मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनावी मुकाबला रोचक हो गया है। विधानसभा में विधायकों की संख्या के आधार पर भाजपा की दो सीटों पर जीत तय थी, जबकि एक सीट कांग्रेस के खाते में जाती दिख रही थी। हालांकि भाजपा ने तीसरा उम्मीदवार उतारकर चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। तीसरी सीट किसे मिलेगी, मीनाक्षी नटराजन या महेश केवट? इस पर सियासी गलियारो में चर्चा शुरू हो गई है। इसे लेकर आंकड़े क्या कहते हैं, वो हम आपको बताते हैं।
राज्यसभा के चुनाव कब होने हैं?
बीती 22 मई को चुनाव आयोग ने 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव तारीखों का एलान किया। आयोग के एलान के बाद चुनाव की प्रक्रिया एक जून से शुरू हुई। आठ जून तक नामांकन किए जा सकते हैं। 10 जून को नामांकन पत्रों की जांच होगी। वहीं, नाम वापसी 11 जून तक हो सकती है। अगर जरूरत पड़ी तो 18 जून को मतदान होगा। इसी दिन देर शाम तक नतीजे आ सकते हैं।
मध्य प्रदेश के अलावा और कहां मतदान होना है?
किन बड़े चेहरों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है?
राज्यसभा से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, दिग्विजय सिंह और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवोगौड़ा जैसे प्रमुख नेता सेवानिवृत्त होने वाले हैं। मध्य प्रदेश से जिन सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है उनमें कांग्रेस के दिग्विजय सिंह, भाजपा के जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह सोलंकी शामिल हैं। इसी तरह राजस्थान से राजेंद्र गहलोत, नीरज डांगी और रवनीत सिंह की सीटें खाली होने जा रही हैं।
मध्य प्रदेश में किस पार्टी ने किसे बनाया उम्मीदवार?
मध्य प्रदेश का संख्या बल क्या कहता है?
कैसे फंसेगा पेंच?
- भाजपा
- कांग्रेस
विधायक को क्यों बताना होगा- किसे दिया वोट
राज्यसभा चुनाव आम चुनावों की तरह नहीं होते। इसमें जनता सीधे मतदान नहीं करती, बल्कि राज्य विधानसभा के निर्वाचित विधायक वोट डालते हैं। राज्यसभा चुनाव में गुप्त मतदान की व्यवस्था नहीं होती। इसके लिए ओपन बैलेट सिस्टम लागू होता है। मध्य प्रदेश विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव एपी सिंह ने बताया कि इस प्रणाली के तहत मतदान करने वाले विधायक को मतपत्र पर अपनी पसंद के उम्मीदवार के सामने वरीयता अंकित करने के बाद अपना मतपत्र अपनी पार्टी के अधिकृत एजेंट को दिखाना अनिवार्य होता है। इसके बाद ही वह मतपेटी में मतपत्र डाल सकता है। यदि कोई विधायक अपने दल के अधिकृत एजेंट को वोट नहीं दिखाता है या किसी अन्य दल के एजेंट को दिखाता है, तो उसका वोट अमान्य घोषित किया जा सकता है। यही वजह है कि राज्यसभा चुनाव में यह स्पष्ट हो जाता है कि विधायक ने किस उम्मीदवार को प्राथमिकता दी है।
6 साल का होता है राज्यसभा का कार्यकाल
राज्यसभा संसद का उच्च सदन है और यह एक स्थायी सदन माना जाता है, जिसे भंग नहीं किया जा सकता। इसके सदस्यों का कार्यकाल छह वर्ष का होता है तथा हर दो वर्ष में एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं। राज्यसभा सदस्य होने के लिए उम्मीदवार को योग्यता के लिए भारत का नागरिक होना चाहिए। 30 साल की उम्र पूरी कर चुका हो। किसी लाभ के पद पर न हो। पागल या दिवालिया न हो और संसद विधि द्वारा निर्धारित अर्हताएं धारण करे।








