थरूर एक बार फिर अपनी ही पार्टी के निशाने पर क्यों आ गए…………………….

कांग्रेस सांसद शशि थरूर अपने बयान के कारण एक बार फिर अपनी ही पार्टी के निशाने पर आ गए हैं। दरअसल, थरूर ने 21 जून को श्रीनगर दौरे के दौरान जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा- हमने जम्मू-कश्मीर की स्थिति और हालात में आ […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 22 जून 2026, 06:55 AM 4 मिनट read
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थरूर एक बार फिर अपनी ही पार्टी के निशाने पर क्यों आ गए…………………….
Photo: UB India News Archive

कांग्रेस सांसद शशि थरूर अपने बयान के कारण एक बार फिर अपनी ही पार्टी के निशाने पर आ गए हैं। दरअसल, थरूर ने 21 जून को श्रीनगर दौरे के दौरान जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात की।

इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा- हमने जम्मू-कश्मीर की स्थिति और हालात में आ रहे सुधार पर बात की। चुनौतियां अभी भी हैं, लेकिन इस दौरे के बाद मुझे पहले से ज्यादा पॉजिटिव महसूस हुआ।

थरूर के इस पोस्ट को लेकर कांग्रेस के भीतर ही विरोध शुरू हो गया। जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रविंदर शर्मा ने कहा कि थरूर को कश्मीर के लोगों से भी मिलना चाहिए था, ताकि वे जमीनी हालात को बेहतर तरीके से समझ पाते।

विशेष दर्जा खत्म करने का विरोध करती रही है कांग्रेस

थरूर का बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार पर जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य नहीं कर पाने का आरोप लगाती रही है। साथ ही पार्टी विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाने का विरोध करती आई है।

वहीं भाजपा ने थरूर के बयान का समर्थन करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। पार्टी प्रवक्ता अभिजीत जसरोटिया ने कहा कि आर्टिकल 370 हटने के बाद पत्थरबाजी की घटनाएं लगभग खत्म हो गई हैं और सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले 18 महीनों में कोई भी कश्मीरी युवा आतंकवादी संगठनों में शामिल नहीं हुआ है।

थरूर बोले- कश्मीर में पर्यटन की अपार संभावनाएं

थरूर 20 जून को श्रीनगर नालंदा डायलॉग नाम के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उन्होंने X पर तस्वीरें शेयर करते हुए कहा कि यहां पर्यटन क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक विकास की बड़ी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि पहलगाम त्रासदी के एक साल बाद अब कश्मीर में पर्यटन को फिर से रफ्तार देने का समय आ गया है।

19 जून: थरूर ने G7 समिट में पीएम के बयान की तारीफ की थी

थरूर ने दो दिन पहले न्यूज एजेंसी PTI को दिए एक इंटरव्यू में पीएम की तारीफ की थी। उन्होंने G7 समिट में ट्रम्प के सामने भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा उठाने और ‘ट्रस्ट डेफिसिट’ वाले बयान पर पीएम का समर्थन किया।

कांग्रेस सांसद ने कहा- यह मैसेज देना जरूरी है कि युद्ध के समय, कमर्शियल जहाजों पर काम करने वाले आम नागरिकों और नाविकों को लड़ाई का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। वे सैनिक नहीं होते, और यही संदेश पीएम मोदी ने दिया।

खेड़ा ने कहा- मोदी जितना बोलते नहीं, उनके भक्त उससे ज्यादा सुनते हैं

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने थरूर पर तंज कसते हुए कहा था कि थरूर जी को न जाने कैसे जोरदार बातें, कड़ा विरोध और बिना समझौता किए की गई कूटनीति सुनाई दी, जो आधिकारिक रिकॉर्ड में कभी आई ही नहीं।

इस पर थरूर ने जवाब देते हुए कहा- मैंने पीएम की टिप्पणियों से जुड़ी प्रकाशित रिपोर्टों का जिक्र किया था। मैं जो पढ़ता हूं, उसे याद रखता हूं। मुझ पर कभी किसी बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप नहीं लगा है।  

थरूर पहले भी पीएम मोदी की तारीफ कर चुके

  • 23 जून 2025: मोदी को भारत की बड़ी ताकत बताया ऑपरेशन सिंदूर के बाद प्रकाशित एक लेख में शशि थरूर ने लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी की ऊर्जा, सक्रियता और वैश्विक स्तर पर बातचीत करने क्षमता भारत के लिए एक बड़ी संपत्ति (Prime Asset) है। उन्होंने कहा कि विदेश नीति के मोर्चे पर भारत को प्रधानमंत्री की अंतरराष्ट्रीय पहुंच का फायदा मिलता है।
  • मई 2025: ऑपरेशन सिंदूर के बाद सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनेकेंद्र सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद विदेशों में भारत का पक्ष रखने के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजा। इनमें एक ग्रुप का नेतृत्व थरूर ने किया। उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित का विषय है और देश के लिए अपनी भूमिका निभाना उनका कर्तव्य है।
  • जून 2025: ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई का समर्थनविदेश दौरे के दौरान थरूर ने कहा कि 2016 के बाद भारत की नीति बदल गई है और अब आतंकी हमलों का जवाब दिया जाता है। उन्होंने भारत की प्रतिक्रिया को संयमित लेकिन दृढ़ बताया और आतंकवाद के खिलाफ सरकार के रुख का समर्थन किया।
  • नवंबर 2025: सांस्कृतिक आत्मविश्वास पर मोदी के विचारों की सराहनाथरूर ने पीएम मोदी के ‘औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलने’ और भारतीय सांस्कृतिक आत्मविश्वास को बढ़ाने वाले संदेश का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस विषय पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
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