क्या है KPSC स्कैम ?

देशभर में पिछले कुछ महीनों पेपर लीक-एग्जाम में होने वाली गड़बड़ियों को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं. दिल्ली के जंतरं-मंतकर पर हुए प्रोटेस्ट के बाद से झारखंड लोक सेवा आयोग(JPSC)-झारखंड कर्मचारी चयन आयोग(JSSC) के खिलाफ छात्र विरोधन प्रदर्शन कर रहे हैं. इस बीच छत्तीसगढ़ के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में पेपर लीक हुआ, तो […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 24 अगस्त 2026, 07:55 AM 5 मिनट read
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क्या है KPSC स्कैम ?
Photo: UB India News Archive
देशभर में पिछले कुछ महीनों पेपर लीक-एग्जाम में होने वाली गड़बड़ियों को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं. दिल्ली के जंतरं-मंतकर पर हुए प्रोटेस्ट के बाद से झारखंड लोक सेवा आयोग(JPSC)-झारखंड कर्मचारी चयन आयोग(JSSC) के खिलाफ छात्र विरोधन प्रदर्शन कर रहे हैं. इस बीच छत्तीसगढ़ के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में पेपर लीक हुआ, तो उसके खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन हुआ. अब कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) में बड़े भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है. इस मामले को लेकर फरवरी 2024 से मार्च 2026 तक KPSC में परीक्षा नियंत्रक (Controller of Examination) के तौर पर काम करने वाले IAS ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के घर पर ईडी ने छापा मारा है. उन मनी लॉन्ड्रिंग के भी आरोप लगे हैं.

कर्नाटक लोक सेवा आयोग में क्या है? इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं? ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार कौन हैं? कहां-कहां काम किया. इसके बारे में कैसे खुलासा और अबतक क्या-क्या कार्रवाई हुई. हम आपको पूरा घटनाक्रम विस्तार से बता रहे हैं.

कैसे हुआ केपीएसी घोटाले का खुलासा

KPSC कर्नाटक में सरकारी नौकरियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित करवाता है. इस साल 8 जनवरी को पशुपालन और मत्स्य पालन विभाग में वेटनरी ऑफिसर के 400 पदों के परीक्षा हुई. 17 जुलाई को फाइनल रिजल्ट जारी हुआ. इस रिजल्ट से परेशान हुए कैंडिडेट डॉ. मंजूनाथ ने 25 जुलाई को कर्नाटक विधाना सभा थाने में परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर शिकायत दर्ज करवाई. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, आरोप है कि कम से कम 29 उम्मीदवारों ने एग्जाम से पहले ही गैर-कानूनी तरीके से प्रश्न-पत्र हासिल किए. केपीएसी के चेयरमैन, सदस्यों और कर्मचारियों के कई रिश्तेदारों के फाइनल रिजल्ट की लिस्ट में टॉप पर थे.
KPSC के चेयरमैन शिवशंकरप्पा एस. साहूकार को सस्पेंड करने की मांग हो रही है. साहूकार पर भ्रष्टाचार के कई आरोप हैं. उन पर भाई-भतीजावाद के आरोप भी हैं क्योंकि उनकी बेटी को गलत इनकम सर्टिफिकेट के आधार पर सरकारी नौकरी मिली थी. कर्नाटक के गृहमंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा, “राज्यपाल ने उन्हें (साहूकार को) सस्पेंड कर दिया था, जिसके खिलाफ वह हाई कोर्ट गए थे. कोर्ट ने राज्यपाल से कहा था कि वे सरकार की सलाह और मदद के आधार पर फैसला लें. कैबिनेट ने कल इस मामले पर चर्चा की.”

80 लाख रुपए से लेकर 1 करोड़ रुपए तक की रिश्वत और ED की छापेमारी

आरोप है कि कुछ बिचौलियों ने उम्मीदवारों को फ़ोन किया और उनके चयन के लिए प्रति उम्मीदवार 80 लाख रुपए से लेकर 1 करोड़ रुपए तक की रिश्वत मांगी. 18 अगस्त को, एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) KPSC से जुड़े कई भर्ती घोटालों की मनी-लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में तलाशी अभियान शुरू किया. प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 17 के तहत की गई ये तलाशी कर्नाटक में बेंगलुरु, हासन, चित्रदुर्ग, दावणगेरे, रायचूर, कारवार, कलबुर्गी और बेलगावी समेत 21 जगहों पर, और साथ ही अहमदाबाद में भी की गई. इमसें केपीएसी का ऑफ़िस, इसके चेयरमैन शिवशंकरप्पा एस साहूकार और सदस्य शांता होसमनी का घर, कथित बिचौलिए और परीक्षा के पेपरों के डिजिटल मूल्यांकन के लिए ज़िम्मेदार कंपनी ‘एडुटेस्ट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड’ के ऑफ़िस शामिल थे.

ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार का तबादला

ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार 2016 बैच के कर्नाटक-कैडर अधिकारी हैं. वह अभी उद्योग और वाणिज्य विभाग में MSME के ​​निदेशक के तौर पर काम कर रहे हैं. इस साल मार्च में उन्हें KPSC में परीक्षा नियंत्रक के पद से हटा दिया गया था. इस साल जून में वह इस पद पर आए.
डेक्कन हेराल्ड के मुताबिक, सूत्रों के मुताबिक, वह 20 अगस्त से संपर्क से बाहर हैं और उन्होंने दिल्ली के लिए फ़्लाइट का टिकट भी बुक किया था. ED ने अभी तक ज़ब्ती या किसी मुख्य संदिग्ध की गिरफ़्तारी के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है. 20 अगस्त को बेंगलुरु से दिल्ली के लिए उड़ान भरने के बाद गंगवार का पता नहीं चल पा रहा था. उन्होंने 30200 रुपए में आखिरी समय में इंडिगो की फ़्लाइट बुक की थी और दिल्ली पहुंचने के बाद उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा था.

ज्ञानेंद्र कुमार के घर पर ED की छापेमारी

रविवार दोपहर में सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स (CRPF) के जवानों के साथ ED के अधिकारी तीन गाड़ियों में बेंगलुरु के जयामहल रोड पर स्थित गंगवार के घर पहुंचे. शुरू में सिक्योरिटी गार्ड्स ने अधिकारियों को बिल्डिंग परिसर में घुसने नहीं दिया. उनका कहना था कि उन्हें ज्ञानेंद्र से निर्देश चाहिए. सूत्रों के मुताबिक, अधिकारियों ने लगभग दो घंटे इंतज़ार किया और गंगवार के फ़ोन पर सुरक्षाकर्मियों को निर्देश देने के बाद ही उन्हें अंदर जाने दिया गया. ED अधिकारियों को एक और मुश्किल का सामना करना पड़ा क्योंकि घर का दरवाज़ा बंद था. दरवाज़ा खोलकर अंदर जाने के लिए उन्हें एक स्थानीय चाबी बनाने वाले को बुलाना पड़ा. सूत्रों के मुताबिक, इस प्रक्रिया के लिए पड़ोसियों को गवाह के तौर पर बुलाया गया था. बरेली में गंगवार के घर की भी इसी तरह तलाशी ली गई, लेकिन यह साफ़ नहीं है कि उस समय वह वहां मौजूद थे या नहीं. हालांकि KPSC मामले में गंगवार की भूमिका की जांच हो रही है, लेकिन ED ने यह साफ़ नहीं किया कि उनके यहां तलाशी लेने के लिए उनके पास कोई शुरुआती सबूत था या नहीं.
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