लखनऊ अग्निकांड: 15 मौतों का जिम्मेदार कौन?

लखनऊ में अलीगंज स्थित एक इमारत में आग लगने से 15 बच्चों की मौत हो गई. इस अग्निकांड के बाद कई लापरवाही सामने आ रही हैं. सवाल पूछा जा रहा है कि क्या ये वाकई सिर्फ एक हादसा था या हत्याकांड. लापरवाही तो साफ दिख ही रही है, लेकिन असली दोषी तो जांच के बाद […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 24 जून 2026, 07:08 AM 11 मिनट read
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लखनऊ अग्निकांड: 15 मौतों का जिम्मेदार कौन?
Photo: UB India News Archive
लखनऊ में अलीगंज स्थित एक इमारत में आग लगने से 15 बच्चों की मौत हो गई. इस अग्निकांड के बाद कई लापरवाही सामने आ रही हैं. सवाल पूछा जा रहा है कि क्या ये वाकई सिर्फ एक हादसा था या हत्याकांड. लापरवाही तो साफ दिख ही रही है, लेकिन असली दोषी तो जांच के बाद ही सामने आ पाएगा. इस बीच एक खाकी वर्दी पहने शख्स का वीडियो काफी वायरल हो रहा है. वो खुद को फायरमैन बता रहा है. साथ ही दावा कर रहा कि अलीगंड अग्निकांड का असली दोषी लखनऊ का मुख्य अग्निशमन अधिकारी है.
CM को लिखा पत्र
वीडियो में जितेंद्र राठौड़ नाम के शख्स ने कहा, मैं फायरमैन हूं. लखनऊ अग्निकांड में सेकंड ऑफिसर को निलंबित कर दिया गया है. हमेशा बड़ा अधिकारी बच जाता है और छोटा अधिकारी फंस जाता है. इस बारे में एफएसओ सीएम को भी पत्र लिख चुके हैं. मुझसे पूछा जा रहा है कि तुम यहां क्या कर रहे हो? क्या मैं अपनी बात सामने नहीं रख सकता. निलंबित होऊंगा तो हो जाऊंगा.
पढ़ा लिखा सिपाही हूं…
उन्होंने आगे कहा कि 15 बच्चे मरे हैं. मैंने नेट किया हुआ है. पढ़ा लिखा सिपाही हूं. मेरी आत्मा रो रही है. मैं पीछे छिपकर सुन रहा था. मैंने अपनी पहचान इसलिए गोपनीय रखी थी क्योंकि मैं अभी जंतर मंतर पर भी गया था. पुलिस पकड़कर ले गई थी. आज ही जेल से छूटा हूं. हो सकता है मेरा एनकाउंटर कर दें इसलिए मैं पहचान छिपा रहा था. मरवा दें मुझे, क्या भरोसा है? शख्स ने यह भी कहा कि एफएसओ कमलेश कुमार ने बयान दिया है कि लखनऊ का मुख्य अग्निशमन अधिकारी जिम्मेदार है. इसके लिए उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है.
कौन है जिम्मेदार?
गौरतलब है, सरकार ने चार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है और पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. मगर, सबसे बड़ा दोष नजर आता है शहर के फायर ब्रिगेड और स्थानीय शासन का जिसने इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया कि जिस भवन में कोचिंग इंस्टीट्यूट चल रहा है, जहां बच्चों के लिए गेमिंग जोन है, जहां पेट शॉप, उस जगह पर न आग बुझाने की व्यवस्था थी और न ही आपातकालीन निकास की व्यवस्था थी. जब आग फैली तो एक मात्र सीढ़ी सी नीचे आना मुश्किल था. हालांकि, जांच से पता चलेगा कि लापरवाही किसकी थी, भवन निर्माता की, कोचिंग सेंटर की या फिर भवन में चलने गेमिंग जोन की या फिर किसी और की.

लखनऊ अग्निकांड- कपल की शादी होने वाली थी

लखनऊ अग्निकांड में मरने वाले 15 युवाओं में अनामिका और नीलेश भी थे। दोनों एक दूसरे को पसंद करते थे। इनकी शादी होने वाली थी। अनामिका पश्चिम बंगाल में न्यू अलीपुर और नीलेश लखनऊ के रहने वाले थे। दोनों हेड हॉपर एनिमेशन कंपनी में जॉब करते थे।

अनामिका के पिता नीलेश के घर रिश्ता लेकर 3 बार आ चुके थे। मंगलवार को अनामिका के पिता विश्वनाथ सामंता मेडिकल कॉलेज (KGMU) के पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे थे। उनका रो रोकर बुरा हाल था। बेटी की लाश देखकर यही कह रहे थे-

मेरा सब कुछ लुट गया। बेटी की शादी की तैयारी कर रहा था, आज हमारा परिवार ही उजड़ गया।

अनामिका की मां बार-बार बेहोश हो रही थीं। विश्वनाथ अपने आंसुओं को छिपाते हुए उन्हें संभालते रहे। भाई का कहना है कि हादसे से कुछ देर पहले बहन से बातचीत हुई थी। वहीं, हादसे में मरने वाले सौमल्य की दिसंबर में शादी होनी थी। अनुछा सोमवार का व्रत थीं। ज्योति परिवार की जिम्मेदारी संभालने के लिए कम उम्र में ही जॉब कर रही थीं।

अनामिका के पिता बोले- शादी की बातचीत कर रहे थे

अनामिका के पिता विश्वनाथ ने कहा- शादी को लेकर बातचीत चल रही थी। नीलेश के यहां हम 2-3 बार जा चुके हैं। उसके मां और पिता से भी मिले थे। दोनों में अफेयर का पता नहीं, लेकिन एकसाथ ऑफिस में काम कर रहे थे। हमारी इच्छा थी कि उनकी शादी कराई जाए।

सुबह फोन पर बात हुई, दोपहर में मौत हो गई

अनामिका के भाई आकाश ने बताया- हमारे माता-पिता एक हफ्ते पहले ही बहन से मिलने आए थे। सुबह उससे फोन पर बात हुई थी। उसने कहा था- मैं अब जॉब पर जा रही हूं। उसके बाद दोपहर में मौत हो गई। वह एनिमेशन आर्टिस्ट थी। तीन साल से यहां जॉब कर रही थी। इससे पहले, चंडीगढ़ में थी। 7 साल का एक्सपीरियंस था।

नीलेश के परिजन बोले- पोस्टमॉर्टम हाउस से फोन आया, तब हादसे का पता चला

नीलेश (28) लखनऊ के हजरतगंज के रहने वाले थे। उनके पिता शत्रुघ्न लाल यूपी बिजली विभाग से रिटायर्ड हैं। नीलेश चार भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर थे। परिवार ने बताया कि हादसे के बारे में सोमवार शाम पोस्टमॉर्टम हाउस से फोन आने पर जानकारी मिली।

हालांकि, उन्होंने इमारत में आग लगने की खबरें देखी थीं, लेकिन यह पता नहीं था कि उनके बेटे की भी इस घटना में मौत हो गई है। परिजनों ने बताया कि वे नीलेश के रिश्ते की तैयारी कर रहे थे, लेकिन उससे पहले ही हादसा हो गया।

भाई की दिसंबर में शादी होनी थी, उसी की तैयारी में था

सौमल्य की डेडबॉडी लेने पश्चिम बंगाल से उनके चचेरे भाई शुभम आए थे। उन्होंने कहा- सौमल्य पहले अहमदाबाद में काम करता था। 2-3 साल पहले यहां काम करने आया। इतना कहते ही वह रोने लगे। उन्होंने कहा- रात में 1 बजे खबर मिली। हमको पुलिस का फोन आया कि सौमल्य की मौत हो गई है। सौमल्य की इसी साल दिसंबर में शादी होने वाली थी। उसी की तैयारियों में वह लगा था।

सौमल्य बेरा पश्चिम बंगाल के रहने वाले थे। वे हैदराबाद के बाद 2 साल से लखनऊ में जॉब कर रहे थे।
सौमल्य बेरा पश्चिम बंगाल के रहने वाले थे। वे हैदराबाद के बाद 2 साल से लखनऊ में जॉब कर रहे थे।

सोमवार को व्रत रहती थी अनुछा, बिना कुछ खाए ऑफिस गई

हादसे में जान गंवाने वाली अनुछा राय मोहनलालगंज के धोधनखेड़ा की रहने वाली थीं। छोटी बहन ईशा राय ने बताया- सोमवार सुबह बड़ी बहन अनुछा से उनकी आखिरी बार बात हुई थी। अनुछा सोमवार को व्रत रहती थीं, इसलिए वे सुबह जल्दी उठकर पूजा करती थीं। ईशा ने बताया कि घर से व्रत के लिए फल और साबूदाने से बनी चीजें ले जाने को कहा गया था, लेकिन उन्होंने उस दिन कुछ खाने की इच्छा नहीं जताई थी।

यह तस्वीर अनुछा राय की है। वह 2 साल से कैरेक्टर आर्टिस्ट थीं। पिता तीज कुमार नेवी से रिटायर्ड हुए थे। 4 साल पहले उनकी सड़क हादसे में मौत हो गई थी।
यह तस्वीर अनुछा राय की है। वह 2 साल से कैरेक्टर आर्टिस्ट थीं। पिता तीज कुमार नेवी से रिटायर्ड हुए थे। 4 साल पहले उनकी सड़क हादसे में मौत हो गई थी।

बहन की दोस्त ने फोन कर बताया- ऑफिस में आग लगी

ईशा ने बताया कि अनुछा सुबह जल्दी काम पर चली जाती थीं और शाम को लौटती थीं, इसलिए दोनों की बातचीत अक्सर सुबह या शाम को ही हो पाती थी। सोमवार शाम छह बजे बहन की दोस्त वर्षा का फोन आया। उन्होंने पूछा कि अनुछा कहां हैं? इस पर ईशा ने बताया कि वह अभी दफ्तर में होंगी, क्योंकि उनकी ड्यूटी अक्सर शाम सात से साढ़े सात बजे तक रहती थी।

कुछ देर बाद वर्षा ने दोबारा फोन कर बताया कि ऑफिस में आग लग गई है। यह सुनकर ईशा ने अनुछा के मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की। दूसरी बार कॉल उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को पुलिसकर्मी बताते हुए कहा कि अनुछा का मोबाइल उनके पास है। उन्हें तत्काल ट्रॉमा सेंटर पहुंचना चाहिए, क्योंकि आग बेहद भीषण थी।

घर का खर्च चलाने के लिए कमाने लगी बेटी

हादसे में जान गंवाने वाली चिनहट की ज्योति का बैकुंठ धाम में अंतिम संस्कार किया गया। परिवार में पिता हरिचरण कश्यप और मां कुसुम हैं। ज्योति के चार भाई हैं। पिता की कमता में मिठाई की दुकान है। ज्योति ने इसी साल नौकरी जॉइन की थी। वे जूनियर कैरेक्टर आर्टिस्ट के तौर पर काम करती थीं।

ज्योति जूनियर कैरेक्टर आर्टिस्ट थीं। उन्होंने इसी साल नौकरी जॉइन की थी।
ज्योति जूनियर कैरेक्टर आर्टिस्ट थीं। उन्होंने इसी साल नौकरी जॉइन की थी।

अब पढ़िए हादसे के चश्मदीदों की जुबानी-

‘अफरा-तफरी मची थी, लोग ईंट मारकर शीशा तोड़ रहे थे’

हादसे की चश्मदीद कामिनी ने बताया- जब आग लगी तो मैं घर पर ही थी। चीख पुकार मचने पर बाहर निकली तो देखा कि अफरा-तफरी का माहौल था। लोग इमारत पर ईंट मार रहे थे, ताकि शीशा टूट जाए और धुआं बाहर निकल जाए। शीशा टूटते ही इमारत से लटककर लोग कूद रहे थे। चाहकर भी हम, लोगों की मदद नहीं कर पाए। फायर की गाड़ियां भी देर से आईं। इसलिए बहुत समस्या हुई।

‘50 से ज्यादा पक्षी और बिल्लियां थीं’

विशाल सिंह राजपूत ने बताया- मैं एक-दो दिन पहले पेट्स की दुकान पर आया था। दुकान पर 50 से ज्यादा बर्ड्स हुआ करती थीं। एशियाई कैट्स थीं। पॉपुलर शॉप थी, इसलिए यहां पर लोग दूर-दूर से आते थे।

‘आग की लपटें विकराल हो चुकी थीं’

चश्मदीद राहुल सिंह बताते हैं- जब मौके पर पहुंचा तो आग की लपटें पूरी इमारत में फैल चुकी थीं। मेरा घर इस इमारत के पीछे है। हम लोगों को सूचना तुरंत मिल गई थी। अंदर काफी बच्चे चिल्ला रहे थे।

बिल्डिंग में पहले भी हम लोगों ने देखा है कि एंट्री पॉइंट एक ही तरफ से था, जिसकी वजह से कोई भी व्यक्ति बाहर नहीं निकल पाया। बिल्डिंग की साइड की दोनों दीवारें 9 इंच मोटी थीं। इसीलिए फायर कर्मियों को दीवार तोड़ने में काफी परेशानी हुई। रेस्क्यू में देरी हुई।

‘लोग बचने की कोशिश कर रहे थे, तब तक फायर की गाड़ी आ गई’

चश्मदीद अभय माहेश्वरी बताते हैं- इमारत के अंदर बच्चे फंसे हुए थे। वे चिल्ला रहे थे। मदद मांग रहे थे। फायर विभाग की गाड़ियां थोड़ा लेट आईं, इसलिए तमाम लोगों को बचाया नहीं जा सका। शायद समय से आतीं तो बचाया जा सकता था।

इमारत के मालिक ने इंटीग्रेटेड और एग्जिट गेट बना रखा था, वह बिल्कुल पैक था। बाहर निकलने की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं थी। सबसे नीचे पेट्स स्टोर चलता था। ऊपर एनिमेशन की कोचिंग थी। पेट्स स्टोर में काफी डॉग्स और बिल्लियां भी थीं। यह बहुत ही दुखद घटना है।

3 वजहों से तेजी से फैली आग-

1. ज्वलनशील सामान ने आग को बड़ा बना दिया

पेट्स शॉप में बड़ी मात्रा में पेडिग्री, प्लास्टिक पैकिंग, कार्डबोर्ड और अन्य ज्वलनशील सामग्री रखी हुई थी। इसके अलावा, इमारत के कुछ हिस्सों में एल्यूमीनियम शीट और प्लास्टिक आधारित स्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया गया था। इससे आग तेजी से फैली और कुछ ही मिनटों में पूरी इमारत में घना धुआं भर गया।

2. एक ही एंट्री और एग्जिट पॉइंट बना मौत का कारण

स्थानीय लोगों का कहना है कि इमारत में आने-जाने का प्रमुख रास्ता एक ही था। आग लगने के बाद रास्ता धुएं और लपटों से घिर गया, जिससे ऊपर मौजूद लोगों के पास बचने का कोई विकल्प नहीं बचा।

3. 2 मंजिला इमारत में इमरजेंसी एग्जिट नहीं

भवन में आपात स्थिति में बाहर निकलने के लिए केवल एक ही रास्ता मौजूद था। भूतल पर पेट शॉप और क्लीनिक, ऊपर लाइब्रेरी, ऑफिस और एनीमेशन क्लासें चल रही थीं। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बावजूद सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त नहीं दिखाई दिए।

जयंत नाम का युवक जलती बिल्डिंग से नीचे कूद गया था। वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
जयंत नाम का युवक जलती बिल्डिंग से नीचे कूद गया था। वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

अब पूरी घटना जानिए-

लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार दोपहर ढाई बजे आग लग गई। इसमें दम घुटने से 15 लोगों की मौत हो गई। जांच में पता चला है कि जिस बिल्डिंग में आग लगी, वह अवैध थी। इसे गिराने का आदेश 2016 में हुआ था, लेकिन बाद में निरस्त कर दिया गया था। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के वीसी प्रथमेश कुमार ने बताया- बिल्डिंग मालिक को नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब मांगा गया है। इसके बाद बिल्डिंग पर बुलडोजर चलेगा।

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