नीट-यूजी पेपर लीक के बाद परीक्षा प्रणाली को जड़ से बदलने का अवसर……………

भारत की परीक्षा व्यवस्था इन दिनों अपने सबसे बड़े मंथन के दौर से गुजर रही है। गत दिनों नीट-यूजी 2026 का प्रश्नपत्र लीक होने के कारण 23 लाख विद्यार्थियों की परीक्षा रद करनी पड़ी। इसके विरोध में दिल्ली से लेकर देशभर में व्यापक छात्र आंदोलन हुए। जवाबदेही की मांग के बीच शिक्षा मंत्री ने त्यागपत्र […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 31 जुलाई 2026, 07:59 AM 6 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
नीट-यूजी पेपर लीक के बाद परीक्षा प्रणाली को जड़ से बदलने का अवसर……………
Photo: UB India News Archive

भारत की परीक्षा व्यवस्था इन दिनों अपने सबसे बड़े मंथन के दौर से गुजर रही है। गत दिनों नीट-यूजी 2026 का प्रश्नपत्र लीक होने के कारण 23 लाख विद्यार्थियों की परीक्षा रद करनी पड़ी। इसके विरोध में दिल्ली से लेकर देशभर में व्यापक छात्र आंदोलन हुए। जवाबदेही की मांग के बीच शिक्षा मंत्री ने त्यागपत्र दे दिया तथा एनटीए के 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया।

इसी बीच केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि वर्ष 2027 से नीट परीक्षा ओएमआर शीट के बजाय कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) के माध्यम से आयोजित की जाएगी। राधाकृष्णन समिति ने वर्ष 2024 में भी यही सिफारिश की थी। यह एक स्वागतयोग्य कदम है। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार ने युवाओं की आवाज सुनी है और सही दिशा में पहल की है, परंतु यह क्षण केवल एक परिवर्तन तक सीमित नहीं है। जब पूरी परीक्षा प्रणाली कागज से स्क्रीन पर स्थानांतरित हो रही है तो आधा-अधूरा बदलाव क्यों किया जाए?

जिस प्रकार वर्ष 1991 के आर्थिक संकट ने भारत की अर्थव्यवस्था के लिए नए द्वार खोले थे, उसी प्रकार वर्ष 2026 का परीक्षा-संकट भारतीय परीक्षा व्यवस्था को इक्कीसवीं सदी के अनुरूप बनाने का अवसर प्रदान कर सकता है, बशर्ते हम दूरदर्शिता के साथ बड़ा सोचें।

प्रस्तावित माडल जेईई मेन की तर्ज पर बहु-पाली सीबीटी का है, जिसमें प्रत्येक पाली के सभी परीक्षार्थियों को एक ही निर्धारित प्रश्नपत्र मिलेगा। यही ढांचा वर्ष 2021 में सेंध का शिकार हो चुका है। जेईई मेन 2021 पूरी तरह कंप्यूटर आधारित थी, फिर भी सोनीपत के एक परीक्षा केंद्र पर ‘रिमोट एक्सेस’ साफ्टवेयर के माध्यम से बाहर बैठे साल्वर परीक्षार्थियों के प्रश्नपत्र हल कर रहे थे। सीबीआइ जांच के अनुसार, प्रति उम्मीदवार 12 से 15 लाख रुपये तक वसूले गए। साफ्टवेयर से छेड़छाड़ के आरोप में एक रूसी हैकर भी पकड़ा गया, जिससे कथित रूप से 800 से अधिक उम्मीदवारों को लाभ पहुंचा।

यदि निर्धारित प्रश्नपत्र और असुरक्षित मशीनें बनी रहीं तो चोरी का रास्ता बंद नहीं होगा, बल्कि वह केवल कागज से खिसककर स्क्रीन पर आ जाएगा। संसद की स्थायी समिति भी कह चुकी है कि वर्ष 2024 में एनटीए द्वारा आयोजित 14 परीक्षाओं में से पांच परीक्षाएं बाधित हुई थीं। इसीलिए हमें पूरी परीक्षा प्रणाली बदलनी होगी, क्योंकि कंप्यूटर आधारित परीक्षा कोई रामबाण समाधान नहीं है।

अमेरिका की जीआरई जैसी परीक्षाएं केवल ‘कंप्यूटर पर’ आयोजित नहीं होतीं, बल्कि वे एडेप्टिव होती हैं। इनमें विशाल एन्क्रिप्टेड प्रश्नबैंक से प्रत्येक परीक्षार्थी को अलग, किंतु समान कठिनाई स्तर वाला प्रश्नपत्र मिलता है और परीक्षा पूरे वर्ष आयोजित की जाती है। इसी प्रकार, सैट वर्ष 2024 से पूरी तरह डिजिटल-एडेप्टिव हो चुकी है। इसमें दो परीक्षार्थियों के प्रश्न एक जैसे नहीं होते, इसलिए ‘पेपर लीक’ की गुंजाइश ही नहीं रहती। ऐसे परीक्षा केंद्रों पर बायोमीट्रिक सत्यापन और ‘लाक्ड-डाउन’ टर्मिनल होते हैं, जिन पर कोई बाहरी साफ्टवेयर चल ही नहीं सकता।

ब्रिटेन की यूकैट भी कंप्यूटर आधारित परीक्षा है, लेकिन उसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह रटे हुए ज्ञान के बजाय अभ्यर्थी की निर्णय-क्षमता का मूल्यांकन करती है। अपने देश की बात करें तो कैट परीक्षा भी वर्षों से कंप्यूटर आधारित, बहु-पाली प्रणाली के तहत सफलतापूर्वक आयोजित होती आ रही है और उसमें किसी बड़े स्तर की सेंधमारी देखने को नहीं मिली है। अर्थात समाधान का रास्ता हमारे सामने है और वह कोई अबूझ भी नहीं।

हमारी परीक्षाएं प्रतिभा नहीं, बल्कि स्मरण-शक्ति का आकलन करती हैं। जो परीक्षा देश के भावी डाक्टरों का चयन करती है, वह केवल यह देखती है कि अभ्यर्थी ने जीव-विज्ञान कितना रटा है। जबकि इसकी परख बोर्ड में पहले ही हो चुकी होती है। नीट परीक्षा यह नहीं परखती कि अभ्यर्थी में मरीज का दर्द समझने की संवेदना, तेजी से सीखने की क्षमता और दबाव की स्थिति में सही निर्णय लेने का विवेक है या नहीं। इसी रटंत प्रणाली ने 58 हजार करोड़ रुपये के कोचिंग उद्योग को जन्म दिया है, जिसके लिए अनेक माता-पिता कर्ज तक लेने को विवश हो जाते हैं। ‘एक दिन का जुआ’ आज भी यथावत बना हुआ है। केवल स्क्रीन पर परीक्षा आयोजित कर देने से इनमें से कोई भी समस्या स्वत: समाप्त नहीं हो जाएगी।

सबसे पहले सीबीटी को एडेप्टिव बनाया जाए। इसके लिए एक राष्ट्रीय एन्क्रिप्टेड प्रश्नबैंक तैयार किया जाए और प्रत्येक विद्यार्थी को अलग, किंतु समतुल्य कठिनाई स्तर वाला प्रश्नपत्र मिले, जो परीक्षा शुरू होते ही परीक्षा केंद्र के टर्मिनल पर तैयार हो। इसके साथ ही प्रत्येक केंद्र का स्वतंत्र सुरक्षा आडिट, बायोमीट्रिक सत्यापन तथा रिमोट एक्सेस पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित किया जाए। गांवों और कस्बों तक परीक्षा केंद्रों का व्यापक नेटवर्क स्थापित हो तथा निःशुल्क माक परीक्षाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि डिजिटल खाई किसी ग्रामीण प्रतिभा को निगल न सके।

प्रत्येक बड़ी परीक्षा वर्ष में दो या तीन बार आयोजित हो और अभ्यर्थी का सर्वश्रेष्ठ स्कोर ही मान्य माना जाए। इससे प्रश्नपत्र लीक का काला बाजार खत्म हो जाएगा। डाक्टरों के चयन के लिए संवेदना और निर्णय-क्षमता का आकलन करने वाले परिदृश्य-आधारित प्रश्न तथा साक्षात्कार जोड़े जाएं। सिविल सेवा परीक्षा में भी तथ्य-स्मरण पर निर्भरता घटे और केस-स्टडी आधारित प्रश्न बढ़ाए जाएं। कुछ प्रश्न ओपन-बुक भी हों। जो परीक्षा रटने की नहीं, बल्कि सोचने और समझने की होगी, उसका प्रश्नपत्र लीक होने पर भी नकल करने वालों को कोई विशेष लाभ नहीं मिलेगा और रटवाने पर आधारित कोचिंग उद्योग भी सिमटने लगेगा।

वर्ष 2024 का सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 10 वर्ष तक के कारावास और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रविधान करता है। आवश्यकता उसके कठोर और निष्पक्ष क्रियान्वयन की है। प्रत्येक परीक्षा से पहले साफ्टवेयर का स्वतंत्र तकनीकी आडिट कराया जाए तथा मूल्यांकन में डबल-ब्लाइंड आन-स्क्रीन जांच की व्यवस्था हो, जिसमें एआइ जोड़ संबंधी त्रुटियों और छूटे हुए उत्तरों की पहचान करने में सहायता करे। आज का भारत बेहतर शिक्षा, विश्वसनीय परीक्षा व्यवस्था और रटंत-आधारित परीक्षा तंत्र से मुक्ति की मांग कर रहा है।

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी
खास खबर

खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]

UB India News27 अग॰
पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………
खास खबर

पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………

पंजाब में 25 सालों तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान 2020 में यह ढाई दशक पुरानी दोस्ती टूट गई थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज हो गई है. बीजेपी […]

UB India News27 अग॰
अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?
खास खबर

अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव आया है. एक ओर दोनों देश व्यापार, वैश्विक मंचों और बहुपक्षीय संगठनों में साथ दिखते हैं तो दूसरी ओर हिमालयी सीमा पर तनाव ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है. ऐसे वक्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल […]

UB India News27 अग॰
भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..
खास खबर

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या आने वाले कुछ सालों में दोगुनी होकर करीब 3 हजार तक पहुंच सकती है. जापान दौरे पर पहुंचे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जापान की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए तैयार हैं. पीयूष गोयल ने ये भी कहा कि टेक्नोलॉजी की कमी […]

UB India News27 अग॰