भारत और नेपाल में सुस्ता विवाद क्या है?

भारत और नेपाल के बीच सुस्ता क्षेत्र को लेकर चला आ रहा तनाव एक बार फिर गहराने लगा है। हाल ही में दोनों देशों के बीच यह मुद्दा गरम हुआ, जब इस महीने की शुरुआत में नेपाल की बालेन सरकार ने एक आदेश जारी कर इस इलाके में नेपाली सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ा दी। […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 13 जुलाई 2026, 08:45 AM 4 मिनट read
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भारत और नेपाल में सुस्ता विवाद क्या है?
Photo: UB India News Archive

भारत और नेपाल के बीच सुस्ता क्षेत्र को लेकर चला आ रहा तनाव एक बार फिर गहराने लगा है। हाल ही में दोनों देशों के बीच यह मुद्दा गरम हुआ, जब इस महीने की शुरुआत में नेपाल की बालेन सरकार ने एक आदेश जारी कर इस इलाके में नेपाली सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ा दी। इसके कुछ दिनों बाद ही नेपाली सेना की एक टीम यहां सादे कपड़ों में पहुंची, जिसका नेतृत्व मेजर जनरल यम बहादुर ने किया।

नेपाली मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल की सैन्य टीम को भारत की बॉर्डर फोर्स के विरोध का सामना करना पड़ा था। नेपाल बॉर्डर की रक्षा करने वाले सशस्त्र सीमा बल के जवानों ने नेपाली सैन्य टीम को रोककर पूछताछ भी की थी। इसके बाद भारत ने नेपाल के विदेश मंत्रालय ने भी इसे लेकर सवाल पूछा।

सुस्ता को लेकर तनाव की शुरुआत मई के आखिर में हुई, भारतीय सशस्त्र सीमा बल के जवानों ने गंडक नदी के किनारे तटबंध के काम पर आपत्ति जताई थी। पिछले महीने एक बार फिर भारतीय जवान पहुंचे और तटबंध के पूर्वी हिस्से पर काम रोक दिया। इसके बाद नेपाल की बालेन सरकार ने इलाके में सुरक्षा तैनाती बढ़ाने का आदेश दे दिया।

सुस्ता को लेकर क्या है विवाद?
भारत और नेपाल के बीच सुस्ता कई दशकों से एक संवेदनशील इलाका रहा है। यह क्षेत्र भारत के बिहार राज्य के पश्चिमी चंपारण और नेपाल के नवलपरासी जिले के बीच गंडक नदी के किनारे स्थित है। यह नदी नेपाल में नारायणी के नाम से जानी जाती है। नेपाल का दावा है कि यह इलाका पहले नेपाल के हिस्से में हुआ करता था, जहां तत्कालीन राजा महेंद्र ने 1965 में 400 परिवारों को बसाया था। लेकिन 1977 में गंडक नदी के रास्ता बदलने से यहां पर मौजूद बस्ती उजड़ गई।

फरार अपराधी ने कैसे दिलाया नेपाल को कब्जा
हालांकि, सुस्ता के बड़े इलाके पर नेपाल का कब्जा है, लेकिन इस कब्जे की कहानी भारतीय अपराधी मुन्ना खान से जुड़ी है। 1977 में नदी के रास्ता बदलने के बाद इलाके में छोटे-छोटे गिरोह उभर आए जो जमीनों पर कब्जा करने लगे। मुन्ना खान उनमें से ही एक था। उसके परिवार ने इलाके में काफी जमीन पर कब्जा कर लिया। उसे नेपाल के स्थानीय राजनेताओं से शह मिल रही थी। मुन्ना खान ने इसी जमीन पर कब्जा बरकरार रखने के लिए 1983 में वाल्मीकिनगर के तत्कालीन दारोगा की गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद उसने सुस्ता के इलाके पर नेपाल को कब्जा दिलाना शुरू कर दिया है।

नेपाल भी मुन्ना को नहीं मानता नागरिक
मुन्ना खान के साथ दिलचस्प वाकया है कि उसने जमीन पर कब्जे के लिए देश से गद्दारी की लेकिन आज भी उसे नेपाल ने नागरिकता नहीं दी है। मुन्ना खान और उसके साथ के कई सुस्ता वाले आज भी नेपाल की नागरिकता पाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं।

नेपाली पीएम ने स्वीकारी कब्जे की बात
नेपाल के पीएम बालेंद्र शाह ने हाल ही में यह स्वीकार किया था कि नेपाल ने भी भारत की जमीन पर कब्जा किया है। 31 मई को प्रतिनिधि सभा में एक सवाल का जवाब देते हुए शाह ने कहा, प्रधानमंत्री बनने के बाद मुझे पता चला कि केवल भारत ने ही नहीं, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर कब्जा किया है। दोनों पक्षों को इस मामले पर गौर करने की जरूरत है। उनके इस बयान पर नेपाल में काफी हंगामा मचा था और इसे भारत के सामने काठमांडू की स्थिति कमजोर करने वाला बताया था।

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