वेनेजुएला तो झांकी, ये हैं दुनिया के 5 हाहाकारी भूकंप, जब फटी धरती और देश के देश हो गए तबाह
वेनेजुएला में दो ताकतवर भूकंप से तबाही मच गई है। दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में बुधवार शाम 6.34 बजे 7.2 और 6.35 बजे 7.5 तीव्रता के दो झटके आए। उस समय भारत में गुरुवार तड़के 3.34 और 3.35 बजे थे। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक, भूकंप से 10 हजार से ज्यादा लोगों के मारे जाने […]
वेनेजुएला में दो ताकतवर भूकंप से तबाही मच गई है। दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में बुधवार शाम 6.34 बजे 7.2 और 6.35 बजे 7.5 तीव्रता के दो झटके आए। उस समय भारत में गुरुवार तड़के 3.34 और 3.35 बजे थे।
अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक, भूकंप से 10 हजार से ज्यादा लोगों के मारे जाने की 44% आशंका है। वहीं, 30% आशंका एक लाख लोगों के जान गंवाने की भी है। अब तक 32 मौतों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 700 से घायल हैं।
दोनों भूकंप राजधानी कराकस से करीब 290 किलोमीटर पश्चिम में आए। इससे कई शहरों में इमारतें गिर गईं या खतरनाक तरीके से झुक गईं। कराकस एयरपोर्ट की छत का कुछ हिस्सा गिर गया। इससे धूल का गुबार उठता दिखाई दिया।
वेनेजुएला में आए भूकंप ने भारी तबाही मचाई है. इस लैटिन अमेरिकी देश में 24 जून 2024 को आए भूकंप में अभी तक 10 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं 1 लाख तक लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है. हालांकि यह पहली बार नहीं है, दुनिया में कई बार इससे भी ज्यादा विनाशकारी भूकंप आए हैं. आइए जानते हैं दुनिया के पांच उन सबसे शक्तिशाली भूकंप के बारे में जब धरती फटी और लाखों जानें इनमें समा गईं. आइए जानते हैं..
24 जून 2026 को लैटिन अमेरिकी देश वेनेजुएला में आए भूकंप ने हाहाकार मचा दिया है. एक मिनट के भीतर आए ताबड़तोड़ दो झटकों ने हजारों लोगों की जान ले ली है. वहीं 1 लाख से ज्यादा लोगों के मारे जाने का अनुमान लगाया जा रहा है. इस विनाशकारी भूकंप में हजारों इमारतें ध्वस्त हो गई हैं. फिलहाल यहां रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है. लेकिन क्या आपको पता है कि वेनेजुएला तो एक झांकी है, दुनिया में इससे भी बड़े-बड़े भूकंप आए हैं, जब धरती फटी और लाखों लोग इसमें समा गए. आइए जानते हैं..
भारत में आई सुनामी को आज भी लोग भूले नहीं हैं. समुद्र में से उठते पानी के ज्वार ने लाखों लोगों को लील लिया था. यह विनाशकारी आपदा 26 दिसंबर 2004 में हिंद महासागर में आए भूकंप और सुनामी की वजह से आई थी. यह भूकंप 9.1 तीव्रता के साथ आया था और इसका केंद्र इंडोनेशिया के पास समुद्र था. इसने सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि श्रीलंका और थाइलैंड सहित 14 देशों में भी जानें ली थीं. इसमें करीब 2.3 लाख लोगों की मौत हुई थी. लाखों लोगों के घर उजड़ गए थे.
इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा भूकंप हैती का माना जाता है. 12 जनवरी 2010 को आए इस भूकंप की विनाशलीला में करीब 200000 से ज्यादा लोग मारे गए थे और 3 लाख से ज्यादा लोग घायल हुए थे. यह भूकंप बेहद उथली गहराई (करीब 13 किमी) पर आया था इसलिए इसके झटकों ने तबाही ज्यादा की थी. इस आपदा में करीब 15 लाख लोग बेघर हो गए थे. लाखों इमारतें जमींदोज हो गई थीं. यह इतना खतरनाक था कि यूएन द्वारा करीब 3 महीने तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया था लेकिन लाशों के सड़ने और संक्रमण की आशंका के चलते उसे बीच में ही छोड़ा गया था.
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा भूकंप तुर्की-सीरिया में आया था. 6 फरवरी 2023 को धड़ाधड़ गिरती इमारतें, लोगों की चीखें अभी भी लोगों की आंखों के सामने घूम जाती हैं. इस आपदा में दोनों देशों में करीब 34 हजार मौतें हुई थीं और 94,770 लोग जख्मी हुए थे. जबकि 33,070 करोड़ से ज्यादा के नुकसान का अनुमान था लगाया गया था. इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.8 मापी गई थी लेकिन नुकसान कहीं ज्यादा हुआ था. गौरतलब है कि तुर्की का यह क्षेत्र दुनियाभर में भूकंपीय रूप से सबसे ज्यादा सक्रिय क्षेत्रों में से एक है.
इतिहास गवाह है कि दुनिया का सबसे घातक भूकंप चीन में आया था. इसमें 8 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी, हालांकि यह साल 1556 में आया था, जिसे लोग अब भूल भी चुके हैं, लेकिन जितनी मौतें इस भूकंप में हुई थीं, उतनी आजतक किसी भूकंपीय आपदा में नहीं हुईं. 23 जनवरी 1556 को चीन के शान्शी प्रांत में यह आपदा आई थी. इसकी अनुमानित तीव्रता लगभग 8.0 थी लेकिन इसके झटकों ने शान्शी, शांक्सी, हेनान और आसपास के कई क्षेत्रों को तबाह कर दिया था.
रिक्टर स्केल पर देखें तो अब तक का सबसे शक्तिशाली भूकंप चिली के वाल्दीविया में आया था. 1960 में आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 9.5 आंकी गई थी, हालांकि इसमें मौतें कुछ कम हुई थीं. बता दें कि 22 मई 1960 को चिली में जब धरती डोली तो दुनिया में तहलका मच गया. जैसे ही भूकंप की तीव्रता मापी गई तो विशेषज्ञों के हलक सूख गए. इस भूकंप ने चिली के अलावा जापान और फिलीपींस तक तबाही मचाई थी. इसमें लगभग 1,600 से अधिक मौतें हुई थीं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियन के बीच बिश्केक में मुलाकात होने वाली है. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद ये पहली बार होगा, जब दोनों देशों के नेता आमने-सामने मिलने वाले हैं. ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस द्विपक्षीय वार्ता पर होगी.
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।
समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।
आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]
पंजाब में 25 सालों तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान 2020 में यह ढाई दशक पुरानी दोस्ती टूट गई थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज हो गई है. बीजेपी […]