चिकन नेक कॉरिडोर पर बांग्लादेश के कट्टरपंथियों के मंसूबों की हवा निकालनी आसान होगी…………………….

पश्चिम बंगाल सरकार ने नेशनल हाइवे के सात हिस्सों को केंद्र सरकार के कंट्रोल में सौंपने का फैसला किया है। इससे नेशनल हाइवे अथॉरिटी (NHAI) और नेशनल हाइवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) के लिए बंगाल में महत्वपूर्ण रोड कॉरिडोर पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का रास्ता अब साफ हो गया है, जो लंबे वक्त […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 18 मई 2026, 06:06 AM 5 मिनट read
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चिकन नेक कॉरिडोर पर बांग्लादेश के कट्टरपंथियों के मंसूबों की हवा निकालनी आसान होगी…………………….
Photo: UB India News Archive

पश्चिम बंगाल सरकार ने नेशनल हाइवे के सात हिस्सों को केंद्र सरकार के कंट्रोल में सौंपने का फैसला किया है। इससे नेशनल हाइवे अथॉरिटी (NHAI) और नेशनल हाइवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) के लिए बंगाल में महत्वपूर्ण रोड कॉरिडोर पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का रास्ता अब साफ हो गया है, जो लंबे वक्त से राजनीतिक वजहों से अटका हुआ है।

इस संबंध में पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से जो आधिकारिक बयान जारी किया गया है, उसके अनुसार ये क्षेत्र स्टेट पीडब्ल्यूडी के नेशनल हाइवे विंग के अधीन हैं और केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से सौंपने की बार-बार की गुजारिश के बावजूद करीब एक साल से लंबित पड़े हुए थे।

चिकन नेक कॉरिडोर को लेकर मिलीं धमकियां
बंगाल की बीजेपी सरकार ने जिन सात एनएच कॉरिडोर को केंद्र सरकार को सौंपने का फैसला किया है, उनमें से पांच चिकन नेक कॉरिडोर या सिलीगुड़ी कॉरिडोर से होकर गुजरते हैं। केंद्र का तब से इसपर फोकस बढ़ गया था, जबसे बांग्लादेश में कट्टरपंथी इस्लामी ताकतों ने अराजक स्थिति में सत्ता परिवर्तन के बाद से इस कॉरिडोर को लेकर कुछ विवादास्पद बयान दिए थे।

सुरक्षित सिलीगुड़ी कॉरिडोर की जरूरत?
सुरक्षा जानकार लगातार सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सड़कों के चौड़ीकरण और उसे पूरी तरह से सुरक्षित किए जाने पर जोर देते रहे हैं।
बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतों का दबदबा बढ़ने के बाद यह भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बनकर खड़ी हुआ है।
भारत-भूटान और चीन के त्रिकोण पर जिस तरह से 2017 में डोकलाम में चीन के साथ संघर्ष झेलनी पड़ी थी, वह पहले से चिंता की वजह बनी रही है।
यही नहीं, सिक्किम में पहाड़ी सड़कों पर हर साल होने वाले भू-स्खलन ने भी इसकी आवश्यकता बढ़ा रखी है।

चिकन नेक कॉरिडोर क्या है
केंद्र को बंगाल सरकार की ओर से सौंपे जा रहे एनएच के सात में से पांच हिस्से सिलीगुड़ी कॉरिडोर या चिकन नेक कॉरिडोर से होकर गुजर रहे हैं।
यह कुल 60 किलोमीटर लंबा क्षेत्र, जो सबसे संकरे हिस्से पर मात्र 20-22 किलोमीटर ही चौड़ा है और यही चिकन नेक कॉरिडोर के नाम से कुख्यात है।
यह पूरा क्षेत्र भारत को नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से जोड़ता है और सिक्किम से ठीक आगे ही चीन (तिब्बत) भी पड़ता है।
कम चौड़ा वाले क्षेत्र (चिकन नेक कॉरिडोर) को राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर बहुत अहम हो चुका है और बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से भारत के दुश्मनों की इसी पर नजर अटकी हुई है।
मोहम्मद यूनुस की सरकार के दौरान इस क्षेत्र की सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण हो गई थी, क्योंकि उसने इसके सटे इलाके में चीनी गतिविधियों को बढ़ावा देने के संकेत देने शुरू कर दिए थे।

बंगाल में राजनीतिक नीतियों ने भी बढ़ाई दिक्कत
बीजेपी आरोप लगाती रही है कि पूर्ववर्ती टीएमसी सरकार की नीतियों की वजह से खासकर उत्तर बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में अवैध बांग्लादेशियों की घुसपैठ बढ़ गई थी, जिससे चिकन नेक कॉरिडोर की सुरक्षा और चिंताजनक होती जा रही थी।

चिकेन नेक कॉरिडोर पर सख्ती, बांग्लादेश का खेल खत्म!
बंगाल सरकार के ताजा फैसले के बारे में अधिकारियों का कहना है कि इससे हाइवे के विस्तार का कार्य जो लंबे समय से लंबित है, उसे तेजी से पूरी किया जाएगा।
इस इलाके में हाइवे की मरम्मत होने से और इसके विस्तार से डिफेंस लॉजिस्टिक में भी मजबूती आएगी।
साथ ही साथ व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और देश के पूर्वोत्तर राज्यों से कनेक्टिविटी भी ज्यादा आसान होगी।
पहले इस तरह की रिपोर्ट भी आ चुकी है कि भारत चिकन नेक कॉरिडोर को सामरिक तौर पर पूरी तरह से सुरक्षित करने के लिए सुरंगें बनाने की योजना भी काम कर रहा है।
औपचारिक हैंडओवर नहीं होने की वजह से इन हिस्सों में विकास के कार्य रुके हुए थे। आज की मंजूरी के बाद केंद्रीय एजेंसियां बिना किसी देरी के काम शुरू कर सकती हैं।

पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव के ऑफिस से प्रेस नोट (16 मई, 2026)

केंद्र सरकार का किन क्षेत्र में बढ़ेगा दखल
बंगाल सरकार के फैसले से जिन इलाकों में एनएचएआई और एनएचआईडीसीएल को विकास का काम शुरू करने की जिम्मेदारी मिली है, वे हैं-
एनएच- 312 का 329.6 किलोमीटर हिस्सा (जंगीपुर, उमरपुर, कृष्णानगर, बनगांव और बशीरहाट और भारत-बांग्लादेश सीमा पर घोजाडांगा तक)
एनएच-31 में बिहार-पश्चिम बंगाल सीमा से गाजोल तक।
एनएच-33 में फरक्का तक।
एनएच-10 में पश्चिम बंगाल-सिक्किम बॉर्डर रूट- सेवोक आर्मी कैंटोनमेंट, कोरोनेशन ब्रिज,कलिम्पोंग।
भारत-भूटान बॉर्डर तक हासिमारा-जयगांव खंड।
बांग्लादेश बॉर्डर तक बारादिघी-मैनागुड़ी-चांगराबांधा रूट।
सिलीगुड़ी-कर्सियांग-दार्जिलिंग हिल रोड।
इस प्रोजेक्ट से मालदा और मुर्शिदाबाद के रास्ते बिहार-पश्चिम बंगाल की कनेक्टिविटी भी बढ़ेगी।
वहीं नदिया और उत्तर 24 परगना जिलों के रास्ते भी बांग्लादेश सीमा तक आवाजाही आसान होगी।

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