विपक्षी सांसदों का भाजपा में अप्रत्याशित दलबदल क्यों ………………..

पिछले एक महीने में राष्ट्रीय राजनीति तथा संसद का समीकरण जिस तरह से बदला है उसकी कल्पना किसी को नहीं थी। क्या भाजपा या राजग विरोधी दलों, नेताओं में से किसी ने सोचा था कि बंगाल का चुनाव परिणाम आते ही ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस टूट जाएगी और उसके 28 में से 20 लोकसभा […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 23 जुलाई 2026, 06:56 AM 5 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
विपक्षी सांसदों का भाजपा में अप्रत्याशित दलबदल क्यों ………………..
Photo: UB India News Archive

पिछले एक महीने में राष्ट्रीय राजनीति तथा संसद का समीकरण जिस तरह से बदला है उसकी कल्पना किसी को नहीं थी। क्या भाजपा या राजग विरोधी दलों, नेताओं में से किसी ने सोचा था कि बंगाल का चुनाव परिणाम आते ही ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस टूट जाएगी और उसके 28 में से 20 लोकसभा सदस्य अलग समूह बनाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार के समर्थन की घोषणा करेंगे?

इस सिलसिले की शुरुआत आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सदस्यों के भाजपा में शामिल होने से हुई। टीएमसी के राज्यसभा सदस्यों के भी इस्तीफे हो रहे हैं। एक तरह से ममता बनर्जी का खुद की तृणमूल पर कोई अधिकार नहीं रह गया है। उद्धव ठाकरे की बची-खुची शिवसेना भी उनके हाथ से फिसलती जा रही है।

बीते दिनों उनके छह सांसद राजग के साथ चले गए। पहले भी कुछ सांसद एवं विधायक एक दल छोड़कर दूसरी ओर गए हैं, लेकिन इस तरह की घटना राष्ट्रीय राजनीति में पहले कभी नहीं हुई। माहौल ऐसा बन गया है कि अनेक पार्टियों के शीर्ष नेता दिन-रात इस भय में हैं कि पता नहीं उनके कितने सांसद या विधायक अचानक साथ छोड़कर दूसरी ओर जाने की घोषणा कर दें।

पहली दृष्टि में ऐसा लगता है कि भाजपा अंदर ही अंदर नेताओं को दल-बदल के लिए तैयार करा रही है, पर क्या यही सच है?

कांग्रेस या अन्य पार्टियां भाजपा पर भले आरोप लगाएं, किंतु इस प्रक्रिया से उन सबको भयभीत होना चाहिए, जो बदलते हुए सामूहिक राष्ट्रीय मानस और धारा के विपरीत काम कर रहे हैं।

विपक्ष के इस आरोप को स्वीकार नहीं किया जा सकता कि भाजपा ने ईडी, सीबीआइ, इनकम टैक्स और अन्य दबावों से यह स्थिति पैदा की है। इतनी बड़ी संख्या में सांसद और विधायक वर्षों का साथ छोड़कर सीधे भाजपा नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ जा रहे हैं तो यह परिघटना सामान्य नहीं मानी जाएगी। इनमें से कितने सांसद, विधायक होंगे जिनके विरुद्ध भ्रष्टाचार के मामले हैं?

सारे सांसदों, विधायकों में से बहुत कम पर भ्रष्टाचार या अपराध के संगीन मामले हैं। बदलते घटनाक्रम में शरद पवार और सुप्रिया सुले के कदमों ने जता दिया है कि इन सबमें बुद्धिमान वही निकले। अगर शरद पवार ने राजग के साथ जाने का संकेत नहीं दिया होता तो उनके आठ में से छह सांसद और सभी दसों विधायक साथ छोड़कर चले जाते।

हालांकि शरद पवार ने राष्ट्रीय स्तर पर बदलती राजनीति, जनमानस और धारा को समझने में काफी देर की। अगर वह पहले समझ गए होते और महाविकास आघाड़ी या आइएनडीआइए के सपने में नहीं जीते तो उनकी पार्टी एक होती और शीर्ष नेता वही माने जाते।

सांसदों-विधायकों के टूटने की घटना को गत 17 अप्रैल को 131वें संविधान संशोधन विधेयक के लोकसभा में गिर जाने से भी जोड़कर देखा जा रहा है। यानी विपक्षी दलों के सांसदों के अंदर भय पैदा हो गया है कि महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण का हमने समर्थन नहीं किया और विरोध में चले गए तो हम कभी जीत नहीं पाएंगे, किंतु इसी कारण केवल सांसद और विधायक भाजपा या राज्य की ओर आ रहे हों, यह मान लेना भी पूरी स्थिति का सामान्य विश्लेषण होगा।

बंगाल के बारे में कहा जा सकता है कि वहां सत्ता में आने वाली पार्टी लंबे समय रहती है और पूर्ववर्ती सत्तारूढ़ पार्टी लगभग समाप्त हो जाती है। इसलिए जिन सांसदों, विधायकों को लग रहा है कि अब तृणमूल कांग्रेस का समय गया तो वे उसका साथ छोड़ रहे हैं। हालांकि यह भी एक कारण हो सकता है, पर संपूर्ण नहीं।

कई बार हम तात्कालिक परिणाम या घटनाओं के विश्लेषण में बहुत सारे तथ्यों की अनदेखी कर देते हैं। दरअसल 2014 का चुनाव परिणाम भारतीय राजनीति में युगांतकारी परिवर्तन का संकेतक था। राष्ट्र-भाव की प्रबल भूमिका उसमें स्पष्ट दिख रही थी और आगे भी उतार-चढ़ाव के साथ भाजपा की विजय में इस एक कारक की अंततः प्रमुख भूमिका रही है।

बंगाल में हिंदुओं के बहुत बड़े वर्ग ने ममता बनर्जी की मुस्लिमपरस्त और हिंदू विरोधी राजनीति के विरुद्ध विद्रोह कर भाजपा के पक्ष में मतदान किया। विपक्ष ने 2024 लोकसभा चुनाव परिणाम का अपने अनुसार गलत आकलन किया। राहुल गांधी ने कह दिया कि हमने अयोध्या मूवमेंट को हरा दिया।

अखिलेश यादव वहां के सांसद अवधेश प्रसाद को लोकसभा में आगे बिठाकर भाजपा को चिढ़ाते रहे। देश में इसकी प्रतिक्रिया हुई, जो बाद में महाराष्ट्र, हरियाणा से लेकर दिल्ली आदि के चुनाव परिणाम में स्पष्ट दिखी भी।

किसी सरकार से न हर कोई संतुष्ट होता है और न केवल उसके पास उपलब्धियां ही होती हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों से सामाजिक न्याय का स्वरूप बदला है और आम लोगों तक उसके लाभ पहुंचे हैं, जिनमें महिलाएं आगे हैं। इसी तरह देश में आधारभूत संरचना के निर्माण के साथ विकास के काम भी लोग सामने देख रहे हैं।

विपक्षी पार्टियों ने मुस्लिम वोट के लिए वक्फ संशोधन विधेयक का विरोध किया। मतदाताओं में इसका संदेश विपरीत गया। लोगों के मन में यह भाव गहरा रहा है कि भाजपा जैसी भी हो, भारतीयता के लिए अंततः खड़ी होती है। विपक्षी दल हमारे धर्म, संस्कृति, सभ्यता, विरासत, भारत की पहचान और इन सबके साथ हमारी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पाएंगे। इस प्रक्रिया को नहीं समझने वाले विपक्षी नेता अपनी पार्टी को कमजोर कर रहे हैं।

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी
खास खबर

खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]

UB India News27 अग॰
पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………
खास खबर

पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………

पंजाब में 25 सालों तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान 2020 में यह ढाई दशक पुरानी दोस्ती टूट गई थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज हो गई है. बीजेपी […]

UB India News27 अग॰
अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?
खास खबर

अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव आया है. एक ओर दोनों देश व्यापार, वैश्विक मंचों और बहुपक्षीय संगठनों में साथ दिखते हैं तो दूसरी ओर हिमालयी सीमा पर तनाव ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है. ऐसे वक्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल […]

UB India News27 अग॰
भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..
खास खबर

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या आने वाले कुछ सालों में दोगुनी होकर करीब 3 हजार तक पहुंच सकती है. जापान दौरे पर पहुंचे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जापान की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए तैयार हैं. पीयूष गोयल ने ये भी कहा कि टेक्नोलॉजी की कमी […]

UB India News27 अग॰