पाकिस्तान की सेना ने कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में दहशत फैला दी है, अपने हक की आवाज उठाने वाले प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलियां चलाई हैं जिससे 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. अब वहां के स्थानीय प्रशासन ने इस प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के चार नेताओं के सिर पर ईनाम भी रख दिया है. जो भी इन्हें पकड़वाने के लिए जानकारी देगा, उन्हें 1 करोड़ पाकिस्तानी रुपये का इनाम दिया जाएगा. यह वही संगठन है जिसे पिछले हफ्ते पाकिस्तान सरकार ने बैन कर दिया था और अब यह संगठन इस क्षेत्र में विरोध प्रदर्शनों के केंद्र में है. एक नोटिफिकेशन में कहा गया, “आजाद जम्मू और कश्मीर के राष्ट्रपति को यह खुशी हुई है कि प्रतिबंधित संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के इन अपराधियों की गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी देने वाले व्यक्ति को 10 मिलियन रुपये का इनाम दिया जाएगा.” इसमें यह भी कहा गया कि सूचना देने वालों की पहचान गुप्त रखी जाएगी.
तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के एयरस्पेस का उल्लंघन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी बलों ने कुनार, खोस्त और पक्तिका प्रांतों में नागरिक घरों को निशाना बनाकर बमबारी की।
मुजाहिद के मुताबिक, हमले में घायल हुई 14 महिलाओं का इलाज चल रहा है। उन्होंने हमले के बाद घायल हुए लोगों की की तस्वीरें भी शेयर कीं। तालिबान सरकार के अनुसार पिछले एक साल में पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाइयों में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है।
पाकिस्तान के हमले से मार्च में 400 लोगों की जान गई थी
पाकिस्तान ने मार्च 2026 में अफगानिस्तान पर एक बड़ा हवाई हमला किया था। अफगान अधिकारियों के मुताबिक, काबुल में एक नशा मुक्ति केंद्र पर हुई बमबारी में 400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। तालिबान ने इसे मानवता के खिलाफ अपराध बताया था।
अफगानिस्तान का दावा था कि पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने राजधानी काबुल के कई इलाकों को निशाना बनाया था। हालांकि पाकिस्तान ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था। पाकिस्तान का दावा था कि कार्रवाई में एक गोला-बारूद डिपो को टारगेट किया गया था।
मार्च की उस घटना के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया। सीमा पार हमलों, एयरस्ट्राइक और सैन्य झड़पों को लेकर दोनों देश लगातार एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे हैं।
जल रहा है PoK
JAAC यहां एक प्रमुख नागरिक समाज संगठन है, जिसने 27 जुलाई को होने जा रहे चुनावों से पहले 45 में से 12 विधानसभा सीटें शरणार्थियों के लिए आरक्षित करने के खिलाफ प्रदर्शन बुलाए थे. टकराव एक दिन पहले शुरू हुआ था जब बड़ा विरोध प्रदर्शन होना था. सीट आरक्षण के मुद्दे के अलावा, प्रदर्शनकारियों ने पहले हुई हिंसा, इंटरनेट बंदी, बिजली की कमी, महंगाई, बेरोजगारी, संसाधनों के कथित शोषण और राजनीतिक हाशिए पर धकेले जाने जैसी समस्याओं को भी उठाया था.
पिछले हफ्ते अधिकारियों ने सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के आधार पर JAAC पर आधिकारिक रूप से प्रतिबंध (बैन) लगा दिया था. समूह के सदस्यों ने अपने संगठन को “आतंकवादी” बताने को दमनकारी कार्रवाई कहा है.
भारत ने निंदा की
भारत ने मंगलवार को PoK में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तान की कार्रवाई की कड़ी निंदा की. नई दिल्ली ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराने की भी अपील की. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके गलत कार्यों और दुरुपयोग के लिए जवाबदेह ठहराएगा.”
वहीं पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRPC) ने भी तथाकथित क्षेत्रीय सरकार द्वारा JAAC को आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंधित करने पर गंभीर चिंता जताई है. सोमवार को दिए गए बयान में HRPC ने नागरिकों और पुलिसकर्मी, दोनों की मौतों और अत्यधिक बल प्रयोग तथा नेटबंदी की कड़ी निंदा की. उसने कहा, “जब तक इस क्षेत्र के लोगों को राजनीतिक रूप से अधिकारहीन रखा जाएगा, तब तक बातचीत सार्थक नहीं हो सकती. शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार बनाए रखा जाना चाहिए और शिकायतों का पारदर्शी तरीके से समाधान होना चाहिए.”
पाकिस्तान-अफगानिस्तान में 4 महीने से संघर्ष जारी
पाकिस्तान और अफगानिस्तान में संघर्ष की शुरुआत 22 फरवरी को हुई थी। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक की थी। पाकिस्तान के उप गृह मंत्री तलाल चौधरी ने दावा किया था कि सीमावर्ती इलाकों में TTP के ठिकानों पर कार्रवाई में कम से कम 70 लड़ाके मारे गए। बाद में पाकिस्तानी अखबार डॉन ने यह संख्या 80 तक पहुंचने का दावा किया था। इसके जवाब में अफगानिस्तान ने 27 फरवरी को पाकिस्तान पर हमला किया। पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर दबाव बनाता रहा है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकी संगठन को न करने दे। इस्लामाबाद का आरोप है कि TTP अफगानिस्तान से ऑपरेट हो रहा है, जबकि तालिबान सरकार इन आरोपों से लगातार इनकार करती रही है।
पाकिस्तान और TTP में लड़ाई क्यों?
2001 में अमेरिका के अफगानिस्तान पर हमले के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ दिया। इससे TTP नाराज हो गया, वह इसे इस्लाम के खिलाफ मानता था। TTP का मानना है कि पाकिस्तान सरकार सच्चा इस्लाम नहीं मानती है, इसलिए वो उसके खिलाफ हमला करता है। TTP का अफगान तालिबान के साथ गहरा जुड़ाव है। दोनों समूह एक-दूसरे को समर्थन देते हैं। 2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान ने TTP को निशाना बनाकर अफगानिस्तान में हमले किए।








