क्या प्रायश्चित करने से धुल जाएंगे पाप?

श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज ने साफ कह दिया है कि वह पद से इस्तीफा नहीं देंगे. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से यह खबर मीडिया में चलाई जा रही है मैं ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाला हूं, जबकि सच तो ये है कि मैंने ऐसा कभी […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
मंगलवार, 14 जुलाई 2026, 09:13 AM 5 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
क्या प्रायश्चित करने से धुल जाएंगे पाप?
Photo: UB India News Archive

श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज ने साफ कह दिया है कि वह पद से इस्तीफा नहीं देंगे. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से यह खबर मीडिया में चलाई जा रही है मैं ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाला हूं, जबकि सच तो ये है कि मैंने ऐसा कभी कहा ही नहीं और न ही कहूंगा. मैं छत्रपति शिवाजी महाराज का अनुयायी हूं, भागने वालों में से नहीं हूं.

गोविंद देव गिरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि यह घटना हमारे लिए बड़ा झटका है और शर्म की बात है, क्योंकि यह भगवान श्रीराम के मंदिर में हुई है. इसके लिए हम स्वयं को जिम्मेदार मानते हैं. ऐसा नहीं होना चाहिए था लेकिन प्रायश्चित के रूप में मैं इस्तीफा नहीं दूंगा बल्कि ऐसी गलतियां दोबारा न हों, इसके लिए व्यवस्था को और मजबूत करेंगे. मैंने अपना जप बढ़ा दिया है और प्रायश्चित के कई अन्य तरीके भी हैं.

जनता का विश्वास फिर से कायम करेंगे
उन्होंने कहा कि देशभर के लोगों का विश्वास दोबारा कायम किए बिना हम चैन से नहीं बैठेंगे. कोषाध्यक्ष होने के नाते रोज प्रायश्चित कर रहा हूं. जाप कर रहा हूं. मंदिर में 70 पंडित 10 दिन का अनुष्ठान करेंगे. गोविंद देव गिरी ने कहा कि चंपत राय की लापरवाही इस पूरे मामले की वजह बनी. कोषाध्यक्ष के रूप में कोष में आने वाले धन का हिसाब-किताब और खर्च पर नियंत्रण रखना मेरी जिम्मेदारी है. इसी काम के लिए अकाउंटेंट नियुक्त किए गए हैं, जो हर महीने खातों की जांच करते हैं.

गोविंद गिरी की PC की बड़ी बातें

  1. राम मंदिर में हुई कथित चोरी के मामले में एसआईटी जांच चल रही है, जिससे मैं संतुष्ट हूं. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है, उससे भी मैं संतुष्ट हूं. चंपत राय ने अपना इस्तीफा स्वयं दिया है. इस्तीफा दिए जाने के बाद उसे स्वीकार किया जाता है.
  2. दान के रूप में आने वाले धन के संग्रहण से मेरा कोई सीधा संबंध नहीं था. स्थानीय ट्रस्टी यह काम देख रहे थे. आय-व्यय की जिम्मेदारी मैं स्वीकार करता हूं. यह व्यवस्था केवल ट्रस्ट के भरोसे नहीं थी, बल्कि एसबीआई की ओर से कर्मचारी नियुक्त किए गए थे.
  3. एसबीआई देश की प्रतिष्ठित बैंक है, इसलिए हमने उस पर विश्वास किया. मेरी ओर से कोई गलत बयान न जोड़ा जाए. जो हुआ वह अपराध है और मुझे उसका गहरा दुख है. इस घटना से शर्म के कारण मेरा सिर झुक गया है. दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए.
  4. मैं 1993 से पुणे के इसी निवास स्थान पर रह रहा हूं. यहां कुल 10 प्लॉट हैं, जिनमें से 3 जगह लोगों का निवास है और 5 संस्थानों की संपत्ति है. एक बैंक अकाउंट को छोड़कर मेरे नाम पर कोई संपत्ति नहीं है. मीडिया में मेरे बारे में गलत खबरें चलाई गईं.
  5. राम मंदिर चोरी मामले में जिनकी जिम्मेदारी बनती है, उन्हें अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए. दानपेटी की गिनती के दौरान सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे, लेकिन चोरी करने वालों ने कैमरों की आड़ लेकर वारदात को अंजाम दिया.
  6. चोरी की रकम को लेकर बढ़ा-चढ़ाकर आंकड़े बताए जा रहे हैं. मेरी जानकारी के अनुसार यह राशि लगभग 3 करोड़ रुपये के आसपास हो सकती है. इससे अधिक बताए जा रहे आंकड़े गलत हैं. इस पूरे मामले में मेरी कोई भूमिका नहीं है.
  7. राम मंदिर चोरी मामले का किसी भी राजनीतिक दल या संगठन से कोई संबंध नहीं है. सांसदों को तोड़ने या राजनीतिक आरोपों से जुड़े सवाल पर कहा कि ऐसे आरोप पूरी तरह निराधार हैं और मैं उन्हें स्वीकार नहीं करता.
  8. हमने 2,926 वस्तुओं का पूरा विवरण सार्वजनिक किया है. इनमें बहुमूल्य हार, पादुका और अन्य कीमती वस्तुएं शामिल हैं. सिंधी समाज की ओर से यह सवाल उठाया गया कि उनकी ओर से दान की गई 200 सोने की ईंटें कहां गईं. इस संबंध में हमें उनका पत्र मिला था, जिसका हमने जवाब दिया. बाद में सिंधी समाज ने भी हमें पत्र लिखकर कहा कि उनसे यह बात भूलवश कही गई थी.
  9. दान की गिनती के दौरान अंदर जाने वाले लोगों के लिए ड्रेस कोड लागू किया गया है. अब CCTV कैमरे बंद नहीं किए जा सकेंगे. पहले मेज पर बैठकर नकदी की गिनती होती थी, उस व्यवस्था में भी बदलाव किया जाएगा. साथ ही बाहर निकलने वाले प्रत्येक व्यक्ति की तलाशी भी ली जाएगी.
  10. गोविंद देव गिरी ने कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट अंतिम सत्य नहीं होती. एसआईटी को अपने निष्कर्षों को सबूतों के आधार पर सिद्ध करना होगा, उसके बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी.
UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी
खास खबर

खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]

UB India News27 अग॰
पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………
खास खबर

पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………

पंजाब में 25 सालों तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान 2020 में यह ढाई दशक पुरानी दोस्ती टूट गई थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज हो गई है. बीजेपी […]

UB India News27 अग॰
अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?
खास खबर

अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव आया है. एक ओर दोनों देश व्यापार, वैश्विक मंचों और बहुपक्षीय संगठनों में साथ दिखते हैं तो दूसरी ओर हिमालयी सीमा पर तनाव ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है. ऐसे वक्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल […]

UB India News27 अग॰
भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..
खास खबर

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या आने वाले कुछ सालों में दोगुनी होकर करीब 3 हजार तक पहुंच सकती है. जापान दौरे पर पहुंचे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जापान की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए तैयार हैं. पीयूष गोयल ने ये भी कहा कि टेक्नोलॉजी की कमी […]

UB India News27 अग॰