सर्वदलीय बैठक में हाईवोल्टेज ड्रामा , विपक्षी सांसदों ने बैठक से सांकेतिक रूप से वॉकआउट……………..

संसद के मानसून सत्र से पहले रविवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का विपक्ष ने शुरू में बहिष्कार कर दिया. हालांकि, थोड़ी देर में वह फिर से बैठक में शामिल होने के लिए लौट आए. बताया जा रहा है कि विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी सांसदों को बुलाने से नाराज थे. टीएमसी सांसद […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
रविवार, 19 जुलाई 2026, 09:18 AM 4 मिनट read
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सर्वदलीय बैठक में हाईवोल्टेज ड्रामा , विपक्षी सांसदों ने बैठक से सांकेतिक रूप से वॉकआउट……………..
Photo: UB India News Archive
संसद के मानसून सत्र से पहले रविवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का विपक्ष ने शुरू में बहिष्कार कर दिया. हालांकि, थोड़ी देर में वह फिर से बैठक में शामिल होने के लिए लौट आए. बताया जा रहा है कि विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी सांसदों को बुलाने से नाराज थे.
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, “आज कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), आम आदमी पार्टी (आप), नेशनल कॉन्फ्रेंस, लेफ्ट पार्टियां और शिवसेना (UBT) समेत पूरा विपक्ष सर्वदलीय बैठक से विरोध स्वरूप बाहर निकल आया. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि तथाकथित NCPI (जो एक गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है) के मामले में, टेबल ऑफिस द्वारा दी गई सूची में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की संख्या 28 सदस्य दिखाई गई है. इन तथाकथित बागी 20 सांसदों के विलय को स्पीकर ने मंजूरी नहीं दी है.”
उन्होंने आगे कहा, “अयोग्यता से जुड़ी 20 याचिकाएं अभी भी लंबित हैं. 91वें संशोधन के बाद, किसी अलग गुट के लिए कोई गुंजाइश नहीं है. तो संसदीय कार्य मंत्री ने किन आधारों पर इन 20 बागी सांसदों को निमंत्रण दिया और वे इस बैठक में कैसे शामिल हो रहे हैं? हमने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है और विरोध के प्रतीक के तौर पर बैठक से बाहर निकल आए हैं. और हम अपनी सभी विपक्षी पार्टियों का धन्यवाद करते हैं.”
विपक्ष ने क्यों किया बैठक से वॉकआउट?
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, आज कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम, झारखंड मुक्ति मोर्चा, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वाम दलों और शिवसेना (यूबीटी) समेत पूरा विपक्ष सर्वदलीय बैठक से विरोध जताते हुए बाहर निकल गया। इसकी वजह यह है कि कथित एनसीपीआई, जो एक गैर-मान्यता प्राप्त दल है, उसे बैठक में शामिल किया गया।

उन्होंने कहा, टेबल ऑफिस (संसदीय दस्तावेज और व्यवस्था संभालने वाला विभाग) की ओर से दी गई सूची में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की ताकत 28 सांसद दिखाई गई है। इन कथित 20 बागी सांसदों के विलय को अभी तक लोकसभा अध्यक्ष ने मंजूरी नहीं दी है। इन 20 सांसदों की अयोग्यता से जुड़ी याचिकाएं अब भी लंबित हैं।

महुआ मोइत्रा ने कहा, 91वें संविधान संशोधन के बाद किसी अलग गुट के बनने की कोई गुंजाइश नहीं है। ऐसे में संसदीय कार्य मंत्री ने किस आधार पर इन 20 बागी सांसदों को निमंत्रण दिया और वे इस बैठक में कैसे शामिल हो रहे हैं? उन्होंने आगे कहा, हमने इस मामले पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया और विरोध के प्रतीक के रूप में बैठक से बाहर निकल गए। हम सभी विपक्षी दलों का धन्यवाद करते हैं कि उन्होंने हमारा साथ दिया।

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, कांग्रेस ने संविधान की रक्षा के लिए बैठक से वॉकआउट किया है। अंतिम फैसला आने से पहले ही कोई अनुमान लगाना पूरी तरह असांविधानिक है।

अरविंद सावंत ने क्या कहा?
शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने कहा, उन्हें (बागी सांसदों को) दी गई मान्यता, कानून की किताबों में यह शब्द कहां है? हमने भी इसका विरोध किया है और सदन से वॉकआउट किया है।

आम आदमी पार्टी के सांसद एनडी गुप्ता ने कहा, हमारे मामले में राज्यसभा के 10 सांसदों में से 7 को अलग कर लिया गया है और यह तय करने के लिए हमारी याचिका लंबित है कि यह सही है या नहीं। इसके बावजूद उन्हें राज्यसभा में अलग से स्वतंत्र सीटें दे दी गई हैं। यह सिर्फ एक तरह से सांसदों को अपने साथ मिलाना और लोकतंत्र की हत्या है।

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा और 13 अगस्त तक चलेगा। मानसून सत्र की तारीखों का एलान करते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स पर लिखा, भारत सरकार की सिफारिश पर माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी ने संसद के दोनों सदनों को मानसून सत्र 2026 के लिए बुलाने की मंजूरी दे दी है। यह सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होगा और 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। इस दौरान राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक बहस, चर्चा की जाएगी और फैसले लिए जाएंगे। चार सप्ताह तक चलने वाले इस सत्र में संसद की 19 बैठकें होंगी।

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