क्यों सता रही है सभी को Gen Z की चिंता?

आभासी दुनिया की उपज कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सतह पर आते ही देश की तमाम राजनीतिक पार्टियों को अब जेन- Z की चिंता बताने लगी है. भाजपा ने उनके उग्र होते ही अपने पसंदीदा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार करा लिया. झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार ने नौकरियों की 2014 और उसके […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शनिवार, 22 अगस्त 2026, 06:09 AM 6 मिनट read
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क्यों सता रही है सभी को Gen Z की चिंता?
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आभासी दुनिया की उपज कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सतह पर आते ही देश की तमाम राजनीतिक पार्टियों को अब जेन- Z की चिंता बताने लगी है. भाजपा ने उनके उग्र होते ही अपने पसंदीदा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार करा लिया. झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार ने नौकरियों की 2014 और उसके बाद की जेपीएससी, सीजीएल जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द कर दिया. अन्य राज्य भी जेन- जी के दबाव में झुक जाएं तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी. तमाम विपक्षी पार्टियां जेन जी के मुद्दों पर मुखर हो गई हैं. उनका मकसद तो इसलिए समझ में आता है कि वे किसी तरह नरेंद्र मोदी की सरकार को कठघरे में खड़ा करना चाहती हैं, ताकि उन्हें सत्ता का स्वाद मिल सके. इधर भाजपा ने भी उनके मंसूबों पर पानी फेरने की कवायद शुरू कर दी है.
भाजपा ने बदली रणनीति
युवाओं के आक्रोश को देखते हुए भाजपा ने भी अपनी रणनीति में बदलाव किया है. पीएम नरेंद्र मोदी को सीजेपी के आंदोलन के दौरान रील बना कर जेन- जी को भरोसा दिलाना पड़ा कि भाजपा और केंद्र सरकार उनकी कितनी चिंता करती है. भाजपा को हर तरह की मदद देने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के आला मोहन भागवत को कहना पड़ा कि सीजेपी आंदोलन में शामिल युवा अपने बच्चे हैं. गैर भाजपा शासित राज्यों में हेमंत सोरेन का आंदोलनकारी छात्रों की एक को छोड़ सारी मांगों को मान लेना यह दर्शाता है कि उनकी सरकार भी जेन- जी की उपेक्षा नहीं कर सकती है. बिहार में शिक्षा और रोजगार जैसे सीजेपी के ही मुद्दों पर प्रमुख विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव भी मुखर हो गए हैं. उन्होंने बुधवार को लोक भवन मार्च किया. बिहार की राजनीति में तेजी से अपनी जगह बनाने को बेताब जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर भी जेन- जी के मुद्दे पर सरकार को नसीहत दे रहे हैं.
जेन-Z महत्वपूर्ण क्यों?
चकरघिन्नी मोड में विपक्ष
पहले से स्थापित दलों को जेन- जी ने चकरघिन्नी मोड़ में खड़ा कर दिया है. कांग्रेस के टाप लीडर राहुल गांधी घूम-घूम कर छात्रों की गूंज सुन रहे हैं. तेजस्वी यादव ने छात्रों-युवाओं के सवाल पर लोक भवन मार्च किया. जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर जेन- जी के सवालों पर बिहार के जिलों का दौरा करने वाले हैं. आम आदमी पार्टी पर तो सीजेपी का संरक्षक होने का ही तमगा चस्पा हो गया है. बंगाल में ममता बनर्जी भी सीजेपी आंदोलनकारियों के प्रति सहानुभूति जता चुकी हैं. ये ऐसे लोग हैं, जो सत्ता जाने के बाद बिलबिलाए हुए हैं. मोदी सरकार को उखाड़ फेंकने के जितने मौके इनके हाथ आते हैं, वे उन्हें भुनाने से नहीं चूकते. सीजेपी के आंदोलन से अलग इन दलों के अपने अभियान हैं. यह अलग बात है कि इनके मुद्दे भी वही हैं, जो सीजेपी ने उठाए हैं.
विपक्ष की बिलबिलाहट बढ़ी
विपक्ष की बिलबिलाहट का आलम यह है कि प्रधानमंत्री ने देश के दिमागी नक्सलियों की बात कह दी तो सभी अपने को इस कतार में खुद-ब-खुद खड़े होने की घोषणा करने लगे. ये भूल गए कि वर्षों पहले 13 अप्रैल 2006 को कांग्रेस के ही तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नक्सलवाद को सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा की चुनौती बताया था. नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में उन्होंने कहा था- ‘यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि नक्सलवाद की समस्या हमारे देश द्वारा सामना की गई अब तक की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती है.’ उन्होंने यह बात मूल रूप से अंग्रेजी में कहीं थी- ‘It would not be an exaggeration to say that the problem of naxalism is the single biggest internal security challenge ever faced by our country.’ आश्चर्य है कि यही बात जब पीएम मोदी ने 15 अगस्त 2026 को अपने अंदाज में कहीं तो कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियां बिलबिला उठी है.
भाजपा ने बदली रणनीति
भाजपा की एक खासियत है. इसे उसकी रणनीति भी कहा जा सकता है. जब भाजपा सरकार के फैसलों पर आपत्तियां उठने लगती हैं तो वह उन्हें पलटने में कोई संकोच नहीं करती. किसानों की मांग पर कृषि कानून की शर्तें सरकार ने वापस ले लीं. नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक के सवाल पर छात्रों की मांग का सम्मान करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार करने में संकोच नहीं किया. आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और पीएम मोदी ने युवाओं और छात्रों से निरंतर संवाद की श्रृंखला शुरू की है. जेन- जी और जेन- अल्फा को अपना बनाने के लिए भाजपा-संघ का यह प्रयास सफल भी हो सकता है. यह भरोसा इसलिए कि सरकार के पास किसी को संतुष्ट करने की भरपूर गुंजाइश होती है, जबकि विपक्ष से अराजक स्थिति उत्पन्न करने के अलावा समाधान की कोई संभावना नहीं.
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