बच्चों का बचपन लाइक्स-व्यूज के बीच…………………

इंटरनेट मीडिया की दुनिया में आज बच्चों का बचपन लाइक्स और व्यूज के बीच पलने को मजबूर है। बच्चे के मोबाइल स्क्रालिंग, चैटिंग, रील्स देखने के साथ-साथ रील्स बनाने में मां-बाप की सक्रिय सहभागिता चिंता का विषय बन रही है। इसके कारण 80 प्रतिशत से भी अधिक बच्चों के चित्र अथवा उनके वीडियो इंटरनेट पर […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
रविवार, 5 जुलाई 2026, 08:27 AM 5 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
बच्चों का बचपन लाइक्स-व्यूज के बीच…………………
Photo: UB India News Archive

इंटरनेट मीडिया की दुनिया में आज बच्चों का बचपन लाइक्स और व्यूज के बीच पलने को मजबूर है। बच्चे के मोबाइल स्क्रालिंग, चैटिंग, रील्स देखने के साथ-साथ रील्स बनाने में मां-बाप की सक्रिय सहभागिता चिंता का विषय बन रही है। इसके कारण 80 प्रतिशत से भी अधिक बच्चों के चित्र अथवा उनके वीडियो इंटरनेट पर विद्यमान हैं। इसका अर्थ है कि खेलने, खाने, पढ़ने और कुछ रचनात्मक कार्य करने की उम्र में हम स्वयं ही उन्हें साइबर बुलिंग, आनलाइन शोषण, डिजिटल लत के साथ-साथ निजता के हनन और अनचाहे मानसिक दबाव की ओर घकेल रहे हैं।

विश्व में आज करीब 40 करोड़ बच्चे इंटरनेट का प्रयोग करते हैं। भारत में नौ से तेरह साल के लगभग 76 प्रतिशत बच्चे फेसबुक, इंस्टाग्राम एवं यू-ट्यूब जैसे इंटरनेट मीडिया का प्रयोग केवल समय बिताने के लिए ही नहीं कर रहे, बल्कि वे किड्स इन्फ्लुएंसर बनने की ओर भी अग्रसर हैं। आज अकेले इंस्टाग्राम पर 83 हजार से भी अधिक किड्स इन्फ्लुएंसर सक्रिय हैं। हाल के वर्षों में इनकी संख्या में 41 प्रतिशत से भी अधिक की वृद्धि हुई है।

इंटरनेट मीडिया से संलग्न बच्चे अब केवल रील्स अथवा वीडियो देखने वाले ही नहीं रह गए हैं, बल्कि कंटेंट क्रिएटर और प्रमोशन के लिए ब्रांड भी बन रहे हैं। कंटेंट क्रिएशन से ये लाखों रुपये भी अर्जित कर रहे हैं। सर्वेक्षण बताते हैं कि 2010 के बाद पैदा हुए 37 प्रतिशत बच्चे इंटरनेट मीडिया के क्षेत्र में इन्फ्लुएंसर बनना चाहते हैं। इन बच्चों के एकाउंट, उनकी वीडियो शूटिंग, उसका संपादन तथा इंटरनेट मीडिया पर अपलोड करने के कार्य इन बच्चों के मां-बाप संभालते हैं। यह किड्स डिजिटल इकोनमी केवल एक आर्थिक अवधारणा ही नहीं है, यह बाल अधिकारों, सुरक्षा, गोपनीयता और नैतिकता से जुड़ा मुद्दा भी है।

जब बच्चे इंटरनेट मीडिया पर सक्रिय होते हैं, वीडियो देखते या गेम खेलते हैं, तो वे केवल मनोरंजन ही नहीं, डाटा भी उत्पन्न कर रहे होते हैं। उनके व्यवहार, आदतें, पसंद-नापसंद, रुचियां इन डिजिटल कंपनियों के लिए एक आर्थिक वैल्यू लिए होती हैं। यानी जब कोई बच्चा विडियो देखता है, कोई एप डाउनलोड करता है, गेम खेलता है अथवा आनलाइन कक्षा में भाग लेता है, तो ऐसे समय में उसकी लोकेशन, व्यवहार और उसकी रुचियों से जुड़े डाटा एकत्र किए जाते हैं। डिजिटल कंपनियां इस डाटा का उपयोग मार्केट रिसर्च, विज्ञापनों, व्यावसायिक रणनीतियों के निर्माण तथा एल्गोरिदमिक सिफारिशों के लिए करती हैं। यही वजह है कि बच्चों से जुड़े डाटा की सुरक्षा आज गंभीर चिंता का विषय बन रही है।

यह डिजिटल अर्थव्यवस्था बच्चों को शिक्षा, नवाचार, उद्यमिता और नए वैश्विक अवसरों से जोड़ सकती है, परंतु इस लालच में यदि हमने उनकी डिजिटल सुरक्षा, गोपनीयता और मानसिक स्वास्थ्य की उपेक्षा की तो यह गंभीर चुनौती भी बन सकती है। वर्तमान में इसके संकेत सामने आने भी लगे हैं। आज जब डिजिटल क्रांति की रफ्तार तेज है, ऐसे में संपूर्ण विश्व में यह बहस तेज हो रही है कि हम कहीं बच्चों को डिजिटल बाल श्रमिक तो नहीं बना रहे हैं। इस डिजिटल युग में कारखानों की जगह स्मार्ट फोन और मशीनों की जगह एल्गोरिदम ने ले ली है।

भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में बच्चों पर इंटरनेट मीडिया के बढ़ते दुष्प्रभाव को देखते हुए पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने बच्चों की आनलाइन प्लेटफार्म पर सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए। आस्ट्रेलिया ने अपने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इंटरनेट मीडिया प्रतिबंधित कर दिया है। फ्रांस, स्पेन, डेनमार्क, इंडोनेशिया एवं मलेशिया ने भी किशोरों की आनलाइन सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए हैं। ब्रिटेन भी इसी तरह की योजना बना रहा है। इसे देखते हुए भारत में भी 16 साल से कम उम्र के किशोरों के लिए इंटरनेट मीडिया के प्रयोग पर पाबंदी को लेकर बहस तेज हो रही है। बच्चों के 5-6 घंटे इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म्स पर रहने से उनमें भावनात्मक कमजोरी के साथ-साथ उनकी सोचने और समझने और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता भी लगातार घट रही है।

आनलाइन सुरक्षा से जुड़े कानून बच्चों पर मंडरा रहे साइबर खतरे को नियंत्रित तो कर सकते हैं, परंतु वे समाज को सजग करने का काम नहीं कर सकते। इसके लिए समाज में व्यापक विमर्श की आवश्यकता है। माता-पिता एवं अभिभावकों को समझना पड़ेगा कि बच्चों की वास्तविक सफलता डिजिटल दुनिया में लाइक्स, व्यूज और कंटेंट निर्माण से नहीं आंकी जा सकती। वास्तविक सफलता तो शिक्षा और समाज के जरिये उनके संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास है।

इसलिए विद्यालयों को छात्रों एवं अभिभावकों को डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम का हिस्सा बनाना पड़ेगा। बाल अधिकारों को डिजिटल अधिकारों के साथ जोड़ते हुए डिजिटल कंपनियों की भी जवाबदेही तय करनी पड़ेगी। सरकार, तकनीकी कंपनियां, विद्यालय, अभिभावक और समाज के सभी कल-पुर्जे आपस में तालमेल बैठाते हुए एक ऐसी डिजिटल अर्थव्यवस्था का निर्माण करें, जहां बच्चों को केवल डिजिटल उपभोक्ता या श्रमिक न बनाकर, सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त डिजिटल नागरिक बनाया जा सके।

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी
खास खबर

खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]

UB India News27 अग॰
पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………
खास खबर

पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………

पंजाब में 25 सालों तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान 2020 में यह ढाई दशक पुरानी दोस्ती टूट गई थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज हो गई है. बीजेपी […]

UB India News27 अग॰
अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?
खास खबर

अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव आया है. एक ओर दोनों देश व्यापार, वैश्विक मंचों और बहुपक्षीय संगठनों में साथ दिखते हैं तो दूसरी ओर हिमालयी सीमा पर तनाव ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है. ऐसे वक्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल […]

UB India News27 अग॰
भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..
खास खबर

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या आने वाले कुछ सालों में दोगुनी होकर करीब 3 हजार तक पहुंच सकती है. जापान दौरे पर पहुंचे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जापान की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए तैयार हैं. पीयूष गोयल ने ये भी कहा कि टेक्नोलॉजी की कमी […]

UB India News27 अग॰