जनगणना में जाति गिनने के तरीके पर घमासान, खरगे-राहुल का PM को पत्र; पूछा- सही डाटा कैसे मिलेगा?

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त पत्र लिखा है। दोनों नेताओं ने जातियों का विवरण दर्ज करने के लिए अपनाए गए ‘ओपन-एंडेड’ सवाल के तरीके पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे देश में जातियों की […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
मंगलवार, 25 अगस्त 2026, 08:25 AM 4 मिनट read
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जनगणना में जाति गिनने के तरीके पर घमासान, खरगे-राहुल का PM को पत्र; पूछा- सही डाटा कैसे मिलेगा?
Photo: UB India News Archive

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त पत्र लिखा है। दोनों नेताओं ने जातियों का विवरण दर्ज करने के लिए अपनाए गए ‘ओपन-एंडेड’ सवाल के तरीके पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे देश में जातियों की वास्तविक संख्या का सही आकलन नहीं हो पाएगा। उनका कहना है कि एक ही जाति अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नामों, उपजातियों और भाषाओं से पहचानी जाती है। ऐसे में यदि लोग अपनी जाति अलग-अलग नामों से दर्ज कराएंगे, तो एक ही समुदाय के आंकड़े कई हिस्सों में बंट जाएंगे और पूरी जाति जनगणना का डेटा अव्यवस्थित हो सकता है। खरगे और राहुल गांधी ने मांग की है कि मौजूदा प्रश्नावली को रद्द कर प्रमाणित जाति सूची के आधार पर नई प्रश्नावली तैयार की जाए और इसके लिए राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों तथा आम लोगों से व्यापक विचार-विमर्श किया जाए।

सही आंकड़ों के बिना सामाजिक न्याय की नीतियां अधूरी
दोनों नेताओं ने पत्र में कहा कि भारत में सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियां सही और विश्वसनीय आंकड़ों के बिना प्रभावी ढंग से लागू नहीं की जा सकतीं। अलग-अलग जातियों की आबादी और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही आकलन तभी संभव है, जब उनकी संख्या भी सटीक तरीके से दर्ज हो। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, मौजूदा प्रक्रिया में प्रत्येक व्यक्ति अपनी जाति का जो नाम बताएगा, वही दर्ज किया जाएगा। इससे एक ही जाति के अलग-अलग नाम सामने आने की आशंका है और देश में जातियों की संख्या वास्तविकता से कहीं अधिक दिखाई दे सकती है।

OBC और वंचित समुदायों को नुकसान की आशंका

खरगे और राहुल ने चेताया कि गलत या बिखरे हुए आंकड़ों का सबसे ज्यादा असर OBC, अति पिछड़े और अन्य वंचित समुदायों पर पड़ेगा। जब किसी समुदाय की वास्तविक संख्या ही सामने नहीं आएगी, तो उसकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति का सही आकलन भी मुश्किल होगा। इसका असर शिक्षा, रोजगार, सरकारी योजनाओं और सामाजिक न्याय से जुड़े फैसलों पर पड़ सकता है। उन्होंने खास तौर पर कहा कि मौजूदा जनगणना प्रक्रिया में ‘पिछड़ा वर्ग’ शब्द तक शामिल नहीं है, ऐसे में देश में OBC की वास्तविक आबादी का पता लगाना और भी मुश्किल होगा।

ड्रॉपडाउन सूची को बताया व्यावहारिक समाधान
कांग्रेस नेताओं ने जातियों की पहचान के लिए पहले से तैयार और प्रमाणित सूची के इस्तेमाल का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की गणना में इसी तरह की सूची का इस्तेमाल किया जाता है। उनके अनुसार सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ा वर्ग की मौजूदा सरकारी सूचियों तथा भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण के आधार पर जातियों की एक प्रमाणित सूची तैयार की जा सकती है। इसके बाद जनगणना में उसी सूची के आधार पर जाति दर्ज करने की व्यवस्था की जानी चाहिए।

तेलंगाना और बिहार के सर्वेक्षणों का दिया उदाहरण
खरगे और राहुल गांधी ने पत्र में तेलंगाना और बिहार में किए गए जाति सर्वेक्षणों का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इन दोनों राज्यों में पहले से तैयार जाति सूचियों के आधार पर आंकड़े जुटाने का तरीका अपनाया गया था। दोनों नेताओं ने इन सर्वेक्षणों में इस्तेमाल की गई जाति सूचियों को अपने पत्र के साथ संदर्भ के लिए संलग्न करने की बात कही।

नई प्रश्नावली बनाने की मांग
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि वे मौजूदा तरीके से की जा रही जाति जनगणना को स्वीकार नहीं करते। उन्होंने केंद्र सरकार से मौजूदा प्रश्नावली वापस लेने, राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से बातचीत करने तथा व्यापक सहमति के बाद नई प्रश्नावली तैयार करने की मांग की। उनका कहना है कि जाति जनगणना केवल कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसमें हर जाति और समुदाय की संख्या सही तरीके से दर्ज होना जरूरी है, ताकि इसके आंकड़े सटीक, सार्थक और सामाजिक न्याय की नीतियों के लिए उपयोगी साबित हो सकें।

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