रक्षा और सुरक्षा राष्ट्रीय जिम्मेदारी के विषय हैं; मीडिया को हमेशा सटीकता, निष्पक्षता और तटस्थता बनाए रखनी चाहिए…………….

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 4 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली में एक मीडिया संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “पिछले 12 वर्षों में भारत की यात्रा अभावों से आत्मनिर्भरता की ओर, आत्मनिर्भरता से आत्मविश्वास की ओर और आत्मविश्वास से विकसित भारत के निर्माण की ओर प्रगति की रही है।” उन्होंने जोर […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शनिवार, 4 जुलाई 2026, 11:35 AM 6 मिनट read
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रक्षा और सुरक्षा राष्ट्रीय जिम्मेदारी के विषय हैं; मीडिया को हमेशा सटीकता, निष्पक्षता और तटस्थता बनाए रखनी चाहिए…………….
Photo: UB India News Archive

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 4 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली में एक मीडिया संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “पिछले 12 वर्षों में भारत की यात्रा अभावों से आत्मनिर्भरता की ओर, आत्मनिर्भरता से आत्मविश्वास की ओर और आत्मविश्वास से विकसित भारत के निर्माण की ओर प्रगति की रही है।” उन्होंने जोर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में अभावों को दूर किया, अवसरों को बढ़ाया और कार्य संस्कृति में परिवर्तन किया; दूसरे कार्यकाल में, इसने आकांक्षाओं को उपलब्धियों में परिवर्तित किया और देश को आत्मनिर्भरता के पथ पर दृढ़ता से आगे बढ़ाया। उन्होंने आगे कहा कि अपने तीसरे कार्यकाल में, सरकार “सुधारप्रदर्शनपरिवर्तन” की नीति के माध्यम से विकसित भारत की मजबूत नींव रख रही है और उन्‍होंने विश्वास व्यक्त किया कि चौथे कार्यकाल में विश्व एक विकसित भारत के उदय का साक्षी बनेगा।

रक्षा मंत्री ने पिछले 12 वर्षों में देश के परिवर्तन के प्रमुख पहलुओं के बारे में बताते हुए कहा कि जब 2014 में ‘मेक-इन-इंडिया’ शुरू की गई थी, तब कुछ लोगों ने इसे असफल बताया था लेकिन इस योजना ने सफलता के नए मानक स्थापित किए और यह आज भी जारी है। उन्होंने कहा, “भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा में एक परिवर्तनकारी बदलाव आया है। पहले जहां विश्‍व हमारी बात पर ध्यान नहीं देता था, वहीं आज वह वैश्विक मुद्दों पर भारत के दृष्टिकोण को ध्यान से सुनता है।” उन्होंने आगे कहा कि 2021 में शुरू किए गए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन पर शुरुआती संदेह के बावजूद, ‘प्लग-एंड-प्ले’ बुनियादी ढांचा मॉडल पर आधारित सेमीकंडक्टर पार्कों की स्थापना के कारण देश ने पिछले साल अपने स्वयं के सेमीकंडक्टर चिप्स का उत्पादन किया।

श्री राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में वार्षिक रक्षा उत्पादन सर्वकालिक उच्च स्तर 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह वित्त वर्ष 2014-15 के आंकड़े से तीन गुना अधिक है। उन्होंने कहा कि रक्षा निर्यात आज रिकॉर्ड 38,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। यह वित्त वर्ष 2013-14 के 686 करोड़ रुपये से लगभग 57 गुना अधिक है और मेक-इन-इंडिया पहलों में विश्‍व के विश्वास को दर्शाता है।

रक्षा मंत्री ने भारत के विनिर्माण और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में हुई महत्वपूर्ण वृद्धि के बारे में बताते हुए मोबाइल विनिर्माण, ऑटोमोबाइल निर्यात, स्वदेशी लोकोमोटिव उत्पादन और मेक-इन-इंडिया के तहत डिजिटल अवसंरचना के विस्तार का उल्लेख किया। उन्होंने भारत की डिजिटल क्रांति का विशेष रूप से उल्‍लेख करते हुए कहा कि अप्रैल में 22.35 बिलियन यूपीआई लेनदेन हुए। इसका कुल मूल्य 29 लाख करोड़ रुपये था और इस सुविधा का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार हो रहा है। उन्होंने स्वदेशी रूप से विकसित मेक-इन-इंडिया 5जी तकनीक के देशव्यापी तीव्र विस्तार की भी बात की और कहा कि 6जी के विकास की दिशा में प्रयास जारी हैं।

राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि 2014 से पहले, कल्याणकारी योजनाओं के वितरण में भ्रष्टाचार और गबन को व्यापक रूप से अपरिहार्य माना जाता था जिसके कारण लाभ लाभार्थियों तक नहीं पहुंच पाता था। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, जन धन, आधार और मोबाइल के त्रिमूर्ति ‘जेएएम त्रिमूर्ति’ के माध्यम से इस चुनौती का समाधान किया जिससे लाभार्थियों के बैंक खातों में 51 लाख करोड़ रुपये का सीधा हस्तांतरण संभव हुआ और लगभग 4.3 लाख करोड़ रुपये के गबन को रोका जा सका। उन्होंने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के सफल कार्यान्वयन के बारे में कहा कि प्रारंभिक चिंताओं के बावजूद, इसने केंद्र और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच समन्वय को मजबूत करके सहकारी संघवाद के एक आदर्श के रूप में विकास किया है।

रक्षा मंत्री ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाना और नक्सलवाद को खत्म करने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयास सरकार के उन मुद्दों को हल करने के दृढ़ संकल्प के ज्वलंत उदाहरण हैं जिन्हें कभी असंभव माना जाता था। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार उद्यमियों को रोजगार सृजनकर्ता और धन निर्माता मानती है और जन विश्वास सुधार जैसी पहलों ने व्यापार करने में सुगमता को बढ़ाया है और भारत को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ने में योगदान दिया है। उन्होंने आगे कहा, “भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम बन गया है। पिछले 12 वर्षों में, स्टार्ट-अप्स की संख्या 500 से बढ़कर 2 लाख से अधिक हो गई है और यूनिकॉर्न की संख्या चार से बढ़कर 125 हो गई है।”

राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की संस्कृति उसकी पहचान, एकता और राष्ट्रीय चेतना की नींव है और सभ्यता, संस्कृति और विरासत के संरक्षण के साथ-साथ समग्र विकास को भी आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, महाकाल लोक और मां कामाख्या दिव्य लोक परियोजना जैसी पहलों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक पहचान को पुनर्जीवित करने और उसकी खोई हुई विरासत को पुनर्स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं साथ ही संसद में ‘सेंगेल’ की स्थापना, ‘वंदे मातरम’ की गरिमा को बहाल करना, प्राचीन कलाकृतियों की वापसी और प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण जैसे कार्य भी किए जा रहे हैं।

रक्षा मंत्री ने आज के दौर में मीडिया की भूमिका को ‘संचार की प्रचुरता’ के युग में पहले से कहीं  अधिक महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि चुनौती सूचना की कमी नहीं बल्कि उसकी सटीकता और विश्वसनीयता है। उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी तकनीकी प्रगति से ‘पत्रकारिता’ भी प्रभावित हुई है लेकिन ये मानवीय रचनात्मकता और बुद्धि को पीछे नहीं छोड़ पाएंगी। उन्होंने कहा, “पत्रकारिता की भविष्य की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह एआई की क्षमताओं और मानवीय सहानुभूति के बीच कितना अच्छा संतुलन और तालमेल स्थापित कर पाती है। जहां एआई पत्रकारिता को तेज और अधिक सटीक बनाएगा, वहीं भावनात्मक बुद्धिमत्ता यह सुनिश्चित करेगी कि यह मानवीय और विश्वसनीय बनी रहे।”

राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि पत्रकारिता की असली ताकत सिर्फ सूचना के प्रसार में नहीं बल्कि समाज को सही दिशा में मार्गदर्शन करने, सच्चाई को सामने लाने और लोकतंत्र को मजबूत करने में निहित है। उन्होंने कहा कि गलत सूचना समाज और रक्षा बलों के मनोबल पर गंभीर प्रभाव डालती है। उन्होंने आगे कहा कि पत्रकारिता में सबसे पहले खबर देना महत्वपूर्ण हो सकता है लेकिन सही खबरें देना उससे भी कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “विशेषकर जब विषय रक्षा बलों, राष्ट्रीय सुरक्षा या राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वालों के सम्मान से संबंधित हो, तो हर शब्द राष्ट्रीय जिम्मेदारी बन जाता है। मीडिया को हमेशा सटीकता, निष्पक्षता और तटस्थता को बनाए रखना चाहिए।”

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