CJI ने बेरोजगार युवाओं को ‘कॉकरोच’ ही क्यों कहा………………..

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नकली लॉ डिग्रियों और कानूनी पेशे से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हुए कुछ तीखी टिप्पणी की. सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कथित तौर पर टिप्पणी की कि कुछ बेरोजगार युवा कॉकरोच की तरह होते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि जिन्हें ना तो कोई रोजगार […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शनिवार, 16 मई 2026, 07:39 AM 3 मिनट read
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CJI ने बेरोजगार युवाओं को ‘कॉकरोच’ ही क्यों कहा………………..
Photo: UB India News Archive

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नकली लॉ डिग्रियों और कानूनी पेशे से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हुए कुछ तीखी टिप्पणी की. सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कथित तौर पर टिप्पणी की कि कुछ बेरोजगार युवा कॉकरोच की तरह होते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि जिन्हें ना तो कोई रोजगार मिलता है और ना ही पेशे में कोई जगह है उनमें से कुछ इंटरनेट मीडिया में चले जाते हैं, कुछ आरटीआई कार्यकर्ता बन जाते हैं और फिर हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं. आइए जानते हैं कि आखिर सीजेआई ने बेरोजगार युवाओं को कॉकरोच ही क्यों बताया सांप-बिच्छू क्यों नहीं?

कॉकरोच शब्द का किया इस्तेमाल 

कॉकरोच शब्द को एक ऐसे रूपक के तौर पर समझा गया जिसका उद्देश्य एक खास तरह के आचरण या फिर व्यवहार के पैटर्न का बताना है. सांप या फिर बिच्छू जैसे जानवरों के उलट कॉकरोच को आमतौर पर छिपे हुए संक्रमण, चुपचाप फैलने और उपेक्षित जगहों पर जीवित रहने से जोड़ा जाता है. ऐसा लगता है कि यह तुलना उन लोगों से की जा रही है जो कथित तौर पर अंधेरे में रहकर काम करते हैं और संसाधन, व्यवस्था या फिर सार्वजनिक हस्तियों पर लगातार हमले करते रहते हैं.

कॉकरोच को छिपी हुई जगहों से जोड़ा जाता है 

कॉकरोच और सांप या फिर बिच्छू जैसे जीवों के बीच का अंतर उनके काम करने के तरीके में नजर आता है. सांप और बिच्छू को आमतौर पर ऐसे शिकारी के रूप में देखा जाता है जो खुले तौर पर हमला करते हैं या फिर अपने क्षेत्र की रक्षा करते हैं. वहीं कॉकरोच को नालियों, अंधेरे कोनों, छिपी हुई जगह और धीरे-धीरे फैलने वाले संक्रमण से जोड़ा जाता है.

सीजेआई की टिप्पणी के मुताबिक यह तुलना शायद उन लोगों को लक्षित करने के लिए की गई थी जो डिजिटल मंचों के पीछे से छिप कर सोशल मीडिया अभियान, गलत सूचना या फिर बार-बार किए जाने वाले ऑनलाइन हमले के जरिए से गुमनाम रूप से संस्थानों को निशाना बनाते हैं.

तेजी से फैलना

कॉकरोच अपनी इस खासियत के लिए जाने जाते हैं कि वे उपेक्षित या फिर गंदे वातावरण में काफी तेजी से अपनी संख्या को बढ़ाते हैं. सीजेआई के बयान में भी इसी बात का जिक्र था कि जो पेशेवर रूप से खुद को स्थापित करने में असफल रहते हैं वे बाद में विवाद, दुष्प्रचार, सनसनीखेज आरोप या फिर सोशल मीडिया आधारित एक्टिविज्म के जरिए से सुर्खियों में आने की कोशिश करते हैं और उनकी संख्या बढ़ती ही रहती है.

इसी के साथ सांप और बिच्छू को अक्सर खतरे, जहर और सीधे तौर पर मिलने वाली धमकी से जोड़ा जाता है. वहीं कॉकरोच को आमतौर पर ऐसे कीटों के रूप में देखा जाता है जो कोई रचनात्मक लाभ दिए बिना अपने आसपास के माहौल को दूषित करते हैं.

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