क्या इस आंदोलन से कांग्रेस की झोली भरेगी?

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के धरना व प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ हुई हिंसा के बाद युवा वर्ग बेहद आहत है और ऐसे में राहुल गांधी की अगुआई में कांग्रेस के पास खुद को आगे बढ़ाने का एक अच्छा अवसर भी है। मगर सवाल यही है कि हर बार अच्छे अवसरों को गंवाने वाली […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 23 जुलाई 2026, 06:50 AM 6 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
क्या इस आंदोलन से कांग्रेस की झोली भरेगी?
Photo: UB India News Archive

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के धरना व प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ हुई हिंसा के बाद युवा वर्ग बेहद आहत है और ऐसे में राहुल गांधी की अगुआई में कांग्रेस के पास खुद को आगे बढ़ाने का एक अच्छा अवसर भी है। मगर सवाल यही है कि हर बार अच्छे अवसरों को गंवाने वाली कांग्रेस क्या इस बार सरकार के खिलाफ बने माहौल को अपने पक्ष में भुना पाएगी?

दरअसल, यह कहने में कोई गुरेज नहीं होना चाहिए कि इस पूरे मसले पर राहुल गांधी ने धैर्य के साथ और एक सोची-समझी रणनीति के तहत काम किया है। कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन तो करीब एक महीने से चल रहा है, लेकिन राहुल ने इससे दूरी बनाए रखी। कुछ लोग सवाल भी उठाते रहे कि आखिर सरकार विरोधी इस आंदोलन में राहुल खुद क्यों नहीं जा रहे? राहुल की सोच यह थी कि अगर वह सीजेपी के प्रदर्शन में चले गए, तो एक तो इसका पूरा फायदा उस संगठन को मिल जाएगा और दूसरा यह कि कांग्रेस स्वयं भी पेपर लीक के मुद्दे पर लगातार विरोध दर्ज करा रही है, जिससे उसका अपना प्रतिरोध कमजोर पड़ सकता था। इसके अलावा, एक आशंका यह भी थी कि इसमें राहुल के कूदते ही भाजपा या उसके समर्थक इस पूरे मुद्दे की दिशा ही मोड़ने का प्रयास करते।

अब देखने वाली बात यह है कि कांग्रेस इस पूरे मसले को कितने प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाती है। देश का युवा पूरे हालात पर नजर बनाए हुए है। लेकिन, कांग्रेस के सामने बड़ी व्यावहारिक चुनौती यह है कि अधिकांश यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में या तो भाजपा समर्थित छात्र संगठनों का दबदबा है या वामपंथी छात्र संघों का। कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई का प्रभाव अब वैसा नहीं रहा, जैसा कभी हुआ करता था। ऐसे में, केवल राहुल गांधी के व्यक्तिगत राजनीतिक उभार के बलबूते पार्टी इस मसले का कितना सियासी फायदा उठा पाएगी, उसी से उसकी सफलता तय होगी।

देश की राजनीति आज ऐसे मुकाम पर आ खड़ी है, जहां कांग्रेस को अन्य विपक्षी दलों को या तो साथ लेकर चलना है या उन्हें सही ढंग से साधना है। छात्रों के इस आंदोलन को आम आदमी पार्टी (आप) लगातार समर्थन दे रही है और वह सिर्फ भाजपा सरकार से ही नहीं, बल्कि कांग्रेस से भी टकरा रही है। वजह स्पष्ट है-पंजाब के आगामी विधानसभा चुनाव। वहां आम आदमी पार्टी का मुख्य मुकाबला कांग्रेस से ही है। उसे लग रहा है कि इस मुद्दे पर अगर कांग्रेस ने बढ़त बना ली, तो उसे पंजाब चुनाव में बड़ा नुकसान हो सकता है। आम आदमी पार्टी का आखिरी गढ़ पंजाब ही है, जिसे वह किसी भी कीमत पर बचाना चाहती है।

दूसरी ओर, राहुल गांधी उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के साथ अपनी बॉन्डिंग को और मजबूत कर सकते हैं, जहां अगले साल की शुरुआत में बेहद महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव होने हैं। उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव का अच्छा प्रभाव है। वहां उनका एक मजबूत जनाधार भी है और उन्हें बड़े तबकों का समर्थन मिलता आया है। मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने के दौरान अखिलेश यादव भी राहुल के साथ मौजूद थे और उन्होंने भी गिरफ्तारी दी। यह दोनों नेताओं के बीच बेहतर सियासी तालमेल का सबूत है, जिसे उन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव तक बनाए रखना होगा। इसके अलावा, देशभर में दलितों या पिछड़ों का प्रतिनिधित्व करने वाले जितने भी सामाजिक संगठन हैं, राहुल गांधी उनका साथ ले सकते हैं। यह सामाजिक न्याय को लेकर राहुल की लड़ाई के अनुकूल भी रहेगा और राजनीतिक रूप से फायदेमंद भी।

हालांकि, इस पूरे माहौल में राहुल गांधी को अपनी चुनावी चालें बेहद सावधानी से चलनी होंगी। सबसे करीबी परीक्षा पंजाब में होने जा रही है। अगर कांग्रेस वहां चुनाव हार जाती है और दूसरे या तीसरे स्थान पर खिसकती है, तो इससे उसकी भारी किरकिरी होगी। यह स्थिति ‘एक कदम आगे बढ़कर दो कदम पीछे हटने’ जैसी होगी, क्योंकि हमारे देश के लोकतंत्र में हर बात हार-जीत पर ही निर्भर करती है। इसी तरह, अगर उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की अगुआई में भाजपा दोबारा चुनाव जीत जाती है, तो पूरा विपक्ष हाशिये पर पहुंच जाएगा। इसके विपरीत, अगर पंजाब में कांग्रेस और उत्तर प्रदेश में अखिलेश की अगुआई वाला गठबंधन जीत दर्ज करता है या अच्छी टक्कर देता है, तो सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, बल्कि पूरे देश के विपक्ष को एक नई संजीवनी मिल जाएगी। इस तरह, छात्र आंदोलन के बहाने ही सही, यह कांग्रेस के लिए खुद को पुनर्जीवित करने का एक बेहतरीन मौका भी है।

यहां अन्ना आंदोलन और सीजेपी के इस आंदोलन के बीच के फर्क को भी समझना होगा। अन्ना आंदोलन मुख्य रूप से भ्रष्टाचार के मुद्दे पर केंद्रित था, जिसमें पूरे भ्रष्ट सिस्टम को बदलने का आग्रह था और लोकपाल की नियुक्ति उसका मुख्य समाधान थी। इसके विपरीत, सीजेपी का यह आंदोलन एक बयान या टिप्पणी से उपजा विरोध है, जो अब शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तक पहुंच गया है। अगर शिक्षा मंत्री का इस्तीफा पहले ही हो जाता, तो शायद यह आंदोलन इतना आगे बढ़ता ही नहीं। लेकिन, सरकार ने जब यह छोटी-सी मांग भी नहीं मानी, तो यह युवाओं के भीतर सरकार के प्रति अविश्वास के बड़े आंदोलन में बदल गया। इसमें सोनम वांगचुक की एंट्री ने सरकार के खिलाफ बने अविश्वास को एक नैतिक धार दे दी है। सरकार के प्रति बने इसी अविश्वास के माहौल पर कांग्रेस को अपनी भावी राजनीति तय करनी है।

प्रधानमंत्री आवास के बाहर राहुल गांधी के धरने के बाद कई लोग राहुल और कांग्रेस पर छात्र आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगा रहे हैं। यहां कांग्रेस को ऐसे आरोपों से घबराने या विचलित होने के बजाय पुरजोर तरीके से यह स्पष्ट करना होगा कि लोकतंत्र में अपने उद्देश्यों को हासिल करने के लिए राजनीति एक मान्यता प्राप्त और वैध जरिया है, जिसका इस्तेमाल करने का अधिकार सभी को है। और, एक जिम्मेदार विपक्षी दल होने के नाते यह अधिकार एक कदम आगे बढ़कर लोकतांत्रिक कर्तव्य भी बन जाता है।

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी
खास खबर

खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]

UB India News27 अग॰
पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………
खास खबर

पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………

पंजाब में 25 सालों तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान 2020 में यह ढाई दशक पुरानी दोस्ती टूट गई थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज हो गई है. बीजेपी […]

UB India News27 अग॰
अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?
खास खबर

अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव आया है. एक ओर दोनों देश व्यापार, वैश्विक मंचों और बहुपक्षीय संगठनों में साथ दिखते हैं तो दूसरी ओर हिमालयी सीमा पर तनाव ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है. ऐसे वक्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल […]

UB India News27 अग॰
भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..
खास खबर

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या आने वाले कुछ सालों में दोगुनी होकर करीब 3 हजार तक पहुंच सकती है. जापान दौरे पर पहुंचे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जापान की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए तैयार हैं. पीयूष गोयल ने ये भी कहा कि टेक्नोलॉजी की कमी […]

UB India News27 अग॰