राम मंदिर के नाम पर फर्जी रसीद ,गोपाल राव पर भी चढ़ावा चोरी की आंच!

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. पुलिस ने आरोपियों से मंदिर की फर्जी चंदे की रसीद बुक बरामद की है, जिससे दानदाताओं को ठगा जा रहा था. आरोपियों ने चोरी के पैसों से जमीन और गाड़ियां खरीदीं. पुलिस अब उनकी संपत्ति और बैंक खातों की गहनता से जांच कर रही […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 8 जुलाई 2026, 08:26 AM 6 मिनट read
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राम मंदिर के नाम पर फर्जी रसीद ,गोपाल राव पर भी चढ़ावा चोरी की आंच!
Photo: UB India News Archive

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. पुलिस ने आरोपियों से मंदिर की फर्जी चंदे की रसीद बुक बरामद की है, जिससे दानदाताओं को ठगा जा रहा था. आरोपियों ने चोरी के पैसों से जमीन और गाड़ियां खरीदीं. पुलिस अब उनकी संपत्ति और बैंक खातों की गहनता से जांच कर रही है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े गोपाल राव की भूमिका एक बार फिर चर्चा में है. आजतक के पास ट्रस्ट की पुरानी बैठकों और मंदिर परिसर के आयोजनों की एक्सक्लूसिव तस्वीरें मौजूद हैं, जिनमें गोपाल राव लगभग हर अहम बैठक और कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं. हालांकि 6 जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में पहली बार उन्हें शामिल नहीं किया गया.

राम मंदिर दान चोरी मामले में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं. इस बीच राम मंदिर के नाम पर फर्जी रसीद को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. आरोपियों की निशानदेही पर राम मंदिर के नाम पर बनाई गई पुरानी फर्ज़ी चंदे की रसीद बुक बरामद की गई है. सूत्रों के अनुसार पुलिस जांच में आरोपियों ने इस बात को कबूला है कि आरोपी न केवल चंदा चोरी करते थे बल्कि फर्ज़ी रसीद काट कर चंदा देने वालों से पैसे भी ऐंठ लेते थे. आरोपियों के पास से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की पुरानी फर्ज़ी रसीद बुक भी मिली है.
कैसे फर्जी रसीद काटते थे आरोपित
सूत्रों के अनुसार शुरआत में टिन्नू यादव, लव कुश, करुणेश, अनुकल्प और तमाम गिरफ्तार आरोपी से जब कोई मंदिर में दान देने की इच्छा जताता तो ये लोग रिसीविंग के तौर पर ये फर्ज़ी रसीद दे देते थे ताकि किसी को शक न हो. रसीद पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का लोगो भी बना हुआ था. नकली रसीद बिल्कुल असली रसीद की तरह दिखती है. चूंकि अब नई व्यवस्था के तहत रसीद ऑनलाइन मिलती है. इसलिए इन लोगों ने इन रसीदों का प्रयोग करना बंद कर दिया था. राम मंदिर में कागज़ी रसीद व्यवस्था खत्म होने के बाद राम मंदिर बैंक खाते में सीधा पैसा दान देने वाले भेजते थे या मंदिर में आकर दान काउंटर से स्लिप लेते थे.
चंपत राय सवालों के घेरे में
बता दें कि ट्रस्ट की बैठक में पुरानी चोरी पकड़ी जाने पर कार्रवाई नहीं करने पर चंपत राय सवालों के घेरे में हैं. राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद आरोप है कि तत्कालीन महासचिव चंपत राय ने 5 जून को ही चोरी पकड़ ली थी और पुलिस की मदद के कथित चोरी के पैसे भी बरामद कर लिए. इसके बाद भी कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई.
अगर उस वक्त दर्ज हो जाता मुकदमा तो..
बता दें कि समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने ट्वीट कर दान चोरी का मुद्दा उठाया था. इसके बाद जांच शुरू हुई. ट्रस्ट की बैठक में यह भी कहा गया कि अगर उस वक्त मुकदमा दर्ज हो जाता तो शायद विवाद इतना नहीं बढ़ता और समय रहते कानूनी कार्रवाई की जा सकती थी. दरअसल, चंपत राय पर सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि वह ट्रस्ट के प्रभावी सदस्यों में से एक थे.
ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय पर उठे सवाल
ट्रस्ट की बैठक में पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि चढ़ावे की सुरक्षा और उसकी गणना की जिम्मेदारी चंपत राय की थी. ट्रस्ट की मीटिंग में यह भी सवाल उठा कि चंपत राय को तलाशी और बरामदगी का अधिकार किसने दिया और एफआईआर क्यों दर्ज नहीं कराई गई.
गोपाल राव पर भी चढ़ावा चोरी की आंच!

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े गोपाल राव की भूमिका एक बार फिर चर्चा में है. आजतक के पास ट्रस्ट की पुरानी बैठकों और मंदिर परिसर के आयोजनों की एक्सक्लूसिव तस्वीरें मौजूद हैं, जिनमें गोपाल राव लगभग हर अहम बैठक और कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं. हालांकि 6 जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में पहली बार उन्हें शामिल नहीं किया गया.

तस्वीरों के मुताबिक, गोपाल राव ट्रस्ट की बैठकों में आमंत्रित सदस्य के तौर पर मौजूद रहते थे. बैठकों के दौरान वे सिर्फ मौजूद ही नहीं रहते थे, बल्कि कई अहम मुद्दों पर अपनी राय भी रखते थे. सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट के कई अहम फैसलों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उनकी सक्रिय भागीदारी रही है.

रामलला मंदिर में होने वाले बड़े धार्मिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक आयोजनों की जिम्मेदारी भी लंबे समय तक गोपाल राव संभालते रहे. मंदिर परिसर के भीतर होने वाले कई कार्यक्रमों की तैयारियों और संचालन में भी उनकी भूमिका दिखाई देती रही है. आजतक के पास मौजूद तस्वीरों में वे ट्रस्ट के पदाधिकारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों के साथ विभिन्न आयोजनों में नजर आते हैं.

6 जुलाई की बैठक में शामिल नहीं किए गए गोपाल राव

6 जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में स्थिति बदली हुई दिखाई दी. सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में गोपाल राव को आमंत्रित नहीं किया गया. बताया जा रहा है कि अब उन्हें ट्रस्ट की गतिविधियों से अलग कर दिया गया है. हालांकि, ट्रस्ट की तरफ से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.

इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी जांच का दायरा और बढ़ा दिया है. पहले यह जांच श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और धन के दुरुपयोग के आरोपों तक सीमित थी, लेकिन अब एसआईटी पिछले दो वर्षों में ट्रस्ट द्वारा धार्मिक आयोजनों पर हुए खर्च की भी विस्तृत जांच कर रही है.

रामलला प्राण प्रतिष्ठा समारोह और अन्य खर्च की भी जांच

जांच के दायरे में करीब 124 करोड़ रुपये के खर्च शामिल हैं. इनमें सबसे बड़ा हिस्सा जनवरी 2024 में हुए रामलला प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर खर्च हुआ, जिस पर करीब 113 करोड़ रुपये खर्च किए गए. इसके अलावा नवंबर 2025 में हुए ध्वजारोहण समारोह, प्रतिष्ठा द्वादशी और महाकुंभ से जुड़े खर्चों की भी जांच की जा रही है. एसआईटी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सभी खर्च ट्रस्ट के नियमों और तय प्रक्रिया के मुताबिक किए गए थे या नहीं.

गोविंद देव गिरी से गोपाल राव समेत प्रमुख संतों की मुलाकात

अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी से गोपाल राव समेत कई प्रमुख साधु-संतों ने शिष्टाचार मुलाकात की. इस दौरान रामबल्लभ कुंज के अधिकारी संत राजकुमार दास, बड़ा भक्तमाल स्थान के महंत अवधेश दास और रसिक पीठाधीश्वर महंत जनमेजय शरण भी मौजूद रहे. बैठक में धार्मिक परंपराओं, राम मंदिर से जुड़े विभिन्न विषयों और समसामयिक धार्मिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई.

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