ममता की पार्टी में क्‍यों मची भगदड़?

पश्चिम बंगाल में हालिया चुनावी हार के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष और उथल-पुथल के संकेत दिखाई देने लगे हैं. पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की अध्यक्षता में रविवार को होने वाली नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक भी रद्द करनी पड़ी, क्योंकि 80 विधायकों में से करीब तीन-चौथाई विधायक बैठक में नहीं […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 1 जून 2026, 06:50 AM 6 मिनट read
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ममता की पार्टी में क्‍यों मची भगदड़?
Photo: UB India News Archive

पश्चिम बंगाल में हालिया चुनावी हार के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष और उथल-पुथल के संकेत दिखाई देने लगे हैं. पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की अध्यक्षता में रविवार को होने वाली नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक भी रद्द करनी पड़ी, क्योंकि 80 विधायकों में से करीब तीन-चौथाई विधायक बैठक में नहीं पहुंचे. उधर, कई नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस से किनारा कर लिया है. 100 से ज्‍यादा टीएमसी पार्षदों ने इस्‍तीफा दे दिया है. इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान और असंतोष की अटकलों को और तेज कर दिया है.

अभिषेक बनर्जी-कल्‍याण बनर्जी पर हुए हमले का डर! 

तृणमूल कांग्रेस की रविवार को रद्द हुई बैठक का उद्देश्य चुनावी नतीजों की समीक्षा और आगे की रणनीति तय करना था. ममता बनर्जी ने ये बैठक बुलाई थी, ताकि आगे की रणनीति तय की जा सके. हालांकि, बड़ी संख्या में विधायकों की अनुपस्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने विधायकों की गैरमौजूदगी को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) पर हुए कथित हमले और उसके बाद सांसद कल्‍याण बनर्जी (Kalyan Banerjee) पर हुए हमले से पैदा हुई ‘आपात स्थिति’ का परिणाम बताया जा रहा है. हालांकि, बंगाल की राजनीति पर नजर रखने वाले लोग इसे चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर बढ़ती बेचैनी से भी जोड़कर देख रहे हैं.

बैठक पहले से निर्धारित थी. हालांकि, हमारे नेताओं पर हुए हमलों के बाद, हमारे विधायक जमीनी स्तर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसके चलते हमारे कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की है. गैर-मौजूद विधायकों, जो जमीनी स्थिति संभालने और गिरफ्तार किए गए हमारे कार्यकर्ताओं की सहायता करने में व्यस्त हैं.

कुणाल घोष

तृणमूल कांग्रेस प्रवक्ता

तृणमूल कांग्रेस प्रवक्ता कुणाल घोष ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट आवास, जहां बैठक होनी थी, वहां पत्रकारों से कहा, “बैठक पहले से निर्धारित थी. हालांकि, हमारे नेताओं पर हुए हमलों के बाद, हमारे विधायक जमीनी स्तर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसके चलते हमारे कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की है. गैर-मौजूद विधायकों, जो जमीनी स्थिति संभालने और गिरफ्तार किए गए हमारे कार्यकर्ताओं की सहायता करने में व्यस्त हैं.”

हार का असर, TMC में भगदड़ 

  • TMC प्रवक्ता बिस्वजीत देब का पद से इस्तीफा
  • शांतनु सेन का TMC प्रवक्ता पद से इस्तीफा
  • अभिजीत मजूमदार का असम टीएमसी प्रमुख पद से इस्तीफा
  • काकोली घोष ने TMC में सभी संगठन पद से इस्तीफा दिया
  • अरुप चक्रवर्ती ने TMC प्रवक्ता पद से इस्तीफा दिया
  • डायमंड हार्बर में TMC के 8 पार्षदों का इस्तीफा
  • चंदननगर के मेयर राम चक्रवर्ती का इस्तीफा
  • चंदननगर में 30 TMC पार्षदों का इस्तीफा
  • भाटपाड़ा में 30 TMC पार्षदों का इस्तीफा
  • गारुलिया में 18 TMC पार्षदों का इस्तीफा
  • हलिशहर में 16 TMC पार्षदों का इस्तीफा
  • उत्तर बैरकपुर चेयरमैन मलय घोष का इस्तीफा
  • उत्तर बैरकपुर में 15 पार्षदों का इस्तीफा
  • कांचरापाड़ा में 14 TMC पार्षदों का इस्तीफा
TMC के विधायकों के बैठक में नहीं पहुँचने पर टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि विधायकों को घेर कर रखा गया और डराया गया इसलिए वहां घर से नहीं निकल पाये इसलिए वह बैठक में नहीं पहुंचे.

हार के बाद इस्‍तीफों का सिलसिला 

बंगाल के चुनावी परिणाम आने के बाद हालात बिल्‍कुल बदल गए हैं, जो सत्‍ता के गलियारों से लेकर सड़कों तक नजर आ रहे हैं. चुनाव परिणाम आने के बाद से तृणमूल कांग्रेस में इस्तीफों का सिलसिला लगातार जारी है. टीएमसी के प्रवक्ता बिस्वजीत देब ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इसके अलावा शांतनु सेन और अरुप चक्रवर्ती ने भी पार्टी प्रवक्ता के पद से त्यागपत्र दे दिया. वहीं, अभिजीत मजूमदार ने असम टीएमसी प्रमुख के पद से इस्तीफा देकर संगठन को एक और झटका दिया है. काकोली घोष ने भी पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से खुद को अलग कर लिया है. क्‍या ये अभिषेक बनर्जी और कल्‍याण बनर्जी पर हुए हमलों का डर है या फिर कुछ और?

खिसक रही TMC की जमीनी

ममता बनर्जी की हार से सिर्फ शीर्ष नेतृत्व ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी पार्टी को नुकसान झेलना पड़ रहा है. डायमंड हार्बर में टीएमसी के आठ पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है. चंदननगर के मेयर राम चक्रवर्ती ने भी अपना पद छोड़ दिया है. चंदननगर में 30 पार्षदों, भाटपाड़ा में 30 पार्षदों, गारुलिया में 18 पार्षदों और हलिशहर में 16 पार्षदों के इस्तीफे ने स्थानीय निकायों में पार्टी की स्थिति को कमजोर कर दिया है. उत्तर बैरकपुर के चेयरमैन मलय घोष ने भी इस्तीफा दे दिया है. उनके साथ वहां के 15 पार्षदों ने भी पार्टी से दूरी बना ली है. वहीं कांचरापाड़ा में 14 TMC पार्षदों के इस्तीफे की खबर ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है.

कपिल सिब्बल के बयान पर कीर्ति आजाद ने कहा कि इसमें नया क्या है? बीजेपी सभी को बर्बाद कर रही है. ये जिनके साथ गए उन्हें ख़त्म कर दिया.

विपक्ष हमलावर, डैमेज कंट्रोल में जुटी ममता बनर्जी 

ऐसे में विपक्ष को टीएमसी पर हमला करने का मौका दे दिया है. विपक्षी दलों का दावा है कि चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असंतोष बढ़ रहा है और कई नेता भविष्य की राजनीति को देखते हुए नए विकल्प तलाश रहे हैं. दूसरी ओर टीएमसी नेतृत्व इन इस्तीफों को सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया बताकर नुकसान को कम करके दिखाने की कोशिश कर रहा है. हालांकि, ऐसा लगता नहीं है, क्‍योंकि इतनी बड़ी संख्‍या में एक साथ शायद ही किसी पार्टी में इस्‍तीफे हुए होंगे. ममता बनर्जी और उनके विश्‍वासपात्र पार्टी को हो रहे इस नुकसान को कमतर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन डैमेज कंट्रोल होता नजर नहीं आ रहा है.

तृणमूल कांग्रेस के एक नेता ने तो यहां तक कह दिया है कि पार्टी अब खत्‍म होने जा रही है, क्‍या वाकई ऐसा है? सवाल यही है कि क्या ये सिर्फ चुनावी हार के बाद की अस्थायी नाराजगी है या फिर टीएमसी के भीतर किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की शुरुआत? ममता बनर्जी और उनकी पार्टी इस समय बेहद मुश्किल दौर से गुजर रही है. ऐसे में पार्टी नेतृत्व किस तरह असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं को साधता है, इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी. हालांकि, इसमें कोई दो राय नहीं कि जैसे हालात हैं, उससे निपटना टीएमसी के लिए बड़ी चुनौती है.

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