इस बड़े तूफान के लिए इंसान तैयार नहीं………………

AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. आईटी से लेकर एजुकेशन सेक्टर तक में AI यूज किया जा रहा है. AI की वजह से काफी नौकरियां भी जा रही हैं. लेकिन, अब Microsoft के संस्थापक Bill Gates ने इसको लेकर बड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा है कि इंसान आने वाले वर्षों में AI जो बदलाव ला सकता है, […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 27 अगस्त 2026, 07:41 AM 5 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
इस बड़े तूफान के लिए इंसान तैयार नहीं………………
Photo: UB India News Archive

AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. आईटी से लेकर एजुकेशन सेक्टर तक में AI यूज किया जा रहा है. AI की वजह से काफी नौकरियां भी जा रही हैं. लेकिन, अब Microsoft के संस्थापक Bill Gates ने इसको लेकर बड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा है कि इंसान आने वाले वर्षों में AI जो बदलाव ला सकता है, उसके लिए अभी तैयार नहीं हैं.

उनका कहना है कि AI की वजह से तेजी से होने वाले बदलाव के लिए दुनिया को अभी से तैयारी शुरू करनी होगी. उनके मुताबिक इसका असर नौकरियों, सरकारों, कारोबार और यहां तक कि इंसानी रिश्तों पर भी पड़ सकता है. अपने हालिया ब्लॉग पोस्ट ‘The turbulent AI era is here. The choices we make now are critical’ में Gates ने AI से मिलने वाले फायदे और उससे जुड़े खतरों पर बात की है.

उन्होंने AI के दौर में बदलाव को मानव इतिहास के सबसे उथल-पुथल वाले दौर में से एक बताया है. Gates मानते हैं कि AI डॉक्टरों और शिक्षकों की मदद करने, खेती को बेहतर बनाने और सरकारी सेवाओं में सुधार लाने जैसी कई चीजें कर सकता है. लेकिन साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि समाज अभी उस बड़े बदलाव के लिए तैयार नहीं है, जो यह तकनीक ला सकती है.

गेट्स ने AI से मानवता को होने वाले बड़े खतरों के बारे में दी चेतावनी

गेट्स के मुताबिक AI में बदलाव के साथ तीन बड़े खतरे जुड़े हैं, जिनमें सबसे पहला है नौकरियों का जाना है. उनका कहना है कि AI का असर सिर्फ किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा. AI कानून, कस्टमर सर्विस, मेडिसिन, सॉफ्टवेयर और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में भी इंसानों का काम संभाल सकता है. गेट्स ने अपने ब्लॉग में लिखा कि इन इंडस्ट्रीज पर इसका असर कुछ जनरेशन में नहीं, बल्कि एक दशक के भीतर तेजी से दिखाई देगा.

उनके मुताबिक AI के दौर में एंट्री-लेवल और मिड-लेवल नौकरियां सबसे ज्यादा खतरे में हैं. वहीं, AI की वजह से पैदा होने वाली कई नई नौकरियों के लिए ऐसी स्किल्स की जरूरत होगी, जिन्हें सीखने में कई साल लग सकते हैं. गेट्स को उम्मीद है कि AI सेल्स और कस्टमर सपोर्ट, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, पैरालीगल काम, कानून, मेडिसिन और मैन्युफैक्चरिंग जैसे कई क्षेत्रों को प्रभावित करेगा. उनका कहना है कि नई नौकरियां जरूर पैदा होंगी, लेकिन सही नीतियां नहीं बनाईं गईं तो उनकी संख्या आज की नौकरियों के मुकाबले काफी कम हो सकती है.

गेट्स के मुताबिक AI का असर सिर्फ दफ्तरों में काम करने वाले लोगों तक सीमित नहीं रहेगा. उनका मानना है कि इस दशक के अंत तक ‘स्मार्ट’ रोबोट निर्माण और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में कुछ फिजिकल कामों के लिए इंसानों से मुकाबला करना शुरू कर सकते हैं. उनके अनुसार, AI से होने वाले बदलाव की रफ्तार ही भविष्य को ज्यादा चिंताजनक बनाती है.

युवाओं की नौकरियों को लेकर Gates चिंतित

बिल गेट्स ने खास तौर पर उन युवाओं को लेकर चिंता जताई है, जो आने वाले समय में पहली बार नौकरी की तलाश में उतरेंगे. उनका कहना है कि AI के दौर में एंट्री-लेवल नौकरियों के मौके कम हो सकते हैं.उनके मुताबिक AI के ज्यादा सक्षम होने के साथ युवा लोगों के लिए करियर की पहली शुरुआत करना मुश्किल हो सकता है. इससे उन्हें काम का अनुभव हासिल करने और अपने से ज्यादा अनुभवी लोगों से सीखने के कम मौके मिलेंगे.

AI से साइबर खतरे बढ़ने की भी चेतावनी

उनकी दूसरी बड़ी चिंता ये है कि AI मौजूदा डिजिटल खतरों को और ज्यादा ताकतवर बना सकता है. उन्होंने फ्रॉड, डीपफेक, गलत जानकारी और साइबर हमलों जैसे खतरों का जिक्र किया है. AI के ज्यादा सक्षम होने के साथ इन खतरों को रोकना और मुश्किल हो सकता है. उन्होंने इस बात की भी चिंता जताई है कि सरकारें शक्तिशाली AI सिस्टम का गलत या खतरनाक इस्तेमाल कर सकती हैं. उनके मुताबिक गलत इरादे रखने वाले लोगों के हाथ में भी AI के पावरफुल नए टूल आ जाएंगे.

AI के बदलाव से निपटने के लिए प्लान जरूरी

हालांकि, बिल गेट्स दुनिया से AI की रफ्तार कम करने की मांग नहीं कर रहे हैं. उनका मानना है कि AI डॉक्टरों और शिक्षकों की मदद करने से लेकर सरकारी सेवाओं को बेहतर बनाने तक बड़े फायदे दे सकता है. लेकिन वह चाहते हैं कि नीति बनाने वाले लोग AI से होने वाले संभावित नुकसान से निपटने के लिए पहले से तैयारी करें.

उन्होंने कहा कि AI में बदलाव को मैनेज करने के लिए एक प्लान जरूरी है, क्योंकि बदलाव इतनी तेजी से हो सकते हैं कि समाज के लिए उनके साथ तालमेल बिठाना मुश्किल हो जाए. उन्होंने कुछ ऐसी नौकरियों को इंसानों के लिए सुरक्षित रखने का सुझाव भी दिया है, जिनमें सहानुभूति और इंसानी जुड़ाव की जरूरत होती है. उन्होंने इसके लिए “Human Reserved” का विचार रखा है.

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी
खास खबर

खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]

UB India News27 अग॰
पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………
खास खबर

पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………

पंजाब में 25 सालों तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान 2020 में यह ढाई दशक पुरानी दोस्ती टूट गई थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज हो गई है. बीजेपी […]

UB India News27 अग॰
अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?
खास खबर

अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव आया है. एक ओर दोनों देश व्यापार, वैश्विक मंचों और बहुपक्षीय संगठनों में साथ दिखते हैं तो दूसरी ओर हिमालयी सीमा पर तनाव ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है. ऐसे वक्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल […]

UB India News27 अग॰
भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..
खास खबर

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या आने वाले कुछ सालों में दोगुनी होकर करीब 3 हजार तक पहुंच सकती है. जापान दौरे पर पहुंचे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जापान की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए तैयार हैं. पीयूष गोयल ने ये भी कहा कि टेक्नोलॉजी की कमी […]

UB India News27 अग॰