धीरज धर्म मित्र अरु नारी, आपद काल परिखिअहिं चारि……………….

श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट विवाद में सबसे बड़े सवाल महासचिव चंपत राय व अनिल मिश्रा को लेकर उठे, अब दोनों का इस्तीफा स्वीकार हो गया है। जांच पूरी होगी, तब चंपत राय को खुद को बेदाग साबित करने का भी मौका मिल सकता है। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट और ट्रस्ट की बैठक में इस्तीफा स्वीकार होने […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 9 जुलाई 2026, 06:26 AM 5 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
धीरज धर्म मित्र अरु नारी, आपद काल परिखिअहिं चारि……………….
Photo: UB India News Archive

श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट विवाद में सबसे बड़े सवाल महासचिव चंपत राय व अनिल मिश्रा को लेकर उठे, अब दोनों का इस्तीफा स्वीकार हो गया है। जांच पूरी होगी, तब चंपत राय को खुद को बेदाग साबित करने का भी मौका मिल सकता है। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट और ट्रस्ट की बैठक में इस्तीफा स्वीकार होने के बाद चंपत राय ने एक चिट्ठी राम भक्तों के नाम लिखी और कहा कि वह जब तक बेदाग साबित नहीं हो जाएंगे, वह मौन रखेंगे इस पर। चिट्ठी में तो उन्होंने नहीं लिखा, पर जब उसे सोशल मीडिया पर डाला, तो गोस्वामी तुलसीदास को याद किया। श्रीरामचरितमानस के अरण्यकांड से विदूषी अनुसुइया को स्मरण करते हुए उन्होंने लिखा- धीरज धर्म मित्र अरु नारी, आपद काल परिखिअहिं चारि।। यानी धैर्य, धर्म, मित्र और पत्नी की परख विपत्ति के समय होती है।

सच ही है कि चंपत राय के लिए यह विपत्ति का समय है और इस समय उन्हें उन लोगों की परख हो रही होगी, जो जमाने से उनके सामने साष्टांग रहते थे। उन लोगों की परख भी हो जाएगी, जिन्होंने उनके विश्वास को तोड़ा। बहुत से लोग अब भी कह रहे हैं कि चंपत राय की ईमानदारी और निष्ठा पर सवाल नहीं खड़े किए जा सकते, लेकिन उनके अहंकार की वजह से यह सब हुआ। वह खुद को ही भगवान जैसा समझने लगे थे। ट्रस्ट और संघ परिवार में कई लोगों ने यह शिकायत की, तो मुझे अनायास अमीर खुसरो याद आ गए- खुसरो दरिया प्रेम का, उल्टी वा की धार। जो उतरा सो डूब गया, जो डूबा सो पार।

खैर, मुद्दा चंपत राय नहीं होना चाहिए। मसला है करोड़ों राम भक्तों और उन लोगों की आस्था का, जिन्होंने आंख मूंदकर भरोसा किया। दरअसल, वह भरोसा ट्रस्ट, आरएसएस या परिषद के लोगों पर नहीं था, वह तो भगवान राम को लेकर उनकी आस्था थी, जिसके लिए बरसों से वे अपने सामर्थ्य से, और उससे भी ज्यादा करने की कोशिश करते रहे। यह तब भी किया, जब बरसों बरस पहले राम मंदिर निर्माण के लिए शिलाएं मंगाई गईं। राम रथयात्रा निकालकर बाबरी मस्जिद के ध्वंस तक कार सेवक अयोध्या तक पहुंचे, कई बार गोलियां भी खाईं, लाठी-डंडे भी खाए। तब तो यह पता भी नहीं था कि मंदिर बनेगा या नहीं? वे उस दिन नाराज भी नहीं हुए, जब राम मंदिर का शिला पूजन किया गया और उन्हें अयोध्या पहुंचने से रोक दिया गया। वह तब भी नाराज नहीं हुए, जब राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा को देश के सबसे अमीर, शक्तिशाली व नामचीन लोगों के भव्य समारोह में बदल दिया गया और उन्हें टीवी पर कार्यक्रम देखने की सलाह दी गई।

यह भी सच यहां लिखना जरूरी लगता है कि प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए ज्यादातर लोग किसी आंदोलन में शरीक नहीं हुए थे, बल्कि ऐसा लगा कि आंदोलन से जुड़े कई लोगों को दूर रखने की कोशिश की गई। जो लोग उस भव्य समारोह में शामिल हुए, इतनी बड़ी चढ़ावा-चोरी और जमीन व निर्माण से जुड़े सवालों पर ऐसे चुप्पी साध गए, मानो उनका कोई इससे रिश्ता न हो। मेरे एक मित्र ने कहा, आम आदमी की चुप्पी को वोटों की गूंज में बदलते देर नहीं लगती।

यहां मैं उन बातों का जिक्र नहीं करना चाहता, जो सामने आ गई हैं, यानी करोड़ों रुपये की चढ़ावा चोरी और उसकी अनदेखी, जमीनों की महंगी खरीद, निर्माण में कमीशनखोरी के आरोप आदि। सवाल तो यह भी है कि ट्रस्ट को आरटीआई से दूर क्यों रखा गया, जबकि दूसरे धार्मिक ट्रस्ट उसके तहत आते हैं? ट्रस्ट को एक परिवार का ट्रस्ट जैसा क्यों बनाया गया? क्यों जरूरी एहतियातों का ध्यान नहीं रखा गया? बात उठती है, तो दूर तलक जाती है। अब इस मंदिर के लिए आए चढ़ावे और चंदे के साथ-साथ उसके खर्च का हिसाब जारी करना काफी नहीं। यह देखा जाना चाहिए कि क्या यह खर्च सही है? प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के लिए 113 करोड़ रुपये का खर्च या रोजाना के काम में सैकड़ों करोड़ खर्च हुए, इसका हिसाब कौन देगा? भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सबसे जरूरी कदम है पारदर्शिता, जो अब भी नहीं दिख रही। इस तरह की चुप्पी संदेह को गहरा ही करती है।

सवाल करने वालों को रामद्रोही कहने से काम नहीं चलेगा और न ही उन लोगों को खारिज किया जा सकता है, जो राम मंदिर दर्शन के लिए अयोध्या नहीं गए। यह सिर्फ अपनी राजनीति चमकाने का सवाल है। वैसे देश भर के 100 करोड़ से ज्यादा हिंदुओं में से अब तक करीब तीस करोड़ लोगों ने ही दर्शन किए हैं, तो क्या बाकी लोगों को आप रामद्रोही करार दे रहे हैं? इनमें से अनगिनत तो हर दिन राम की माला जपते हैं!

इस पूरे प्रकरण का राजनीतिक असर क्या होगा, इस पर फिर कभी चर्चा करेंगे, पर सामाजिक सवालों के जवाब बहुत जरूरी हैं और उन अपराधों के दोषियों तक पहुंचना भी जरूरी है, जिन्हें ‘धर्म पर हमले’ का बहाना बनाकर बचाने की कोशिश हो रही है। यह धर्म से बड़ा अपराध का मामला है, और जिन्हें हिंदू धर्म की ज्यादा चिंता है, वे एक बार फिर से हिंदू धर्म की व्याख्या पढ़ लें। यहां कबीर याद आ रहे हैं- जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं­ नाहि।

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी
खास खबर

खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]

UB India News27 अग॰
पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………
खास खबर

पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………

पंजाब में 25 सालों तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान 2020 में यह ढाई दशक पुरानी दोस्ती टूट गई थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज हो गई है. बीजेपी […]

UB India News27 अग॰
अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?
खास खबर

अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव आया है. एक ओर दोनों देश व्यापार, वैश्विक मंचों और बहुपक्षीय संगठनों में साथ दिखते हैं तो दूसरी ओर हिमालयी सीमा पर तनाव ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है. ऐसे वक्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल […]

UB India News27 अग॰
भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..
खास खबर

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या आने वाले कुछ सालों में दोगुनी होकर करीब 3 हजार तक पहुंच सकती है. जापान दौरे पर पहुंचे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जापान की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए तैयार हैं. पीयूष गोयल ने ये भी कहा कि टेक्नोलॉजी की कमी […]

UB India News27 अग॰