क्या इस बार पास होगा परिसीमन बिल?

20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में एक बार फिर संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 यानी परिसीमन बिल को पास कराने की कोशिश होगी. अप्रैल 2026 के बजट सत्र में यह बिल 54 वोटों से गिर गया था. लेकिन पिछले तीन महीनों में संसद का पूरा राजनीतिक गणित बदल गया […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 17 जुलाई 2026, 11:54 AM 6 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
क्या इस बार पास होगा परिसीमन बिल?
Photo: UB India News Archive

20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में एक बार फिर संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 यानी परिसीमन बिल को पास कराने की कोशिश होगी. अप्रैल 2026 के बजट सत्र में यह बिल 54 वोटों से गिर गया   था. लेकिन पिछले तीन महीनों में संसद का पूरा राजनीतिक गणित बदल गया है. विपक्षी गठबंधन में दरारें आ चुकी हैं, 37 सांसद चार अलग-अलग विपक्षी दलों से तोड़कर सत्ता पक्ष में आ गए हैं और कुछ क्षेत्रीय दल शर्तों के साथ समर्थन को तैयार हैं.

क्या है 131वां संशोधन बिल और क्यों है विवादित?

यह बिल दो बड़े काम करता है:

  • लोकसभा की सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 तक करना
  • 33 फीसदी महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को परिसीमन के बाद लागू करने का संवैधानिक आधार तैयार करना.

बिल के मुताबिक, हर एक राज्य में उसकी जनसंख्या के अनुपात में सीटों का सिद्धांत वापस लाया जाएगा. विवाद इसलिए है क्योंकि तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे दक्षिणी राज्यों को डर है कि   जनसंख्या के आधार पर सीटें बढ़ाने से उनकी सियासी ताकत घट जाएगी. जिन राज्यों ने जनसंख्या कंट्रोल में सफलता पाई है, वे अपने प्रतिनिधित्व में कमी से परेशान हैं.

अप्रैल 2026: जब बिल गिर गया था

17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में वोटिंग हुई. कुल 528 सांसदों ने वोट डाले. संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोट चाहिए थे. सरकार को 298 वोट मिले, जबकि विरोध में 230 वोट पड़े. यानी 54 वोट कम   पड़ गए थे.

कांग्रेस, TMC, DMK, शिवसेना (UBT), NCP (शरद पवार), सपा, RJD और वाम दल ने साथ मिलकर बिल को हराया. DMK प्रमुख एम.के. स्टालिन ने बिल की हार को ‘तमिलनाडु की जीत’ करार दिया था.

तीन महीनों में कौन से बड़े बदलाव हुए?

अप्रैल से अब तक संसद का गणित पूरी तरह पलट चुका है. यह 1985 के दल-बदल कानून के बाद सबसे बड़ा दल-बदल है. 37 सांसद  चार विपक्षी दलों से तोड़कर सत्ता पक्ष में आ गए हैं.

  • TMC का बंटवारा: ममता बनर्जी की पार्टी के 20 सांसदों ने बगावत कर दी और नेशनल कॉमन पीपुल्स इनिशिएटिव (NCPI) नाम की नई पार्टी बनाकर NDA को समर्थन दे दिया.
  • शिवसेना (UBT) का कमजोर होना: उद्धव ठाकरे के गुट के 6 सांसद एकनाथ शिंदे के खेमे में शामिल हो गए.
  • AAP का विलय: आम आदमी पार्टी के 7 सांसद बीजेपी में विलय हो गए.

इन बदलावों के बाद NDA की ताकत 292 से बढ़कर 329 हो गई है. लोकसभा में फिलहाल तीन सीटें खाली हैं, इसलिए दो-तिहाई का आंकड़ा घटकर 360 हो गया है. यानी NDA अब 360 के आंकड़े से महज 31 वोट दूर है. अप्रैल में यह अंतर 62 वोट था.

‘मिशन 360’: कहां से मिलेंगे बाकी के वोट?

केंद्र सरकार ने ‘मिशन 360’ का नाम दिया है, यानी दो-तिहाई बहुमत हासिल करना. NDA की निगाहें कई विपक्षी दलों पर हैं:

  • DMK ने कांग्रेस से नाता तोड़ा: पार्टी ने कांग्रेस के करीब बैठना भी स्वीकार नहीं किया और INDIA गठबंधन की बैठक का बहिष्कार किया. स्टालिन ने अपने सांसदों को साफ कह दिया, ‘पार्टी की विचारधारा और तमिलनाडु के हित राजनीतिक गठबंधनों से पहले आएंगे.’ वे इश्यू-बेस्ड समर्थन पर विचार करेंगे. सरकार को उम्मीद है कि अगर ‘सभी राज्यों में 50 फीसदी सीट बढ़ाने’ की गारंटी बिल में शामिल की जाए, तो DMK समर्थन कर सकता है.
  • NCP (शरद पवार) 8 सांसद: सुप्रिया सुले ने साफ किया है कि अगर सरकार हर राज्य में 50 फीसदी सीट बढ़ाने की लिखित गारंटी दे, तो NCP समर्थन पर विचार कर सकती है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा, ‘हमारे पास बिल का टेक्स्ट नहीं है. जब होगा, 24 घंटे में जवाब देंगे.’ NCP ने अभी कोई आधिकारिक रुख नहीं अपनाया है.
  • शिवसेना (UBT) को कशमकश: संजय राउत ने कहा है कि अगर सरकार विपक्ष के संशोधनों को शामिल करती है, तो वे पुनर्विचार कर सकते हैं.
  • DMK और NCP(SP) का साथ: एकसाथ दोनों का समर्थन मिल जाए, तो NDA की संख्या 329 से बढ़कर 359 हो जाएगी. BJD और YSRCP जैसे कुछ और क्षेत्रीय दलों के समर्थन से 360 का आंकड़ा पार किया जा सकता है.

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने दावा किया, ‘अब NDA के पास दो-तिहाई बहुमत है. महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पास हो जाएं’.

विपक्ष की रणनीति: बिल को गिराने की कोशिश

विपक्षी गठबंधन INDIA अब पहले जैसा एकजुट नहीं रहा. TMC बंट चुकी है, शिवसेना (UBT) कमजोर हुई है, DMK कांग्रेस से अलग हो गया है और NCP (शरद पवार) समर्थन की शर्त रख रही है.

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सभी दलों की बैठक बुलाने की मांग की है. खरगे कहा, ‘131वां संशोधन बिल अप्रैल में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा. अब सरकार संशोधित बिल ला रही है, जिसे देखे बिना कोई फैसला नहीं लिया जा सकता.’

विपक्ष के लिए तत्काल उद्देश्य NDA को 360-वोट की सीमा से नीचे रखना है. अगर NDA दो-तिहाई समर्थन हासिल करने में विफल रहती है, तो संविधान संशोधन एक बार फिर गिर जाएगा. संसद में:

  • 19 जुलाई: सर्वदलीय बैठक
  • 20 जुलाई: मानसून सत्र शुरू
  • 21 जुलाई: NDA संसदीय दल की बैठक (प्रधानमंत्री मोदी संबोधित करेंगे)
  • 13 अगस्त: सत्र समाप्त

तो क्या मानसून सत्र में परिसीमन बिल पास होगा या नही?

चार बड़े बदलाव समीकरण को पूरी तरह बदल रहे हैं:

  • संख्यात्मक बदलाव: NDA अब 329 सांसदों के साथ 360 के आंकड़े से महज 31 वोट दूर है.
  • राजनीतिक बदलाव: TMC, शिवसेना (UBT) और AAP में बगावत/विलय से NDA मजबूत हुई है.
  • सामरिक बदलाव: NCP(SP) और DMK के शर्तों के साथ समर्थन से NDA और करीब आ सकती है.
  • बिल का फॉर्मूला: सरकार ‘सभी राज्यों में 50 फीसदी सीट बढ़ाने’ की गारंटी देकर दक्षिणी राज्यों की चिंता दूर करने की कोशिश कर रही है.

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अब अगर NDA DMK के 22 और NCP(SP) के 8 सांसद अपने साथ ला पाई, तो बिल पास हो सकता है. अगर नहीं तो यह सत्र अप्रैल 2026 की तरह ही निराशाजनक साबित हो सकता है. विपक्ष के लिए तत्काल उद्देश्य NDA को 360-वोट की सीमा से नीचे रखना है. भले ही सत्ता गठबंधन सबसे बड़ा गुट बनकर उभरे, लेकिन दो-तिहाई समर्थन हासिल करने में विफल रहने से संविधान संशोधन को पारित होने से रोका जा सकेगा.

20 जुलाई से शुरू हो रहा है यह बड़ा खेल और इसके नतीजे आने वाले दशकों के चुनावी नक्शे को फिर से लिखेंगे.

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी
खास खबर

खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]

UB India News27 अग॰
पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………
खास खबर

पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………

पंजाब में 25 सालों तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान 2020 में यह ढाई दशक पुरानी दोस्ती टूट गई थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज हो गई है. बीजेपी […]

UB India News27 अग॰
अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?
खास खबर

अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव आया है. एक ओर दोनों देश व्यापार, वैश्विक मंचों और बहुपक्षीय संगठनों में साथ दिखते हैं तो दूसरी ओर हिमालयी सीमा पर तनाव ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है. ऐसे वक्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल […]

UB India News27 अग॰
भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..
खास खबर

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या आने वाले कुछ सालों में दोगुनी होकर करीब 3 हजार तक पहुंच सकती है. जापान दौरे पर पहुंचे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जापान की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए तैयार हैं. पीयूष गोयल ने ये भी कहा कि टेक्नोलॉजी की कमी […]

UB India News27 अग॰