जेन जी से समझेगा संघ कहां क्या खटक रहा?

सोशल मीडिया के दौर में जेन जी के सवाल अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एजेंडे में हैं। पुरानी व्यवस्थाओं को तर्क की कसौटी पर कसने और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर बेबाक राय रखने वाली इस पीढ़ी की सोच और असहजता को समझने के लिए संघ अब सीधे उसके बीच जाएगा। स्वतंत्रता दिवस के बाद संघ […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 10 अगस्त 2026, 09:14 AM 3 मिनट read
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जेन जी से समझेगा संघ कहां क्या खटक रहा?
Photo: UB India News Archive
सोशल मीडिया के दौर में जेन जी के सवाल अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एजेंडे में हैं। पुरानी व्यवस्थाओं को तर्क की कसौटी पर कसने और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर बेबाक राय रखने वाली इस पीढ़ी की सोच और असहजता को समझने के लिए संघ अब सीधे उसके बीच जाएगा।

स्वतंत्रता दिवस के बाद संघ के प्रचारक जेन जी से संवाद करेंगे। वह समझेंगे कि केंद्र व राज्य सरकारों की नीतियों और शासन व्यवस्था को लेकर उनके मन में क्या सवाल और शिकायतें हैं। संवाद से मिले फीडबैक के आधार पर संघ अपनी सामाजिक और युवा रणनीति को नए सिरे से आकार देगा।

खास बात यह है कि इस बार कोशिश युवाओं को अपनी बात समझाने से पहले उनकी बात सुनने की है। वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, गुजरात, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने हैं।

इससे पहले गत जून-जुलाई में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए जेन-जी के प्रदर्शन और उसे मिले देशव्यापी समर्थन ने राजनीतिक दलों के साथ ही संघ का ध्यान भी इस वर्ग की ओर खींचा है। युवा मतदाताओं का रुख आने वाले चुनावों में शह और मात के सियासी खेल को प्रभावित कर सकता है।
प्रांत स्तर पर सीधे संवाद की तैयारी
छह अगस्त को मुंबई में संघ प्रमुख मोहन भागवत का जेन जी और जेन अल्फा के साथ संवाद इसी लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संघ प्रमुख ने युवाओं की शिकायतों को जायज बताते हुए उनकी बात सुने जाने की जरूरत कही थी। इसके बाद अब प्रांत स्तर पर सीधे संवाद की तैयारी है।

संघ का गुरु दक्षिणा कार्यक्रम होने के साथ 15 अगस्त के बाद कानपुर, काशी, गोरक्ष और अवध प्रांत के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ और ब्रज प्रांत में युवा सम्मेलन होंगे। इनमें जेन जी से विशेष रूप से संवाद किया जाएगा। संघ की कोशिश ऐसे युवाओं तक पहुंचने की भी रहेगी जो किसी संगठन से सीधे जुड़े नहीं हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर सक्रिय रहते हैं।

जेन अल्फा को भी इस अभियान में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संघ की दीर्घकालिक रणनीति में यह वह पीढ़ी है, जो आने वाले वर्षों में सामाजिक विमर्श और सार्वजनिक जीवन को प्रभावित करेगी। उसे संघ की विचारधारा और कार्यपद्धति से परिचित कराने के साथ भविष्य के जुड़ाव की जमीन तैयार करने की कोशिश होगी।
तीन साल पहले तैयार किया था खाका, अब बदला है संदर्भ
संघ के एक वरिष्ठ प्रचारक के मुताबिक किशोर गण और तरुण गण शाखाओं के माध्यम से किशोरों और युवाओं के बीच हमारी पहुंच पहले से ही है। शताब्दी वर्ष में युवा सम्मेलनों की कार्ययोजना करीब तीन साल पहले ही तैयार कर ली गई थी। बदलते सामाजिक और राजनीतिक माहौल में इसका महत्व बढ़ गया है।

तकनीक और सोशल मीडिया ने युवाओं की सोच, संवाद और प्रतिक्रिया के तौर-तरीके बदल दिए हैं। किशोर और युवा देश के भविष्य हैं। जेन जी के मामले में चुनौती सिर्फ उसे जोड़ने की नहीं है। उनके सवालों को सुनना और जवाब तलाशना भी उतना ही जरूरी है। यही कारण है कि आने वाले युवा सम्मेलन संघ के लिए संपर्क कार्यक्रम के साथ युवाओं की बदलती सोच को समझने का माध्यम भी बनेंगे।

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