राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा जून, 2026 की यूजीसी-नेट परीक्षा के अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र के प्रश्नपत्रों में गंभीर त्रुटियों और प्रश्नों की पुनरावृत्ति को स्वीकार करते हुए सितंबर में इन विषयों की परीक्षा दोबारा आयोजित करने की घोषणा बेशक कर दी गई है, लेकिन यह स्थिति चिंताजनक इसलिए है, क्योंकि जिस परीक्षा के जरिये विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति और जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) तथा शोध के लिए पात्रता तय होती हो, उसकी विश्वसनीयता पर उठने वाला कोई भी सवाल, सीधे देश की अकादमिक व्यवस्था की गुणवत्ता तथा भविष्य से भी जुड़ जाता है।
अमूमन ऐसे मामलों में कुछ गलत या दोहराव वाले प्रश्नों को हटाकर कोई बीच का रास्ता खोजा जाता है, लेकिन अगर विशेषज्ञ समिति ने पुनर्परीक्षा को ही उचित रास्ता बताया है, तो इससे प्रश्नपत्रों में त्रुटियों की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। अभ्यर्थियों के अनुसार, अंग्रेजी के प्रश्नपत्र में 150 में से 67 प्रश्न, 2024 में पूछे गए प्रश्नों के समान थे और यहां तक कि उत्तर के विकल्पों का क्रम भी नहीं बदला गया था। जाहिर है कि इसे सामान्य मानवीय चूक कहकर टालना कठिन होगा। यही नहीं, तीनों प्रश्नपत्रों में टाइपिंग, गलत अनुवाद और कुछ तथ्यात्मक गलतियां भी सामने आई हैं।
उल्लेखनीय है कि जून, 2024 में शिक्षा मंत्रालय ने यूजीसी-नेट परीक्षा के आयोजित होने के अगले ही दिन उसे रद्द कर दिया था। वजह यह थी कि यूजीसी को गृह मंत्रालय के साइबर अपराध समन्वय केंद्र की तरफ से ऐसी जानकारियां मिली थीं, जिनसे परीक्षा की शुचिता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही थी। इसके बावजूद, दो वर्ष के भीतर अब प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता को लेकर सवालों का उठना इसलिए गंभीर है, क्योंकि इस बार सुधार के लिए पर्याप्त समय और अनुभव, दोनों उपलब्ध थे। इन स्थितियों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने एनटीए के पदाधिकारियों को उचित ही फटकार लगाई है और सभी परीक्षाओं की प्रक्रियाओं को नए सिरे से जांचने के निर्देश भी दिए हैं। लेकिन, इसके साथ यह स्पष्ट होना भी जरूरी है कि आखिर प्रश्नपत्र तैयार करने और उनकी अंतिम जांच की जिम्मेदारी किसकी थी तथा कितने स्तरों पर इनकी गुणवत्ता जांची गई।
एनटीए का गठन इस उद्देश्य से किया गया था कि देश में प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन के लिए एक आधुनिक व विश्वसनीय संस्था विकसित हो सकेगी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कभी प्रश्नपत्र लीक होने, कभी तकनीकी खामियों और अब प्रश्नपत्र की गुणवत्ता को लेकर उठते सवालों ने इस संस्था की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। लिहाजा, एनटीए के सामने चुनौती सितंबर में दोबारा परीक्षा कराने भर की नहीं, बल्कि परीक्षा की विश्वसनीयता बहाल करने की भी है।








