संसद सत्र के एजेंडे से गायब क्यों है ‘परिसीमन बिल’ !

मोदी सरकार ने 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र का एजेंडा बता दिया। कुल 7 विधेयकों की सूची में 2 पुराने और 5 नए विधेयक हैं। इसमें ‘परिसीमन विधेयक’ का जिक्र नहीं है, जिसके लिए जरूरी दो-तिहाई सांसदों का समर्थन जुटाने के लिए सरकार ने एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा है। […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शनिवार, 18 जुलाई 2026, 10:26 AM 11 मिनट read
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संसद सत्र के एजेंडे से गायब क्यों है ‘परिसीमन बिल’ !
Photo: UB India News Archive

मोदी सरकार ने 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र का एजेंडा बता दिया। कुल 7 विधेयकों की सूची में 2 पुराने और 5 नए विधेयक हैं। इसमें ‘परिसीमन विधेयक’ का जिक्र नहीं है, जिसके लिए जरूरी दो-तिहाई सांसदों का समर्थन जुटाने के लिए सरकार ने एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा है।

परिसीमन विधेयक है क्या और अप्रैल में पारित क्यों नहीं हो सका था?

आम बोलचाल में जिसे हम परिसीमन विधेयक कह रहे, वो दो विधेयकों का पैकेज है। जिसमें लोकसभा की अधिकतम सीटें 550 से बढ़ाकर 850 करने और लोकसभा क्षेत्रों का आकार दोबारा तय करने (परिसीमन) के प्रावधान हैं। मोदी सरकार ने 16 से 18 अप्रैल 2026 को संसद का विशेष सत्र बुलाकर ये विधेयक पेश किए। तर्क दिया कि 2029 चुनाव तक महिला आरक्षण कानून लागू करने के लिए इन्हें पारित होना जरूरी है। विपक्षी पार्टियां इसके विरोध में एकजुट हो गईं। उनका तर्क था कि महिला आरक्षण की आड़ में बीजेपी अपना एजेंडा पूरा करना चाहती है। परिसीमन विधेयक से ज्यादा जनसंख्या वाले हिन्दी भाषी राज्यों को फायदा मिलेगा, जहां बीजेपी का गढ़ है। जबकि जनसंख्या वृद्धि रोकने वाले राज्यों को नुकसान होगा। संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत जरूरी होता है। यानी वोटिंग में आधे से ज्यादा सदस्य सदन में मौजूद हों और जितने सदस्य मौजूद हैं, उनमें से कम से कम दो-तिहाई सांसद इसके पक्ष में वोट दें…

  • मान लीजिए लोकसभा में सभी 543 सांसद मौजूद हों और बिल पर वोटिंग करें, तो बिल पास होने के लिए इसके दो-तिहाई यानी 362 सांसदों का समर्थन जरूरी है।
  • अप्रैल में वोटिंग के दौरान लोकसभा में 528 सांसद मौजूद थे। इसके दो-तिहाई के हिसाब से बिल को पास कराने के लिए 352 वोट चाहिए थे।
  • वोटिंग हुई, तो बिल के समर्थन में 298 वोट और विरोध में 230 वोट पड़े। इससे संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 54 वोटों से गिर गया।
अप्रैल में ये बिल गिरने के बाद पीएम मोदी ने कहा था, ‘कल हमारे पास पर्याप्त संख्या नहीं थी, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम हार गए हैं। भविष्य में हमें और अवसर मिलेंगे।’

क्या इसबार भी सरकार जरूरी नंबर्स नहीं जुटा पाई?

अप्रैल के मुकाबले दोनों सदनों में सरकार का समर्थन बढ़ा है, लेकिन दो-तिहाई बहुमत से अब भी पीछे है…

लोकसभा में NDA के साथ 318 सांसद

  • 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी 240 सीटों पर जीती थी। NDA में चंद्रबाबू नायडू की TDP के 16, नीतीश कुमार की पार्टी JDU के 12, शिवसेना (शिंदे गुट) के 7, LJP (राम विलास) के 5 और अन्य दलों के 13 सांसद भी शामिल थे। ये आंकड़ा बहुमत से 20 ज्यादा यानी 292 होता है।
  • 14 जून 2026 को TMC नेता काकोली घोष दस्तीदार समेत लोकसभा 20 सांसद NDA समर्थित नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी से जुड़ गए, जिससे लोकसभा में BJP का नंबर 292 से बढ़कर 312 हो गया।
  • जून में ही महाराष्ट्र में शिवसेना उद्धव गुट के 9 में से 6 सांसद भी NDA के सहयोगी दल शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हो गए। इनके आने से लोकसभा में NDA का आंकड़ा 318 पहुंच गया है।
  • फिलहाल 3 लोकसभा सीटें खाली हैं- असम की नागांव, पश्चिम बंगाल की बसीरहाट और मेघालय की शिलॉन्ग। यानी बिल पर लोकसभा में वोटिंग हो, तो अधिकतम 540 सांसद होंगे। इस हिसाब से दो-तिहाई के 360 के आंकड़े से NDA अभी 42 वोट पीछे हैं।

राज्यसभा में NDA के साथ 152 सांसद

  • अप्रैल 2026 में पंजाब से AAP के 7 राज्यसभा सांसदों के बीजेपी जॉइन करने और जून में राज्यसभा चुनाव होने के बाद NDA के पास 149 सांसद हैं। इसमें से बीजेपी के 114 हैं। यानी 245 सीटों वाली राज्यसभा में NDA के पास सामान्य बहुमत से 27 सीटें ज्यादा हैं।
  • TMC के 3 राज्यसभा सांसद- सुखेंदु शेखर रे, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बरैक ने पार्टी छोड़कर 9 जुलाई को बीजेपी जॉइन की। 17 जुलाई को निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुन लिए गए। इससे राज्यसभा में NDA का नंबर बढ़कर 152 हो गया।
  • 16 जुलाई को TMC की सांसद कोयल मलिक ने भी इस्तीफा दे दिया है। उनके बीजेपी में शामिल होने की अटकलें हैं।
  • राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 163 का आंकड़ा चाहिए। यानी NDA इससे सिर्फ 11 वोट पीछे है।

तो क्या मानसून सत्र में परिसीमन विधेयक नहीं आएगा?

संविधान के आर्टिकल 368 के तहत संविधान संशोधन विधेयक पेश करने के लिए राष्ट्रपति की अनुमति नहीं लेनी होती। इसे सरकार का कोई मंत्री या सांसद निजी तौर पर भी संसद सत्र के दौरान पेश कर सकता है। ऐसा भी कोई नियम नहीं है कि सत्र के एजेंडे में बिल के बारे में बताना जरूरी हो। इतिहास में भी कई संविधान संशोधन बिल अचानक लाए जा चुके हैं।

कई संकेत हैं कि सरकार सत्र के बीच किसी दिन परिसीमन बिल ला सकती है…

  • रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार दोबारा बिल पर समर्थन जुटाने के लिए बीजेपी के नेता DMK चीफ और तमिलनाडु के पूर्व सीएम MK स्टालिन के संपर्क में हैं। ‘वन नेशन-वन इलेक्शन बिल’ पर भी DMK समर्थन दे, इसकए बीजेपी ने इसमें कुछ बदलाव का प्रस्ताव रखा है।
  • TDP चीफ और आंध्र प्रदेश सीएम चंद्रबाबू नायडू ने 15 जून को दावा किया था कि केंद्र सरकार जल्द ही परिसीमन बिल फिर से लाएगी। महिला आरक्षण और परिसीमन साथ-साथ आगे बढ़ेंगे।
  • सीनियर जर्नलिस्ट आदेश रावल के मुताबिक, ‘परिसीमन बिल मानसून सत्र में दोबारा जरूर लाया जाएगा और उसी के लिए सांसदों के समर्थन का आंकड़ा बढ़ाने की कवायद की गई है।’
  • लोकसभा के पूर्व महासचिव और संविधान विशेषज्ञ PDT आचार्य भी कहते हैं कि सरकार पिछले सेशन में गिरा बिल इस सेशन में लाना चाहती है। NDA दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश कर रहा है। सरकार को लग रहा है कि सत्र से पहले वो समर्थन जुटा लेगी।
16 जुलाई को महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम और NCP अजित गुट की नेता सुनेत्रा पवार ने कहा, ‘महिला आरक्षण बिल बहुत जरूरी है। महिलाओं को राजनीति में उनका हक मिलना चाहिए। हम परिसीमन का भी समर्थन करते हैं। यह राष्ट्रीय हित में है।’
16 जुलाई को महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम और NCP अजित गुट की नेता सुनेत्रा पवार ने कहा, ‘महिला आरक्षण बिल बहुत जरूरी है। महिलाओं को राजनीति में उनका हक मिलना चाहिए। हम परिसीमन का भी समर्थन करते हैं। यह राष्ट्रीय हित में है।’

तो फिर बिल पारित कराने के लिए सरकार के पास और क्या रास्ते हैं?

फिलहाल सरकार लोकसभा में दो-तिहाई के आंकड़े से 41 सीट और राज्यसभा में 11 सीट दूर है। ये कमी कुछ छोटे क्षेत्रीय दलों से पूरी हो सकती है…

1. लोकसभा में शरद पवार की NCP, DMK और JMM के सांसदों पर दांव

  • लोकसभा में फिलहाल NCP (शरद) के 8, DMK के 22 और JMM के 3 सांसद हैं। अगर तीनों पार्टियों के सांसद सरकार का समर्थन कर दें, तो NDA का आंकड़ा 351 तक पहुंच जाएगा, जो दो-तिहाई बहुमत से 9 कम होगा।
  • NCP (शरद पवार गुट) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने कहा है कि अगर सरकार हर राज्य की आधी सीटें बढ़ाती है, तो हम परिसीमन बिल पर समर्थन कर सकते हैं।
  • खबरें हैं कि स्टालिन और बीजेपी लीडरशिप के बीच बातचीत हुई है और उन्होंने INDIA ब्लॉक से दूरी बना ली है। वहीं JMM सांसद भी बीजेपी के संपर्क में हैं।
  • चर्चा है कि समाजवादी पार्टी के 37 में से कुछ सांसद भी बीजेपी के संपर्क में हैं। अगर इनमें से कुछ या अन्य विपक्षी सांसद वोटिंग के दौरान लोकसभा में अनुपस्थित रहे, तो दो-तिहाई का आंकड़ा कम हो जाएगा और
  • सरकार को जरुरी समर्थन जुटाने में आसानी होगी। अप्रैल में हुई वोटिंग में 12 सांसद लोकसभा नहीं पहुंचे थे।
  • वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी कहती हैं कि DMK भी बीजेपी सरकार को मुद्दों के आधार पर समर्थन दे सकती है। इन 22 सांसदों का समर्थन भले न मिले, लेकिन सरकार इन्हें वोटिंग से दूर रहने के लिए मना सकती है।

2. राज्यसभा में YSR कांग्रेस और बीजू जनता दल की जरूरत

  • राज्यसभा में भी DMK के 8 सांसद हैं, ये वोटिंग न करें, तो दो-तिहाई बहुमत के लिए 156 वोट चाहिए होंगे, यानी NDA को 4 और सांसदों का समर्थन जुटाना होगा।
  • इसके लिए सरकार की नजर YSR कांग्रेस और बीजू जनता दल यानी BJD जैसी छोटी पार्टियों पर रहेगी, जो न तो NDA में हैं और न INDIA ब्लॉक में।
  • YSR कांग्रेस के 4 और BJD के 5 सांसद हैं। अगर इनमें से कुछ सांसद NDA को समर्थन दे दें, तो सरकार 11 सीटों का फासला पाटने के करीब पहुंच सकती है।
  • हालांकि नवंबर में NDA का गणित दोबारा कुछ बिगड़ सकता है, क्योंकि तब उत्तर प्रदेश से 10 राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। विधानसभा में बेहतर स्थिति के चलते समाजवादी पार्टी उपचुनाव में कुछ ज्यादा सीटें जीत सकती है।

आखिर परिसीमन बिल पारित होने से क्या हो जाएगा, बीजेपी इतना जोर क्यों लगा रही?

नए परिसीमन के बाद लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में 50% सीटें बढ़ेंगी। गृहमंत्री अमित शाह ने इसका फॉर्मूला बताते हुए कहा था, ‘मान लीजिए कि 100 सीटें हैं, जिसमें 33% आरक्षण देना है, तो इसमें 50 सीटें बढ़ाएंगे। इस हिसाब से 150 सीट होती हैं। लोकसभा में ये राउंड ऑफ फिगर 850 है।’

सरकार का कहना था कि सारे राज्यों में सीटें ‘आनुपातिक रूप से’ बढ़ेंगी। यानी, अगर 543 सीटों की लोकसभा में तमिलनाडु के पास 7.18% हिस्सेदारी, यानी 39 सीटें हैं, तो 850 सीटों की लोकसभा में भी 7.18% हिस्सेदारी यानी 61 सीटें होंगी।

हालांकि परिसीमन विधेयक में सीटें ‘आनुपातिक रूप से बढ़ाने’ की गारंटी देने वाला कोई प्रावधान नहीं है। इसके उलट संविधान का अनुच्छेद 81(2)(a) कहता है कि सीटें जनसंख्या के अनुपात में मिलेंगी, न कि सभी राज्यों में बराबर प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होगी। इसमें भी सरकार ने कोई बदलाव नहीं किया। यानी 2011 की जनगणना के आधार पर जनसंख्या के अनुपात से ही परिसीमन हो सकता है। ऐसे में ज्यादा जनसंख्या वाले राज्यों को ज्यादा सीटें और कम जनसंख्या वाले राज्यों को कम सीटें मिलेंगी।

इससे यूपी, बिहार, राजस्थान, दिल्ली और मध्य प्रदेश सबसे ज्यादा फायदा में होंगे। ये सभी हिंदी बेल्ट के राज्य हैं, जहां बीजेपी का स्ट्रॉन्ग होल्ड है।

1. बीजेपी के लिए बेस्ट केस सिनैरियोः अगर 2019 का प्रदर्शन दोहराती है

  • परिसीमन के बाद लोकसभा में 850 सीटें हुईं, तो बहुमत का आंकड़ा 426 होगा।
  • 2019 में BJP को कुल 303 सीटें मिली थीं। इनमें 168 सीटें हिंदी भाषी राज्यों (काउ बेल्ट) से थीं। यानी करीब 55% सीटें।
  • अगर 2029 में BJP 2019 का ही प्रदर्शन दोहराती है, तो उसे काउ बेल्ट में ही 299 सीटें मिलेंगी। यानी बहुमत के लिए जरूरी सीटों में से करीब 70% सीटें BJP 8 राज्यों से ही हासिल कर लेगी।
  • BJP ने 2019 में गैर-हिंदी भाषी राज्य गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक में जबरदस्त प्रदर्शन किया था। अगर वहीं प्रदर्शन BJP, परिसीमन के बाद भी दोहराती है, तो गुजरात में 43, पश्चिम बंगाल में 27, कर्नाटक में 37 और महाराष्ट्र में 37 सीटें मिलेंगी। इस तरह बीजेपी इन 12 राज्यों से ही बहुमत का आंकड़ा पार कर लेगी।

2. बीजेपी के वर्स्ट केस सिनैरियो: अगर 2024 का प्रदर्शन दोहराती है

  • 2024 में BJP को 240 सीटें मिली थीं। गठजोड़ से सरकार बनानी पड़ी। हालांकि बीजेपी की 240 में से 118 सीटें हिंदी भाषी राज्यों (काउ बेल्ट) से थीं। यानी करीब 49% सीटें।
  • परिसीमन के बाद अगर BJP 2024 का ही प्रदर्शन दोहराए, तो काउ बेल्ट में 210 सीटें मिलेंगी। यानी बहुमत के लिए जरूरी सीटों में से करीब 50% सीटें BJP इन आठ राज्यों से ही हासिल कर लेगी।
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