गृह मंत्री संसद से क्यों भाग रहे हैं?

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मानसून सत्र के दौरान संसद नहीं आ रहे हैं, क्योंकि वह छात्रों के खिलाफ हुई बर्बरता के दोषी हैं। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, “देश के गृह मंत्री मुंह छुपा रहे हैं क्योंकि वो […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 5 अगस्त 2026, 09:42 AM 7 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
गृह मंत्री संसद से क्यों भाग रहे हैं?
Photo: UB India News Archive

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मानसून सत्र के दौरान संसद नहीं आ रहे हैं, क्योंकि वह छात्रों के खिलाफ हुई बर्बरता के दोषी हैं। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, “देश के गृह मंत्री मुंह छुपा रहे हैं क्योंकि वो छात्रों के गुनहगार हैं।” इस दौरान उनके हाथ में कथित तौर पर पैलेट गन से घायल हुए एक शख्स की तस्वीर है।

विपक्ष लगातार 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की कथित कार्रवाई का मुद्दा उठा रहा है। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक बार फिर मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संसद में आकर बयान दें।

खरगे ने की पीएम और गृह मंत्री के बयान की मांग
खरगे ने कहा, “हमारी मांग है कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सदन में आएं। वे अपना बयान दें, हम चर्चा के लिए तैयार हैं। समाधान चर्चा से ही निकलेगा।” उन्होंने कहा, “संसद की कार्यवाही शुरू हुए कई दिन हो चुके हैं। उन्हें सदन में आना चाहिए। सदन में नहीं आकर वे संसद का अपमान कर रहे हैं।”

क्या बोले केसी वेणुगोपाल?

वहीं, कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने बुधवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे जनहित के मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संसद में आने से क्यों बच रहे हैं। पत्रकारों से बातचीत में वेणुगोपाल ने कहा, “गृह मंत्री संसद से क्यों भाग रहे हैं?” उन्होंने कहा कि संसद की कार्यवाही में जारी गतिरोध खत्म करने का समाधान सरकार को ही निकालना होगा।

विपक्षी सांसदों ने बुधवार को भी किया प्रदर्शन
उन्होंने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की कथित कार्रवाई और बिहार में छात्र आंदोलन के दौरान कथित रूप से एके-47 के इस्तेमाल के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा। बुधवार को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में प्रेरणा स्थल स्थित गांधी प्रतिमा से मकर द्वार तक मार्च निकाला।

इस दौरान उन्होंने 20 जुलाई को सीजेपी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई, अयोध्या राम मंदिर में चंदे के कथित गबन और अन्य मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।

राहुल-खरगे समेत विपक्षी सांसदों का संसद परिसर में विरोध मार्च,

संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के सांसदों ने केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध मार्च निकाला। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी नेता प्रेरणा स्थल स्थित गांधी प्रतिमा से मकर द्वार तक पैदल मार्च करते हुए पहुंचे।

छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का विरोध
विपक्षी सांसदों ने 20 जुलाई को छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। इसके साथ ही उन्होंने अयोध्या राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित गड़बड़ी के आरोप और अन्य मुद्दों को लेकर भी केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। मार्च के दौरान विपक्षी सांसदों ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए और इन मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग की। विपक्ष का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस का रवैया उचित नहीं था और अयोध्या राम मंदिर चंदे से जुड़े आरोपों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं, इस पूरे विरोध प्रदर्शन के बीच संसद परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। विपक्षी दल इन मुद्दों को संसद के भीतर और बाहर लगातार उठाने की बात कह रहे हैं।

सरकार पर प्रियंका गांधी ने साधा निशाना
इस दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, ‘जो लोग सरकारी पदों पर हैं, उनकी जनता के प्रति कुछ जिम्मेदारियां होती हैं। यह लोकतंत्र है, तानाशाही नहीं; यह किसी का शाही दरबार नहीं है। इसलिए, अगर ऐसी घटनाएं हुई हैं, बच्चों पर गोलियां चलाई गई हैं, पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ है, आंसू गैस छोड़ी गई है या लाठीचार्ज का आदेश दिया गया है, तो किसी न किसी को तो जिम्मेदार ठहराया ही जाना चाहिए। किसी ने तो वे आदेश दिए होंगे, और उन्हें ही जिम्मेदारी लेनी चाहिए’।

‘अन्यायपूर्ण हिंसा, पैलेट गन चलाने की जिम्मेदारी किसी न किसी को लेनी होगी’
वहीं, कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा, ‘संदेश साफ है: जैसे हमारे बच्चों ने गांधी जी के सिद्धांतों का पालन करते हुए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया, वैसे ही हम भी यहीं से अपना विरोध शुरू करेंगे। हमारी मांग स्पष्ट है: हमारे बच्चों पर की गई अन्यायपूर्ण हिंसा, पैलेट गन चलाने, चोट लगने और सिर व अंगों पर वार से हड्डियां टूटने जैसी घटनाओं के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए। इन कामों के लिए किसी न किसी को जिम्मेदारी लेनी ही होगी’।

कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने कहा, ‘गृह मंत्री अमित शाह को संसद में आकर जंतर-मंतर पर छात्रों पर बल प्रयोग और पैलेट गन चलाने के बारे में बयान देना चाहिए। उन्हें ‘चंदा चोरी’ यानी भगवान राम को चढ़ाए गए चढ़ावे की चोरी के मुद्दे पर भी बयान देना चाहिए। साथ ही, उन्हें जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने के मुद्दे पर भी बयान देना चाहिए, क्योंकि उन्होंने खुद प्रधानमंत्री के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर की जनता से वादा किया था कि राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा’।

‘प्रधानमंत्री सदन में आएं और देश से जुड़े मुद्दों पर बात करें’
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, ‘विपक्ष मांग कर रहा है कि प्रधानमंत्री सदन में आएं और देश से जुड़े मुद्दों पर बात करें। यह अफसोस की बात है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री दोनों ही सदन से नदारद हैं और अहम राष्ट्रीय मुद्दों पर उनकी जवाबदेही भी नहीं दिख रही है’।

कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा, ‘हमारी बस यही मांग है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में आएं और 20 जुलाई को जो हुआ, उसके बारे में बयान दें – कि छात्रों के साथ क्या हुआ, यह कैसे हुआ, इसके लिए कौन जिम्मेदार था और आदेश किसने दिए थे। हमारी यही मांग है’।

संजय राउत का अमित शाह पर हमला
शिवसेना यूबीटी के सांसद संजय राउत ने कहा, ‘गृह मंत्री सार्वजनिक जगहों और कभी-कभी संसद परिसर में तो दिखते हैं; लेकिन वे सदन में नहीं आते। लोकसभा और राज्यसभा उन्हें ढूंढ रही हैं। हमने ‘गुमशुदा’ के पोस्टर तैयार किए हैं और इस मामले में एफआईआर भी दर्ज कराएंगे… उन्हें सदन में आना चाहिए। उन्हें किस बात का डर है? 12 साल से आपने देश को डर के साये में रखा है। आपके अंडर ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट, आईटी सेल और साइबर फोर्स जैसी एजेंसियां काम कर रही हैं, फिर भी आप डरे हुए हैं’।

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी
खास खबर

खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]

UB India News27 अग॰
पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………
खास खबर

पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………

पंजाब में 25 सालों तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान 2020 में यह ढाई दशक पुरानी दोस्ती टूट गई थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज हो गई है. बीजेपी […]

UB India News27 अग॰
अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?
खास खबर

अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव आया है. एक ओर दोनों देश व्यापार, वैश्विक मंचों और बहुपक्षीय संगठनों में साथ दिखते हैं तो दूसरी ओर हिमालयी सीमा पर तनाव ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है. ऐसे वक्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल […]

UB India News27 अग॰
भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..
खास खबर

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या आने वाले कुछ सालों में दोगुनी होकर करीब 3 हजार तक पहुंच सकती है. जापान दौरे पर पहुंचे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जापान की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए तैयार हैं. पीयूष गोयल ने ये भी कहा कि टेक्नोलॉजी की कमी […]

UB India News27 अग॰