सोनम की जमानत पर रोक लगाने से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘चूंकि सोनम पहले ही जेल से रिहा हो चुकी हैं. इसलिए इस समय उनकी रिहाई में दखल देना उचित नहीं.’ सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ मेघालय सरकार गई है. मेघालय सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जवाब मांगा. इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी से भी जवाब मांगा कि आप बताएं कि आपकी जमानत क्यों न खारिज की जाए. जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की बेंच में यह सुनवाई हुई.
अब समझते हैं कि आखिर केतन और सिया का जिक्र कैसे हुआ? सुप्रीम कोर्ट में सोनम रघुवंशी की जमानत का विरोध एसजी तुषार मेहता कर रहे थे. एसजी तुषार मेहता सरकार की ओर से पेश हुए थे. सुप्रीम कोर्ट द्वारा ऑर्डर देने के दौरान अचानक तुषार मेहता ने एक अन्य मामले का हवाला दिया. एसजी तुषार मेहता का ने केतन और सिया का नाम लिए बगैर कहा कि हाल ही में एक पत्नी ने पति की हत्या इसलिए कर दी क्योंकि वह विग पहनता था. एसजी मेहता का यह बयान कथित तौर पर सिया-केतन हत्याकांड की ओर संकेत माना जा रहा है. उन्होंने इस उदाहरण के जरिए अदालत के सामने अपने तर्क रखे.
सोनम रघुवंशी की तरफ से पेश वकील ने कहा कि गिरफ्तारी के समय उन्हें न तो वकील मुहैया कराया गया और न ही गिरफ्तारी के स्पष्ट आधार बताए गए. उनका दावा था कि पुलिस ने सिर्फ एक खाली प्रोफॉर्मा दिया था. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि अगर यह मुद्दा इतना अहम था तो इसे पहले क्यों नहीं उठाया गया.कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जमानत सिर्फ तकनीकी आधार पर दी गई है, तो क्या कानून पुलिस को दोबारा गिरफ्तारी से रोकता है?
बता दें कि इंदौर के ट्रांसपोर्ट व्यापारी राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मेघालय हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें सोनम रघुवंशी को मिली जमानत को सही ठहराया गया था. सोनम पर मई 2025 में अपने पति राजा रघुवंशी की हनीमून के दौरान हत्या का मुख्य आरोपी होने का आरोप है. वहीं, मेघालय हाईकोर्ट ने 29 जून को शिलांग अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें राजा रघुवंशी मर्डर केस की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत दी गई थी। अदालत ने राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया था.







