सेना के लिए हथियार खरीदने, रक्षा सौदों और सैन्य उपकरणों की सप्लाई में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ। आरोप हैं कि कई अधिकारियों ने ठेके देने और बड़े सैन्य सौदों में रिश्वत ली।

सेंट्रल मिलिट्री कमीशन ने मामले की जांच की थी

ली शांगफू और वेई फेंगहे के मामले में सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) की जांच एजेंसियों ने भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच की थी। CMC चीन की सर्वोच्च सैन्य संस्था है, जो चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) और चीन सरकार की ओर से सेना पर नियंत्रण रखती है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग CMC के चेयरमैन हैं। इसके अधीन पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA), पीपुल्स आर्म्ड पुलिस (PAP) और मिलिशिया काम करते हैं।

शी जिनपिंग के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का हिस्सा

पिछले एक साल में चीन के सैन्य और एयरोस्पेस सेक्टर से जुड़े दर्जनों सीनियर अधिकारियों को उनके पदों से हटाया गया है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह कार्रवाई राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भ्रष्टाचार और अविश्वास के खिलाफ अभियान का हिस्सा है।

 

चीन में अब मृत्यु की सजा जहरीले इंजेक्शन से दी जाती है. इसे उस वैन के अंदर देते हैं, जिन्हें वहां एग्जीक्यूशन वैन यानि फांसी वैन कहा जाता है. ये पूरे देश जहां लोगों को मौत की सजा देनी हो, वहां जाती हैं. हालांकि अब ये जहां भी जाती हैं वहां लोग इसको देखकर ही सहम जाते हैं. चीन ने नागरिकों को फांसी स्थल पर लाए बिना ही उन्हें मारने की एक विधि कई सालों से विकसित कर ली है, ये किया जाता है खौफनाक मौत की वैन के जरिए.
बाहर से देखने पर ये खौफनाक गाड़ियां आम पुलिस वाहनों जैसी लगती हैं, जिनमें से कई 24 सीटों वाली बसें हैं. जिन्हें अपने घर के पास आता देखकर दहशत का माहौल बन जाता है. बिना खिड़कियों वाली ये वैनें असल में चीन के हर राज्य में चलती-फिरती फांसी की कोठरी की तरह काम करती हैं.

चीन के पास डेथ वैन का बेड़ा

चीन के पास इन डेथ वैन का एक बेड़ा है, जिसमें दोषियों को घातक इंजेक्शन द्वारा कुशलतापूर्वक और साफ-सुथरे तरीके से मौत के घाट उतारा जाता है. किसी विशेष प्रांत के कस्बों और गांवों में स्थित अदालतों द्वारा जब फांसी का आदेश दिया जाता है, तो ये वैन उसे अंजाम देने के लिए वहां पहुंच जाती हैं. इसमें जल्लाद और चिकित्सा कर्मचारी होते हैं.

इसमें अपराधियों को जहरीला इंजेक्शन देते हैं

दरअसल ये डैथ वैन एक मिनीबस है, जो सात मीटर लंबी है. इसे चीन की ही एक कंपनी बनाती है. बस के अंदर एक स्ट्रैचर होता है, जिससे अपराधियों बांध दिया जाता है. फिर उन्हें जहरीला इंजेक्शन लगाया जाता है. बस में एक वीडियो के जरिए ये देखा जाता है कि फांसी की प्रक्रिया राज्य के नियमों के अनुसार हो. कहा जाता है कि जहरीला इंजेक्शन देने के बाद जब कैदी की मृत्यु हो जाती है तो बस में मौजूद डॉक्टर और नर्स उसके अंग निकाल लेते हैं, ताकि उन्हें प्रत्यारोपित कर सकें.

हालांकि चीन की इस प्रथा की अमानवीयता के लिए आलोचना की गई है, लेकिन चीन सरकार इसे सही ठहराती है. उसका कहना है कि यह दानदाताओं और उनके परिवारों की अनुमति से ही किया जाता है.

चीन में सबसे ज्यादा फांसी

चीन अन्य किसी भी देश की तुलना में अधिक कैदियों को फांसी देता है. यहां 68 ऐसे अपराध हैं, जिनके लिए मृत्युदंड का प्रावधान है. डेथ वैन को एग्जीक्यूशन वैन भी कहा जाता है. इनके प्रयोग के पहले दोषियों को सिर के पिछले हिस्से में गोली मारकर मौत की सजा दी जाती थी, लेकिन इसमें बहुत अधिक खून बहने के कारण जल्लादों को अक्सर रबर के जूते पहनने पड़ते थे. कभी-कभी कैदियों को कई बार गोली मारनी पड़ती थी.
इन वैन में अंदर इस तरह स्ट्रैचर होती हैं, जिन पर अपराधी को लिटाकर उसे जहरीला इंजेक्शन लगाया जाता है
फिर इसके बाद चीन ने मृत्युदंड के लिए जहरीले इंजेक्शन का इस्तेमाल शुरू किया. इनके लिए खासतरह की वैन बनवाई गईं, जो हर गांव शहर में जाकर दोषियों की मृत्युदंड की सजा को क्रियान्वित कर सकें. चीन में डैथ वैन दो दशकों से इस्तेमाल हो रही हैं. कई बार तो ये भी होता है कि चुपचाप मौत की सजा को अंजाम दे दिया जाता है. परिवार को अक्सर बाद में बताया जाता है.

कैसे इन वैन में दी जाती है मौत की सजा

कैदी को जेल से सेडेट यानि हल्का बेहोश करके वैन में लाया जाता है. वैन को अक्सर जेल या कोर्ट की साइट के पास लाया जाता है. कैदी को स्लाइडिंग बेड पर लिटाया जाता है और स्ट्रैप्स से बांध दिया जाता है. डॉक्टर या टेक्निशियन नस में पाइप नली से जुड़े इंजेक्शन को लगाकर छोड़ देते हैं. उसके बाद पुलिस अधिकारी एक बटन दबाता है, जो ऑटोमैटिक इंजेक्शन सिस्टम को सक्रिय करता है.

इंजेक्शन में क्या क्या होता है

इस इंजेक्शन में मिली जुली कई चीजें होती हैं. सोडियम थियोपेंटल बेहोशी के लिए, पैंक्रोनियम ब्रोमाइड सांस रोकने के लिए और पोटैशियम क्लोराइड दिल की धड़कन रोकने के लिए. कुछ रिपोर्ट्स में सिंगल एनेस्थेटिक इंजेक्शन की भी बात है. ये सारी दवाएं बीजिंग से सप्लाई होती हैं.
कैमरे और मॉनिटर से पूरी प्रक्रिया देखी और रिकॉर्ड की जाती मौत की पुष्टि कुछ सेकंड्स से मिनटों में की जाती है. फिर बॉडी से प्रत्यारोपण के लिए कुछ अंग निकाले जाते हैं.
वर्ष 2009 में स्वयंसेवी रिपोर्टिंग संगठन मिंगहुई ने दावा किया, “चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अधिकारियों की नज़र में इन वाहन का सबसे बड़ा फायदा अपराधियों से उनके अंग निकालकर मुनाफा कमाना है. उनकी आंखें, गुर्दे, यकृत, अग्न्याशय, फेफड़े और शरीर के अन्य सभी उपयोगी अंग निकाल लिए जाते हैं. फिर इन अंगों को बीजिंग, शंघाई और ग्वांगझू के अस्पतालों में भेजा जाता है , जहां इन्हें प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे अमीर लोगों को या विदेशों से आने वाले ‘अंग प्रत्यारोपण पर्यटकों’ को बेच दिया जाता है.”
UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी
खास खबर

खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]

UB India News27 अग॰
पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………
खास खबर

पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………

पंजाब में 25 सालों तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान 2020 में यह ढाई दशक पुरानी दोस्ती टूट गई थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज हो गई है. बीजेपी […]

UB India News27 अग॰
अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?
खास खबर

अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव आया है. एक ओर दोनों देश व्यापार, वैश्विक मंचों और बहुपक्षीय संगठनों में साथ दिखते हैं तो दूसरी ओर हिमालयी सीमा पर तनाव ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है. ऐसे वक्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल […]

UB India News27 अग॰
भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..
खास खबर

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या आने वाले कुछ सालों में दोगुनी होकर करीब 3 हजार तक पहुंच सकती है. जापान दौरे पर पहुंचे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जापान की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए तैयार हैं. पीयूष गोयल ने ये भी कहा कि टेक्नोलॉजी की कमी […]

UB India News27 अग॰