ओमान 15वां देश जिसपर ट्रम्प ने दी हमले की धमकी ……….

ट्रम्प ने बुधवार को ओमान पर हमला करने की धमकी दी। उन्होंने कहा कि अगर वह ईरान के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट को कंट्रोल करने की कोशिश करता है तो अमेरिका उसे उड़ा देगा। ओमान 15वां ऐसा देश है जिस पर ट्रम्प ने हमले की धमकी दी है। इतना ही नहीं, ट्रम्प के कार्यकाल में […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 29 मई 2026, 06:55 AM 5 मिनट read
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ओमान 15वां देश जिसपर ट्रम्प ने दी हमले की धमकी ……….
Photo: UB India News Archive

ट्रम्प ने बुधवार को ओमान पर हमला करने की धमकी दी। उन्होंने कहा कि अगर वह ईरान के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट को कंट्रोल करने की कोशिश करता है तो अमेरिका उसे उड़ा देगा।

ओमान 15वां ऐसा देश है जिस पर ट्रम्प ने हमले की धमकी दी है। इतना ही नहीं, ट्रम्प के कार्यकाल में अमेरिका ने 7 देशों पर हमले भी किए हैं। इसमें वेनेजुएला भी शामिल है जहां घुसकर अमेरिका ने राष्ट्रपति का किडनैप कर लिया था।

इसके अलावा ट्रम्प 4 देशों पर कब्जा करने की चेतावनी भी दे चुके हैं। इसमें कनाडा, ग्रीनलैंड, वेनेजुएला और क्यूबा शामिल हैं। इसके अलावा ट्रम्प पनामा नहर पर भी कब्जा करने की धमकी दे चुके हैं।

राष्ट्रपति बनने से पहले शांति की बात करते थे ट्रम्प

साल 2024 में जब ट्रम्प राष्ट्रपति चुनाव लड़ रहे थे। तब वे खुद को अमन पसंद नेता के तौर पर पेश कर रहे थे। चुनावी रैलियों में वे अपने विरोधियों को युद्ध भड़काने वाला नेता कहते थे। उनका कहना था कि उनके राष्ट्रपति बनने के बाद दुनिया में शांति आ जाएगी।

उन्होंने कई बार कहा कि अगर वह राष्ट्रपति होते तो रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू ही नहीं होता। ट्रम्प खुद को ऐसा नेता बताते थे जो दुश्मन देशों से बातचीत कर सकता है और बिना बड़े युद्ध के समझौते करा सकता है।

ट्रम्प कहते थे कि अगर उनके विरोधी सत्ता में आए तो अमेरिका फिर से इराक और अफगानिस्तान जैसे लंबे युद्धों में फंस जाएगा। लेकिन राष्ट्रपति बनने के बाद स्थिति बदल गई।

7 देश जिन पर अमेरिका ने हमला किया

  1. ईरान: अमेरिका ने 1 साल में दो बार ईरान पर हमला किया। पिछले साल 24 जून को न्यूक्लियर प्रोग्राम से जुड़े 3 ठिकानों पर हमला किया। इस साल 28 फरवरी को इजराइल के साथ मिलकर हमला किया। इसमें खामेनेई समेत कई बड़े अधिकारी मारे गए।
  2. इराक: ईरान समर्थित मिलिशिया और आतंकी समूहों पर हमले किए। ये हमले सीरिया और इराक में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमलों के जवाब में किए गए।
  3. नाइजीरिया: आतंकवाद विरोधी अभियान के तहत कार्रवाई की। अमेरिका बोको हराम और ISIS जैसे आतंकी संगठनों को निशाना बना रहा था।
  4. सोमालिया: अल कायदा से जुड़े अल-शबाब नाम के आतंकी संगठन के खिलाफ हमले किए। ड्रोन और हवाई हमलों के जरिए लड़ाकों, हथियार ठिकानों और ट्रेनिंग कैंपों को निशाना बनाया।
  5. सीरिया: ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों और आतंकी संगठनों के खिलाफ हवाई हमले किए। ये इलाके में मौजूद अमेरिकी सैनिकों और ठिकानों पर ड्रोन और रॉकेट हमले कर रहे थे।
  6. वेनेजुएला: वेनेजुएला में घुसकर राष्ट्रपति को पकड़ा। इसके अलावा कैरेबियन सी में वेनेजुएला के करीब 60 जहाजों पर हमले किए जिसमें करीब 190 नाविकों की जान गई।
  7. यमन: हूती ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई और मिसाइल हमले किए, खासकर रेड सी में जहाजों पर हमलों के बाद।

ट्रम्प, निक्सन की मैडमैन थ्योरी के फॉलोअर

ट्रम्प कई बार ऐसे बयान देते हैं जिनसे दोस्त और दुश्मन दोनों असमंजस में रहते हैं कि अमेरिका अगला कदम क्या उठाएगा। विश्लेषकों का कहना है कि अपने विरोधियों के अलावा सहयोगी देशों को धमकाना अब ट्रम्प की शैली का हिस्सा बन चुका है।

राजनीतिक विज्ञान में इसे मैडमैन थ्योरी कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि कोई नेता अपने विरोधियों को यह महसूस कराता है कि वह कुछ भी कर सकता है, ताकि सामने वाला डरकर समझौता कर ले।

इस थ्योरी को सबसे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने 1960 और 1970 के दशक में वियतनाम युद्ध के दौरान अपनाया था। निक्सन चाहते थे कि सोवियत संघ और उत्तरी वियतनाम को लगे कि वह इतने पागल हैं कि परमाणु हमला तक कर सकते हैं। उनका मानना था कि डर पैदा करके दुश्मन को बातचीत की मेज पर लाया जा सकता है।

रिचर्ड निक्सन 1969 से 1974 तक अमेरिका के राष्ट्रपति रहे। ट्रम्प ने कभी नहीं छिपाया कि वह रिचर्ड निक्सन को पसंद करते हैं।

विरोधियों पर बेअसर रही ट्रम्प की मैडमैन थ्योरी

बीबीसी के मुताबिक ट्रम्प की यह रणनीति सहयोगी देशों पर तो असर डालती दिख रही है लेकिन विरोधियों पर यह बेअसर है। ट्रम्प की धमकी के बाद नाटो देश अपना रक्षा बजट बढ़ा रहे हैं। यूक्रेन, अमेरिका को अपने खनिज संसाधन देने को तैयार हो गया।

लेकिन रूस के राष्ट्रपति पुतिन पर इसका ज्यादा असर नहीं दिखा। ईरान का मामला और भी मुश्किल है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि इसका उल्टा असर हो सकता है। पूर्व ब्रिटिश विदेश मंत्री विलियम हेग का कहना है कि इससे ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश और तेज कर सकता है।

विशेषज्ञ माइकल डेश भी मानते हैं कि अब ईरान शायद चुपचाप परमाणु कार्यक्रम आगे बढ़ाएगा और अंत में परमाणु परीक्षण भी कर सकता है।

ईरान यह देख रहा है कि जिन नेताओं के पास परमाणु हथियार नहीं थे, जैसे सद्दाम हुसैन और मुअम्मर गद्दाफी, उनकी सत्ता खत्म हो गई। जबकि उत्तर कोरिया के किम जोंग उन जैसे नेता परमाणु हथियार होने की वजह से सुरक्षित बने हुए हैं। इसलिए ईरान परमाणु हथियार को अपनी अंतिम सुरक्षा के रूप में देख सकता है।

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और इजराइल सोच रहे थे कि अगर ईरान के शीर्ष नेताओं पर दबाव बनाया जाए तो वहां की व्यवस्था कमजोर हो जाएगी। लेकिन इतिहास इससे उल्टा संकेत देता है।

1980 में जब सद्दाम हुसैन ने ईरान पर हमला किया था, तब भी मकसद इस्लामिक गणराज्य को कमजोर करना था। लेकिन हुआ उल्टा। ईरानी व्यवस्था और मजबूत हो गई।

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