व्हाट्सएप के नये फीचर पर सरकार क्यों हुई सख्त, रोलआउट रोकने का क्यों दिया निर्देश !……………

भारत सरकार ने व्हाट्सएप के उस नए “यूज़रनेम (Username)” फीचर पर सख्त रुख अपनाया है, जिसके लागू होने के बाद उपयोगकर्ता बिना अपना मोबाइल नंबर बताए एक-दूसरे से संपर्क कर सकेंगे। सरकार ने इस फीचर के भारत में रोलआउट पर फिलहाल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं और Meta (व्हाट्सएप की मूल कंपनी) से तीन […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 2 जुलाई 2026, 10:48 AM 4 मिनट read
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व्हाट्सएप के नये फीचर पर सरकार क्यों हुई सख्त, रोलआउट रोकने का क्यों दिया निर्देश !……………
Photo: UB India News Archive

भारत सरकार ने व्हाट्सएप के उस नए “यूज़रनेम (Username)” फीचर पर सख्त रुख अपनाया है, जिसके लागू होने के बाद उपयोगकर्ता बिना अपना मोबाइल नंबर बताए एक-दूसरे से संपर्क कर सकेंगे। सरकार ने इस फीचर के भारत में रोलआउट पर फिलहाल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं और Meta (व्हाट्सएप की मूल कंपनी) से तीन दिनों के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है।

सरकार का कहना है कि यदि मोबाइल नंबर छिपाकर केवल यूज़रनेम के माध्यम से बातचीत की अनुमति दी जाती है, तो इससे साइबर ठगी, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी पहचान (Impersonation) और ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है। जांच एजेंसियों के लिए अपराधियों की पहचान करना भी अधिक कठिन हो जाएगा। इसी कारण केंद्र सरकार ने फीचर लागू करने से पहले विस्तृत सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है।

सरकार वॉट्सएप के नए यूजरनेम फीचर की जांच करना चाहती है। सरकार का कहना है कि इस फीचर से पहचान छिपाकर धोखाधड़ी और साइबर फ्रॉड का खतरा काफी बढ़ सकता है। चिंता इस बात को लेकर है कि जब यूजर्स को फोन नंबर छिपाने की आजादी मिल जाएगी, तो जालसाजों के लिए किसी दूसरे के नाम का फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों को धोखा देना आसान हो सकता है। मेटा ने अपने वॉट्सएप में मोबाइल नंबर बताए बिना चैट करने वाला फीचर लॉन्च किया है। इसमें लोग सिर्फ यूजरनेम के जरिए किसी नए व्यक्ति से चैट कर सकते हैं।

भारत में वॉट्सएप के 50 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं। इतने बड़े यूजर बेस की सुरक्षा और फेक प्रोफाइल से होने वाले फ्रॉड रोकने के लिए सरकार नए फीचर के सेफ्टी स्टैंडर्ड्स परखना चाहती है।

तीन दिन पहले यूजरनेम फीचर लॉन्च किया था

कंपनी ने 29 जून से दुनियाभर में यूजरनेम का रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है। हालांकि, यह सुविधा सभी यूजर्स को एक साथ नहीं मिलेगी। आने वाले कुछ महीनों में इसे धीरे-धीरे सभी देशों में रोल आउट किया जाएगा। जब यह फीचर यूजर के इलाके में उपलब्ध होगा, तब उसके वॉट्सएप के अंदर नोटिफिकेशन मिलेगा।

क्या है नया फीचर?

व्हाट्सएप एक ऐसा फीचर ला रहा है, जिसमें उपयोगकर्ता अपने मोबाइल नंबर की जगह एक यूनिक यूज़रनेम बना सकेंगे। भविष्य में लोग केवल उसी यूज़रनेम के माध्यम से संपर्क कर पाएंगे और सामने वाले का मोबाइल नंबर दिखाई नहीं देगा। कंपनी का दावा है कि इससे उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता (Privacy) बेहतर होगी और विशेष रूप से सार्वजनिक समूहों या व्यावसायिक बातचीत में मोबाइल नंबर साझा करने की आवश्यकता कम होगी।

सरकार की चिंता क्यों?

सरकारी अधिकारियों का मानना है कि यदि मोबाइल नंबर छिप जाएंगे, तो साइबर अपराधी फर्जी नाम या किसी संस्था से मिलते-जुलते यूज़रनेम बनाकर लोगों को आसानी से अपना शिकार बना सकते हैं। बैंक, सरकारी विभाग या किसी प्रतिष्ठित कंपनी के नाम से मिलते-जुलते यूज़रनेम बनाकर लोगों को भ्रमित करने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए सरकार ने स्पष्ट किया है कि साइबर सुरक्षा से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

व्हाट्सएप का पक्ष

व्हाट्सएप ने कहा है कि यह फीचर अभी भारत में लागू नहीं किया गया है और इसे चरणबद्ध तरीके से लाने की योजना है। कंपनी का दावा है कि इस फीचर में कई सुरक्षा उपाय जोड़े गए हैं। किसी उपयोगकर्ता से संपर्क करने के लिए उसका सटीक यूज़रनेम जानना होगा, नए संपर्कों की संख्या पर सीमाएं होंगी और बार-बार यूज़रनेम का अनुमान लगाने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए तकनीकी सुरक्षा भी मौजूद रहेगी।

आगे क्या?

भारत सरकार ने साफ संकेत दिया है कि जब तक Meta इस फीचर से जुड़े सुरक्षा पहलुओं पर संतोषजनक जवाब नहीं देता, तब तक इसके रोलआउट पर निर्णय नहीं लिया जाएगा। यदि सरकार को लगता है कि यह फीचर साइबर अपराध को बढ़ावा दे सकता है या सूचना प्रौद्योगिकी कानूनों का उल्लंघन करता है, तो कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

गोपनीयता और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना आज डिजिटल युग की सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। जहां एक ओर यूज़र अपने मोबाइल नंबर को निजी रखना चाहते हैं, वहीं सरकार की प्राथमिकता साइबर अपराध पर नियंत्रण और नागरिकों की सुरक्षा है। ऐसे में व्हाट्सएप के इस नए फीचर का भविष्य अब सरकार और Meta के बीच होने वाली बातचीत तथा सुरक्षा मानकों पर निर्भर करेगा।

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