बालेंद्र की भारतीय भूमि पर कब्जे वाले बयान पर विवाद………

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के संसद में रविवार को दिए गए बयान पर विवाद खड़ा हो गया। उन्होंने संसद में कहा कि भारत ने ही नहीं, बल्कि नेपाल ने भी कुछ भारतीय इलाकों पर कब्जा किया है। उनके इस बयान की नेपाल में विशेषज्ञों, पूर्व राजनयिकों और सोशल मीडिया यूजर्स ने आलोचना की है। […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 1 जून 2026, 06:47 AM 5 मिनट read
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बालेंद्र की भारतीय भूमि पर कब्जे वाले बयान पर विवाद………
Photo: UB India News Archive

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के संसद में रविवार को दिए गए बयान पर विवाद खड़ा हो गया। उन्होंने संसद में कहा कि भारत ने ही नहीं, बल्कि नेपाल ने भी कुछ भारतीय इलाकों पर कब्जा किया है। उनके इस बयान की नेपाल में विशेषज्ञों, पूर्व राजनयिकों और सोशल मीडिया यूजर्स ने आलोचना की है। संसद में भारत-नेपाल सीमा विवाद से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए बालेन्द्र शाह ने कहा कि नेपाल सरकार ने लिपुलेख समेत सीमा विवाद के मुद्दे पर भारत को आधिकारिक कूटनीतिक नोट भेजा था, जिसका जवाब भी मिल चुका है। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल ने इतिहासकारों, सर्वेक्षकों तथा अन्य विशेषज्ञों की मदद से कूटनीतिक माध्यमों के जरिये विवाद का समाधान खोजने पर सहमति जताई है। उन्होंने संसद में कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद मुझे हाल में एक तथ्य का पता चला। वह यह कि भारत ने ही नहीं, बल्कि नेपाल ने भी कुछ भारतीय इलाकों कब्जा किया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को तथ्यों का अध्ययन कर मित्रवत तरीके से बैठकर इस मुद्दे का समाधान करना चाहिए। नेपाल और भारत के बीच कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा को लेकर लंबे समय से सीमा विवाद है। भारत का कहना है कि ये क्षेत्र उत्तराखंड का हिस्सा हैं और विवाद का समाधान द्विपक्षीय वार्ता के जरिये होना चाहिए।

चीन, ब्रिटेन के साथ भी चर्चा की : 

बालेन्द्र शाह ने यह भी बताया कि नेपाल ने इस मुद्दे पर चीन और ब्रिटेन के साथ भी कूटनीतिक चर्चा की है। उनके अनुसार ब्रिटेन को इसलिए शामिल किया गया, क्योंकि यह विवाद उस दौर से जुड़ा है जब ब्रिटिश शासन इस क्षेत्र में मौजूद था।

97% सीमा विवाद पहले ही सुलझाए जा चुके हैं : 

प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत में नेपाल के पूर्व राजदूत नीलाम्बर आचार्य ने कहा कि नेपाल द्वारा भारतीय क्षेत्र पर अतिक्रमण किए जाने की कोई जानकारी उनके पास नहीं है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच लगभग 97 प्रतिशत सीमा विवाद पहले ही सुलझाए जा चुके हैं। केवल कुछ मुद्दे शेष हैं। एक अन्य पूर्व राजदूत दीप कुमार उपाध्याय ने भी कहा कि नेपाल द्वारा भारत की भूमि पर अतिक्रमण का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। भारत ने भी कभी ऐसा मुद्दा औपचारिक रूप से नहीं उठाया है। नेपाल-भारत सीमा मामलों के विशेषज्ञ और भूगोलवेत्ता बुद्धि नारायण श्रेष्ठ ने भी प्रधानमंत्री के दावे को खारिज करते हुए कहा कि नेपाल ने कभी भारतीय क्षेत्र पर कब्जा नहीं किया।

नेपाली प्रधानमंत्री की संसद में पहली मौजूदगी : 

बालेन्द्र शाह ने संसद सत्र शुरू होने के लगभग तीन सप्ताह बाद रविवार को पहली बार प्रतिनिधि सभा में उपस्थिति दर्ज कराई। मार्च में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले शाह संसद की कार्यवाही शुरू होने के बाद पहली बार सदन में पहुंचे और सांसदों द्वारा उठाए गए विभिन्न मुद्दों पर जवाब दिया। संसद का सत्र 11 मई से शुरू हुआ था, लेकिन प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति को लेकर विपक्षी दलों ने कई बार सदन की कार्यवाही बाधित की। विपक्षी सांसदों ने कम से कम चार बार कार्यवाही में व्यवधान डाला और एक बार बहिष्कार भी किया था।

नेपाल-भारत के रिश्ते

बालेन शाह ने कहा कि भारत-नेपाल की सरकारें इतिहासकारों, सर्वेक्षकों औ इलाके से परिचित विशेषज्ञों की टीमें बनाएंगी और बातचीत के जरिए हल निकालने की कोशिश करेंगी। नेपाल ने सीमा विवाद को लेकर ना सिर्फ भारत और चीन से बात की है बल्कि यूके की सरकार से भी बातचीत की है।’

शाह ने आगे कहा कि हमारा मानना है कि यूके को इसमें दिलचस्पी लेनी चाहिए क्योंकि यह मुद्दा उस समय का है, जब ब्रिटिश भारत ने इस इलाके को छोड़ा था। उन्होंने कहा कि हम पड़ोसी देश भारत के साथ सीमा विवाद को बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से सुलझाने के पक्ष में हैं।

भारत-नेपाल में सीमा विवाद

नेपाल और भारत के बीच बीचे कुछ समय में लिपुलेख और दूसरे इलाकों को लेकर तनाव देखा गया है। नेपाल के भारतीय इलाकों पर हक जताने के चलते दोनों देशों के बीच यह तनाव आया है। लिपुलेख पर नेपाल ने दावा ठोककर भारत को नाराज किया है क्योंकि यह दशकों से भारतीय इलाका है। बॉर्डर के अलावा व्यापार के मुद्दे के भी दोनों पड़ोसी देशों में तनातनी की स्थिति देखी गई है।

बालेन शाह ने आम चुनाव में बड़ी जीत दर्ज करने के बाद इस साल 27 मार्च नेपाल के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। पीएम बनने के बाद से वह ना तो किसी विदेश यात्रा पर गए हैं और ना ही ज्यादा विदेशी मेहमानों से मिले हैं। उन्होंने अपने देश में प्रेस से बहुत ज्यादा संपर्क नहीं रखा है। ऐसे में उनके संसद के पहले संबोधन से उनकी सरकार की घरेलू और विदेश नीति (भारत को लेकर) साफ होने की उम्मीद है।

Nepal india

भारत आ रहे RSP अध्यक्ष लामिछाने

बालेन शाह के भाषण में भारत से बातचीत पर जोर दिया गया है तो वहीं नेपाल की सत्ताधारी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के अध्यक्ष रबि लामिछाने भी 5 दिनों (1-5 जून) के दौरे पर दिल्ली आ रहे हैं। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दूसरे शीर्ष मंत्रियों और अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। लामिछाने की पार्टी की जीत के बाद बालेन शाह पीएम बने हैं।

लामिछाने नेपाल के होम मिनिस्टर रहे हैं और फिलहाल हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के सदस्य हैं। इस समय वह नेपाली सत्ता के सबसे ताकतवर लोगों में से एक हैं। बालेन शाह के भारत आने की योजना के ठंडे बस्ते में जाने के बाद लामिछाने के दिल्ली आना भारत-नेपाल के राजनयिक संबंधों के लिहाज से खास माना जा रहा है।

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