स्वदेशी युद्धपोत महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े में हुआ शामिल ,क्यों खास आईएनएस महेंद्रगिरि ……

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े में छठे प्रोजेक्ट 17ए स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट महेंद्रगिरि को शामिल किया। यह कार्यक्रम विशाखापत्तनम के नौसेना डॉकयार्ड में वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित हुआ। इससे पहले, रक्षा मंत्री ने इस अवसर को देश और भारतीय नौसेना के लिए एक गर्व […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शनिवार, 11 जुलाई 2026, 07:56 AM 8 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
स्वदेशी युद्धपोत महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े में हुआ शामिल ,क्यों खास आईएनएस महेंद्रगिरि ……
Photo: UB India News Archive

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े में छठे प्रोजेक्ट 17ए स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट महेंद्रगिरि को शामिल किया। यह कार्यक्रम विशाखापत्तनम के नौसेना डॉकयार्ड में वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित हुआ। इससे पहले, रक्षा मंत्री ने इस अवसर को देश और भारतीय नौसेना के लिए एक गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बना यह आधुनिक युद्धपोत हमारे आत्मनिर्भर भारत के सपने और घरेलू रक्षा उद्योगों की ताकत का एक बड़ा प्रमाण है।

INS महेंद्रगिरि स्वदेशी अत्याधुनिक हथियारों, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम से लैस है। यह हवाई हमलों, दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों से एक साथ मुकाबला करने में सक्षम है। यह हिंद महासागर में भारत की समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करेगा।

राजनाथ सिंह ने कहा कि आंध्र प्रदेश के कुरनूल में आठ ड्रोन कंपनियों के समूह के साथ ‘ड्रोन सिटी’ विकसित की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह सूरत ‘डायमंड सिटी’ और बेंगलुरु ‘सिलिकॉन वैली’ के नाम से जाना जाता है, उसी तरह आने वाले समय में कुरनूल देश का ड्रोन हब बनेगा।

INS महेंद्रगिरि की खासियत

  • 75% से ज्यादा स्वदेशी तकनीक: इसे भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है और मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने तैयार किया है। युद्धपोत में 75% से ज्यादा स्वदेशी उपकरण और तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसके निर्माण में देशभर की कई MSME कंपनियों ने भी योगदान दिया है, जिससे रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।
  • मॉडर्न हथियारों से लैस: महेंद्रगिरि में आधुनिक सरफेस-टू-सरफेस और सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर सिस्टम और इंटीग्रेटेड कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगाए गए हैं।
  • स्टेल्थ तकनीक और हाई-स्पीड क्षमता: महेंद्रगिरि में उन्नत स्टेल्थ तकनीक दी गई है, जिससे इसकी रडार पर पहचान करना मुश्किल होगा। इसमें कम्बाइंड डीजल और गैस (CODOG) प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है, जो इसे लंबी दूरी तक तेज गति से संचालन की क्षमता देता है।
  • इस युद्धपोत को भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है।
  • इसका निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, मुंबई ने किया है।
  • महेंद्रगिरि में उन्नत स्टील्थ विशेषताएं, रडार से बचने की क्षमता और उच्च स्तर का ऑटोमेशन (स्वचालन) शामिल है।
  • यह युद्धपोत हवा, सतह और पानी के अंदर होने वाले हमलों का मुकाबला करने के लिए आधुनिक स्वदेशी हथियारों, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों से लैस है।
  • समुद्री सुरक्षा अभियानों, खोज और बचाव कार्यों, मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों में भी पूरी तरह सक्षम है।
  • यह हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे भी लंबे समय तक तैनात रहने की क्षमता रखता है।

पूर्वी घाट की पर्वत श्रृंखला पर रखा गया नाम
इस युद्धपोत का नाम पूर्वी घाट की महेंद्रगिरि पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया है। भारतीय नौसेना के इतिहास में इस नाम का यह पहला युद्धपोत है, जो अपने आप में अनूठा है। इस युद्धपोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। इसके निर्माण में एमएसएमई (MSMEs) सहित कई भारतीय उद्योगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे देश के रक्षा आधार को मजबूती मिली है और रोजगार पैदा हुए हैं। इस युद्धपोत का आदर्श वाक्य शक्तिशाली-भव्य-अतुलनीय (Mighty-Majestic-Matchless) है।

अब जानिए प्रोजेक्ट 17A के बारे में…

प्रोजेक्ट-17A (Project 17A) के तहत भारतीय नौसेना के लिए कुल 7 स्टेल्थ गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं। इनमें से 4 युद्धपोत मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स मुंबई बना रहा है। 3 युद्धपोत गार्डन रीच शिप बिल्डर्स कोलकाता बना रहा है।

प्रोजेक्ट-17A, प्रोजेक्ट-17 (शिवालिक क्लास) का एडवांस्ड वर्जन है। इसमें पहली बार भारत में बड़े युद्धपोतों के निर्माण में इंटीग्रेटेड कंस्ट्रक्शन (ब्लॉक निर्माण) तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। इसमें जहाज के अलग-अलग हिस्से पहले तैयार किए जाते हैं और बाद में उन्हें जोड़कर पूरा युद्धपोत बनाया जाता है। इससे निर्माण का समय कम होता है और गुणवत्ता बेहतर रहती है।

रक्षा मंत्री ने क्या कहा?
इससे पहले, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शुक्रवार शाम को ही विशाखापत्तनम पहुंच गए थे। हवाई अड्डे पर नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने उनका स्वागत किया। रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा कि महेंद्रगिरि भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के हमारे संकल्प को मजबूत करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस युद्धपोत के शामिल होने से भारतीय नौसेना की ताकत और बढ़ेगी। यह भारत को युद्धपोत निर्माण में अग्रणी देश के रूप में स्थापित करता है। भारत हिंद महासागर क्षेत्र में पसंदीदा सुरक्षा भागीदार के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है। इस पर ब्रह्मोस मिसाइल की तैनाती भी की जा सकती है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में विशाखापत्तनम में आयोजित एक कार्यक्रम में आईएनएस महेंद्रगिरी पोत का जलावतरण हुआ। इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने कहा कि इस पोत में इस्तेमाल 75% सामग्री स्वदेशी है। आईएनएस महेंद्रगिरी पूरी तरह अभेद्य है। इस दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि इस पोत पर ब्रह्मोस मिसाइल को भी तैनात किया जा सकता है।

‘नौसेना, देश के आर्थिक हितों की भी रक्षक बनकर उभरी’
रक्षा मंत्री ने कहा कि आंध्र प्रदेश अब देश के रक्षा और एयरोस्पेस निर्माण क्षेत्र में एक नई ताकत बनकर उभरा है। उन्होंने यह भी बताया कि आईएनएस महेंद्रगिरि हवा, समुद्र और पानी के नीचे से आने वाले खतरों से एक साथ निपटने में सक्षम है। रक्षा मंत्री ने कहा कि एक सक्षम और तेजी से प्रतिक्रिया देने वाली नौसेना किसी भी देश के लिए जरूरी है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा के तहत 9 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत का जरूरी सामान लेकर जा रहे व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया। इससे साबित होता है कि नौसेना देश के आर्थिक हितों की भी मजबूत रक्षक बनकर उभरी है।

राजनाथ सिंह ने कहा, हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना भारत की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि देश का 90 प्रतिशत से अधिक व्यापार समुद्री मार्गों से होता है, इसलिए समुद्री सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है।
  • आईएनएस महेंद्रगिरि 17ए का छठा स्टील्थ फ्रिगेट है। पूर्वी घाट की पर्वत श्रृंखला के नाम पर इसका नाम आईएनएस महेंद्रगिरि रखा गया है। इसे भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है। इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा किया गया है। यह फ्रिगेट रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता का बेहतरीन सबूत है क्योंकि इसमें 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी हैं।
  • प्रोजेक्ट 17ए के तहत भारतीय नौसेना के लिए कुल सात स्टील्थ गाइडेड युद्धपोत बनाए जा रहे हैं। इनमें से चार युद्धपोत मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स मुंबई में और तीन पोत गार्डन रीच शिपबिल्डर्स कोलकाता में बन रहे हैं।
  • इस प्रोजेक्ट के तहत अब तक नौसेना को आईएनएस नीलगिरि, आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस हिमगिरि, आईएनएस तारागिरि, आईएनएस दुनागिरि नौसेना में शामिल हो चुके हैं। अब आईएनएस महेंद्रगिरि भी नौसेना को मिल चुका है। अब 17ए प्रोजेक्ट के तहत नौसेना को एक और युद्धपोत मिलना बाकी है।
  • आईएनएस महेंद्रगिरि की लंबाई करीब 149 मीटर है और इसका वजन करीब 6670 टन है। यह 28 नॉटिकल प्रतिघंटे की रफ्तार से चल सकता है। इस पर करीब 225-230 नौसैनिक और अधिकारी तैनात रह सकते हैं।
  • इस युद्धपोत को बराक-8 एयर डिफेंस सिस्टम, 76 एमएम की नौसैनिक तोप, टॉरपीडो और एंटी सबमरीन रॉकेट से लैस किया जा सकता है। साथ ही इसमें एडवांस्ड रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉर सिस्टम लगे हैं।
  • इस पर एमएच-60आर जैसे नौसैनिक हेलीकॉप्टर भी तैनात रह सकते हैं। इस युद्धपोत को ब्रह्मोस मिसाइल से भी लैस करने की तैयारी है।
  • आईएनएस महेंद्रगिरि में दुश्मन के रडार से बचने की खास तकनीक, बेहतर सुरक्षा क्षमता और ज्यादा ऑटोमेशन जैसी सुविधाएं दी गई हैं।
  • महेंद्रगिरि में स्वदेशी हथियार, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली लगाई गई है। इसके अलावा यह समुद्री सुरक्षा अभियान, खोज और बचाव कार्य, आपदा राहत और मानवीय सहायता जैसे काम करने में भी सक्षम है। इसे ब्रह्मोस मिसाइल से लैस करने पर भी विचार किया जा रहा है।
  • आईएनएस महेंद्रगिरि हिंद महासागर में भारत की समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करेगा। साथ ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को सुरक्षित और स्थिर बनाने में भी भूमिका निभाएगा।
UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी
खास खबर

खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]

UB India News27 अग॰
पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………
खास खबर

पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………

पंजाब में 25 सालों तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान 2020 में यह ढाई दशक पुरानी दोस्ती टूट गई थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज हो गई है. बीजेपी […]

UB India News27 अग॰
अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?
खास खबर

अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव आया है. एक ओर दोनों देश व्यापार, वैश्विक मंचों और बहुपक्षीय संगठनों में साथ दिखते हैं तो दूसरी ओर हिमालयी सीमा पर तनाव ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है. ऐसे वक्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल […]

UB India News27 अग॰
भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..
खास खबर

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या आने वाले कुछ सालों में दोगुनी होकर करीब 3 हजार तक पहुंच सकती है. जापान दौरे पर पहुंचे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जापान की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए तैयार हैं. पीयूष गोयल ने ये भी कहा कि टेक्नोलॉजी की कमी […]

UB India News27 अग॰