UN सुरक्षा परिषद में अपने हक के लिए दहाड़ा भारत………….

भारत ने चेतावनी दी कि अगर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार केवल अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने तक ही सीमित रहा, तो यह अपने उद्देश्य में लगभग विफल माना जाएगा. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने सोमवार को सुरक्षा परिषद सुधारों पर आयोजित अंतर-सरकारी वार्ता की बैठक को संबोधित […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
मंगलवार, 16 जून 2026, 11:07 AM 4 मिनट read
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UN सुरक्षा परिषद में अपने हक के लिए दहाड़ा भारत………….
Photo: UB India News Archive

भारत ने चेतावनी दी कि अगर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार केवल अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने तक ही सीमित रहा, तो यह अपने उद्देश्य में लगभग विफल माना जाएगा. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने सोमवार को सुरक्षा परिषद सुधारों पर आयोजित अंतर-सरकारी वार्ता की बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही.

उन्होंने कहा, “अगर सुरक्षा परिषद का विस्तार केवल अस्थायी सदस्यता श्रेणी तक सीमित रहा तो यह सुधार न केवल अपर्याप्त होगा, बल्कि एक तरीके से विफल माना जाएगा. ऐसा इसलिए क्योंकि इससे पांच स्थायी सदस्यों के हाथों में केंद्रित निर्णय लेने की मौजूदा शक्ति-संरचना में कोई बुनियादी बदलाव नहीं आएगा.”

हरीश ने कहा, “समूहों व सदस्य देशों ने वास्तविक और सार्थक सुधारों के लिए इतना लंबा इंतजार किया है.” वह बैठक को संबोधित कर रहे थे और उनका मुख्य विषय ‘एलिमेंट्स पेपर’ था. यह एक ऐसा डॉक्यूमेंट है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के शक्तिशाली निकाय में सुधार को लेकर सदस्य देशों की सहमति और असहमति वाले बिंदु शामिल हैं.

UNSC में सुधार की वकालत कर रहा भारत

पीटीआई भाषा की रिपोर्ट के अनुसार हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि भारत स्थायी मेंबर के विस्तार की वकालत कर रहा है. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की कोशिश सुरक्षा परिषद में ‘बेहतर संतुलन और समानता’ लाने के साथ-साथ वीटो का अधिकार रखने वाले पांच स्थायी मेंबर्स- चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका के निर्णय लेने के तौर-तरीकों में बदलाव लाने की भी रही है.

बता दें कि UNSC में सुधार की सालों पुरानी मुहिम में भारत लीडर की तरह भूमिका निभाता रहा है. भारत लगातार इस बात की वकालत करता आया है कि सुरक्षा परिषद का विस्तार उसकी स्थायी और अस्थायी दोनों कैटेगरी में किया जाना चाहिए. भारत की दलील है कि वर्ष 1945 में स्थापित 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद 21वीं सदी की चुनौतियों और आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं है. यह वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक वास्तविकताओं का सही प्रतिनिधित्व भी नहीं करती.

भारत सरकार ने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि भारत सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता का हर तरह से हकदार है. भारत आखिरी बार वर्ष 2021-22 में सुरक्षा परिषद की उच्च-स्तरीय निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा अस्थायी सदस्य के रूप में रहा था.

भारत ने ‘एलिमेंट्स पेपर’ की आलोचना की

भारत ने चर्चा के लिए प्रस्तुत किए गए ‘एलिमेंट्स पेपर’ की भी आलोचना की. भारत का कहना है कि यह डॉक्यूमेंट न तो वर्तमान स्थिति का सही व संतुलित चित्र प्रस्तुत करता है और न ही संयुक्त राष्ट्र के अधिकांश सदस्य देशों की व्यापक भावनाओं और अपेक्षाओं को पर्याप्त रूप से दिखाता है. भारत के प्रतिनिधि ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के विस्तार के पक्ष में मौजूद बहुसंख्यक देशों के समर्थन को ‘एलिमेंट्स पेपर’ में केवल “काफी संख्या में प्रतिनिधिमंडलों का समर्थन” कहकर सीमित कर दिया गया है.

हरीश ने यह भी रेखांकित किया कि इसका उल्लेख सिर्फ ‘एलिमेंट्स पेपर’ में ही किया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि इन सीट के लिए चुने जाने वाले सदस्य देश अपने राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करेंगे और वे औपचारिक रूप से अपने-अपने क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व नहीं करेंगे.

हरीश ने कहा, “इसमें तीन समस्याएं हैं. पहली, यह प्रस्ताव किसी भी प्रकार से स्थायी कैटेगरी का विस्तार नहीं करता, दूसरी, अगर संबंधित सदस्य देश अपने राष्ट्रीय स्तर पर काम करेंगे तो क्षेत्रीयता की अवधारणा का उद्देश्य ही पूरा नहीं होगा और तीसरी, यह छोटे द्वीपीय विकासशील देशों के पक्ष को कमजोर करता है, जिसका भारत लगातार समर्थन करता रहा है.”

भारत ने कहा कि यह प्रस्ताव “स्थायित्व से जुड़ी जटिल दलीलों से परे दो साल के कार्यकाल के लिए चुने जाने वाले सुरक्षा परिषद के 10 निर्वाचित सदस्यों को एक प्रकार का वीटो देने जैसा है और यह वीटो शक्ति को स्थायित्व के साथ भ्रमित करता है. भारत ने कहा कि ‘एलिमेंट्स पेपर’ में ‘स्थायित्व’ की अवधारणा पर आगे चर्चा और स्पष्टीकरण का प्रस्ताव रखा गया है. हरीश ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर इस विषय में पूरी तरह स्पष्ट है और इसमें किसी प्रकार की अस्पष्टता की कोई गुंजाइश नहीं है.

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