नेतन्याहू ने ब्रिटेन को ‘इस्लामी गणतंत्र’ क्यों कहा

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बीते दिनों ब्रिटेन को ‘इस्लामी गणतंत्र’ की संज्ञा दे डाली। दो साल पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने चुनाव प्रचार के दौरान मजाक में कहा था कि ब्रिटेन पहला परमाणु शक्ति संपन्न इस्लामी गणतंत्र बनने वाला है। उस पर ब्रिटेन की पूर्व गृहमंत्री सुवेला ब्रावरमैन ने कहा था, ‘वेंस साहब […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 24 अगस्त 2026, 08:12 AM 6 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
नेतन्याहू ने ब्रिटेन को ‘इस्लामी गणतंत्र’ क्यों  कहा
Photo: UB India News Archive

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बीते दिनों ब्रिटेन को ‘इस्लामी गणतंत्र’ की संज्ञा दे डाली। दो साल पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने चुनाव प्रचार के दौरान मजाक में कहा था कि ब्रिटेन पहला परमाणु शक्ति संपन्न इस्लामी गणतंत्र बनने वाला है। उस पर ब्रिटेन की पूर्व गृहमंत्री सुवेला ब्रावरमैन ने कहा था, ‘वेंस साहब की बातें कोरा मजाक नहीं थीं!

कल्पना करें कि कल को ब्रिटेन की बागडोर इस्लामी कट्टरपंथ के हाथों में चली जाए, न्याय व्यवस्था की जगह शरीया लागू हो जाए और हमारे परमाणु हथियार किसी ऐसे शासन के हाथ लग जाएं जो ईरान जैसा हो?’ नेतन्याहू के ब्रिटेन को इस्लामी बताने का कारण तो स्पष्ट है। ब्रिटिश सरकार ने इजरायल के लिए हथियारों में कटौती की है। व्यापार समझौता वार्ताएं स्थगित कर दी हैं।

फलस्तीन को मान्यता दे दी है और नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने सत्ता संभालते ही गाजा में संहार को रोकने का पर्याप्त दबाव न डालने के लिए माफी मांगी है। इसलिए नेतन्याहू को लग रहा है कि ब्रिटिश विदेश नीति पर इस्लामिक दबाव हावी है, जिसे लेकर वे नाराज हैं।

ब्रिटेन के बढ़ते इस्लामीकरण की चिंताओं को लेकर चर्चा भी कम नहीं है। ब्रिटेन की मुस्लिम आबादी लगभग 41 लाख है, जो कुल आबादी का केवल छह प्रतिशत ही है, लेकिन इसकी वृद्धि दर बहुत तेज है। हर साल बढ़ने वाली आबादी का एक तिहाई से अधिक मुस्लिम होते हैं। इसीलिए पिछले 25 वर्षों के दौरान उनकी आबादी बढ़कर ढाई गुना हो गई है और 2050 तक उसके एक करोड़ पार कर जाने और जनसंख्या का 17 प्रतिशत हो जाने का अनुमान है।

इसी तरह फ्रांस की मुस्लिम आबादी 18 प्रतिशत और जर्मनी की 20 प्रतिशत हो जाने का अनुमान है। स्वीडन में तो 2050 तक मुस्लिम आबादी 30 प्रतिशत पहुंचने का अनुमान है। मुस्लिम आबादी में धार्मिक कट्टरता भी बढ़ रही है, जिसके कारण वह स्थानीय समाज के साथ घुलमिल नहीं पा रही है। यही कारण है कि ब्रिटेन का हर छह में से एक व्यक्ति मुस्लिम आबादी बढ़ने से चिंतित है और यह चिंता आप्रवासन विरोध में बदल रही है।

ब्रिटेन और यूरोप का मुस्लिम समुदाय भी आम तौर पर शहरों में बसता है। ब्रिटेन के लगभग एक तिहाई मुस्लिम लंदन में रहते हैं। उसके बाद ब्रैडफर्ड, बर्मिंघम, मैनचेस्टर और लेस्टर का नंबर आता है। लंदन समेत उसकी दो जिला परिषदों, टावर हैमलेट और न्यूहैम के निर्वाचित महापौर भी मुस्लिम हैं। बर्मिंघम और आक्सफोर्ड समेत 12 अन्य शहरों के मानद महापौर भी मुस्लिम हैं।

मुस्लिम मतदाताओं का प्रतिशत बर्मिंघम समेत सात संसदीय क्षेत्रों में 40 पार कर चुका है। 15 संसदीय क्षेत्र ऐसे हैं, जहां यह 20 से 40 प्रतिशत है। 10 से 20 प्रतिशत वाले संसदीय क्षेत्रों की संख्या तो 80 पार कर चुकी है। ब्रिटेन के मुस्लिम मतदाता भी अपने मुद्दों पर भारत की तरह एकजुट होकर वोट देते हैं। इसलिए कोई पार्टी उनकी मांगों को अनदेखा कर सत्ता में नहीं आ सकती।

वैसे तो मुस्लिम मतदाताओं का रुझान शुरू से ही लेबर पार्टी की तरफ रहा है, लेकिन गाजा संहार पर लेबर पार्टी के ढुलमुल रवैये से नाराज मुस्लिमों ने पिछले आम चुनाव में लेबर पार्टी के कई उम्मीदवारों को या तो हरा दिया था या उनका जीतना दूभर कर दिया था। पांच दिग्गज नेताओं का तो राजनीतिक जीवन ही समाप्त हो गया था। पार्टी के करीब 575 पार्षदों को हार का मुंह देखना पड़ा था।

गाजा नीति पर पीएम बर्नहैम की माफी का बड़ा कारण यही था। फलस्तीन, कश्मीर, इराक और सीरिया जैसे वैश्विक राजनीतिक मुद्दों और इस्लामी शिक्षा, वेशभूषा और शरीया जैसे मजहबी मुद्दों पर मुस्लिम समुदाय में गजब की एकजुटता दिखती है। मुस्लिम समुदाय की यह एकजुटता अब कूटनीति के साथ-साथ ब्रिटिश न्याय व्यवस्था में भी आड़े आने लगी है।

इसकी सबसे खौफनाक मिसाल उत्तरी इंग्लैंड के रादरहैम और राचडेल जैसे शहरों में पनपे पाकिस्तानी मूल के दुष्कर्मी गिरोह रहे, जिनके दुष्कर्मों पर दशकों तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। ग्रूमिंग गैंग के नाम से कुख्यात ये गिरोह दर्जनों शहरों में 1400 से अधिक अंग्रेज बच्चियों को फुसला कर दशकों तक यौन शोषण करते रहे, लेकिन पुलिस नस्लवाद और इस्लामोफोबिया का ठप्पा लगने और स्थानीय नेता इस्लामी वोट बैंक नाराज होने के भय से चुप्पी साधे रहे।

भंडा फूटने पर भी दोषियों को कड़ी सजा दिलवाना तो दूर, सरकार दर्जनों दुष्कर्म के दोषी और ग्रूमिंग गैंग सरगना शबीर अहमद को भी न जेल में रख पाई और न ही निर्वासित कर पाई। इराक और सीरिया में यजीदी ईसाइयों के नरसंहार और नाइजीरिया में हो रही ईसाइयों की हत्याओं के बावजूद कभी किसी मुस्लिम को पुलिस सुरक्षा की ज़रूरत नहीं पड़ी, लेकिन गाजा संहार के बाद से यहूदी स्कूलों को कड़ी पुलिस सुरक्षा देनी पड़ रही है।

दूसरे समुदायों से वैमनस्य रखने और ग्रूमिंग गैंग जैसे अपराधों के कारण मुस्लिम समुदाय के प्रति संदेह और असंतोष की भावना बढ़ रही है, लेकिन वह उन्हें रोकने के लिए आत्ममंथन के बजाय इस्लामोफोबिया के आरोप लगा रहा है। यूनिवर्सिटियों में जहां ऐसी समस्याओं पर विचार हो सकता है, वहां अब इस्लामियों और वामपंथियों का दबदबा है। हाल में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के शिक्षा-समाजशास्त्र विभाग में प्रोफेसर बनीं डा. फराह अहमद की नियुक्ति इस धारणा को पुष्ट करती है। वे ब्रिटेन के प्रतिबंधित जिहादी संगठन हिज्ब उत्तहरीर की प्रवक्ता रह चुकी हैं, जो पश्चिमी शिक्षा को इस्लामी मूल्यों के लिए खतरा और ब्रिटिश समाज में घुलने-मिलने का विरोध करता है।

संप्रति, शिक्षण संस्थानों के मंचों पर फलस्तीन, कश्मीर, अमेरिकी साम्राज्यवाद और वैश्वीकरण जैसे विषयों पर तो बहस हो सकती है, लेकिन ग्रूमिंग गैंग, इस्लामी आतंकवाद और मुस्लिम समाज की समस्याओं पर नहीं। अक्सर ऐसे वक्ताओं के कार्यक्रम रद कर दिए जाते हैं, जिनके विचार इस्लामियों और वामपंथियों को रास नहीं आते। यही कारण है कि तमाम नेताओं को लगता है कि ब्रिटेन का सामाजिक और वैचारिक दोनों स्तरों पर इस्लामीकरण हो रहा है।

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी
खास खबर

खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]

UB India News27 अग॰
पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………
खास खबर

पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………

पंजाब में 25 सालों तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान 2020 में यह ढाई दशक पुरानी दोस्ती टूट गई थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज हो गई है. बीजेपी […]

UB India News27 अग॰
अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?
खास खबर

अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव आया है. एक ओर दोनों देश व्यापार, वैश्विक मंचों और बहुपक्षीय संगठनों में साथ दिखते हैं तो दूसरी ओर हिमालयी सीमा पर तनाव ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है. ऐसे वक्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल […]

UB India News27 अग॰
भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..
खास खबर

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या आने वाले कुछ सालों में दोगुनी होकर करीब 3 हजार तक पहुंच सकती है. जापान दौरे पर पहुंचे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जापान की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए तैयार हैं. पीयूष गोयल ने ये भी कहा कि टेक्नोलॉजी की कमी […]

UB India News27 अग॰