भारत-मध्य एशिया रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिश, व्यापार से सुरक्षा तक अहम एजेंडा

पीएम का ताशकंद दौरा: उज्बेकिस्तान दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भव्य स्वागत किया गया। भारतवंशियों के बीच पहुंचे प्रधानमंत्री को देखकर वहां रहने वाले प्रवासी भारतीय लोगों ने भी खुशी का इजहार किया। पीएम मोदी की मौजूदगी में ताशकंद की धरती पर तिरंगे और देश की संस्कृति के रंग बिखरे।

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By UB India News Desk Patna, Bihar
रविवार, 30 अगस्त 2026, 06:58 AM 13 मिनट read
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भारत-मध्य एशिया रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिश, व्यापार से सुरक्षा तक अहम एजेंडा
Photo: UB India News Archive

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों मध्य एशिया की महत्वपूर्ण कूटनीतिक यात्रा पर हैं। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री 29 और 30 अगस्त को ताशकंद की राजकीय यात्रा कर रहे हैं। इसके बाद वे किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में 26वें शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

प्रधानमंत्री का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब मध्य एशिया वैश्विक राजनीति में तेजी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है। भारत के लिए यह क्षेत्र केवल भौगोलिक रूप से महत्वपूर्ण पड़ोसी क्षेत्र नहीं है, बल्कि ऊर्जा, व्यापार, सुरक्षा, संपर्क और रणनीतिक संतुलन के लिहाज से भी बेहद अहम है।

ताशकंद में मोदी-मिर्जियोयेव की मुलाकात

ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत होनी है। बातचीत का प्रमुख फोकस दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है।

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच व्यापार एवं निवेश, रक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी, ऊर्जा, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की जाएगी। दोनों देश भविष्य के सहयोग की नई कार्ययोजना पर भी चर्चा करेंगे।

प्रधानमंत्री ने यात्रा से पहले कहा है कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी ने हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। अब दोनों देशों के साझा विकास दृष्टिकोण—'विकसित भारत@2047' और 'उज्बेकिस्तान-2030'—को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा होगी।

भारत के लिए मध्य एशिया क्यों महत्वपूर्ण?

मध्य एशिया लंबे समय से भारत की विदेश नीति का महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है, लेकिन बदलती वैश्विक परिस्थितियों में इसका महत्व और बढ़ गया है।

ऊर्जा संसाधन, प्राकृतिक गैस, खनिज संपदा, व्यापार मार्ग और सुरक्षा—इन सभी क्षेत्रों में मध्य एशिया भारत के लिए संभावनाओं का बड़ा क्षेत्र है।

भारत की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि मध्य एशियाई देशों तक सीधे और सुगम व्यापारिक संपर्क अभी सीमित है। पाकिस्तान के रास्ते भूमि संपर्क की समस्या के कारण भारत को वैकल्पिक संपर्क मार्गों की जरूरत है।

इसीलिए कनेक्टिविटी प्रधानमंत्री मोदी की मध्य एशिया नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

चीन और रूस के बीच भारत की रणनीतिक जगह

मध्य एशिया में चीन और रूस दोनों का मजबूत प्रभाव है। चीन अपनी आर्थिक परियोजनाओं और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के माध्यम से इस क्षेत्र में बड़ा निवेश कर चुका है, जबकि रूस के ऐतिहासिक, राजनीतिक और सुरक्षा संबंध मजबूत बने हुए हैं।

ऐसे में भारत के लिए चुनौती केवल आर्थिक संबंध बढ़ाने की नहीं है। उसे मध्य एशिया में अपनी स्वतंत्र रणनीतिक उपस्थिति को भी मजबूत करना है।

उज्बेकिस्तान के साथ मजबूत संबंध भारत को इस व्यापक रणनीति में महत्वपूर्ण आधार प्रदान कर सकते हैं।

रक्षा और सुरक्षा भी बातचीत के केंद्र में

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग भी लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है।

मध्य एशिया अफगानिस्तान के बेहद करीब है। अफगानिस्तान की सुरक्षा स्थिति, आतंकवाद, कट्टरपंथ और सीमा-पार सुरक्षा चुनौतियां इस पूरे क्षेत्र को प्रभावित करती हैं।

ऐसे में भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सुरक्षा सहयोग केवल द्विपक्षीय विषय नहीं है। इसका संबंध पूरे मध्य एशियाई क्षेत्र की स्थिरता से भी है।

प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा पर विचार-विमर्श को इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है।

डिजिटल कनेक्टिविटी और नई अर्थव्यवस्था

इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू डिजिटल सहयोग भी है।

भारत ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, डिजिटल भुगतान और तकनीकी सेवाओं के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। उज्बेकिस्तान भी डिजिटल अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक आधुनिकीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

ऐसे में दोनों देशों के बीच डिजिटल तकनीक, ई-गवर्नेंस और डिजिटल कनेक्टिविटी में सहयोग की नई संभावनाएं बन सकती हैं।

ऊर्जा और व्यापार पर नजर

भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक बड़ी आवश्यकता है। मध्य एशिया ऊर्जा संसाधनों से समृद्ध क्षेत्र है।

उज्बेकिस्तान के साथ ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का हिस्सा बन सकता है।

इसके साथ ही व्यापार और निवेश के क्षेत्र में नए अवसर तलाशना भी प्रधानमंत्री की यात्रा के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को व्यापक बनाने की संभावनाओं पर बातचीत होनी है।

शास्त्री स्मारक और गांधी केंद्र का दौरा

प्रधानमंत्री मोदी की ताशकंद यात्रा का एक भावनात्मक और ऐतिहासिक पक्ष भी है।

प्रधानमंत्री के ताशकंद स्थित लाल बहादुर शास्त्री स्मारक और ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज स्थित महात्मा गांधी केंद्र जाने की संभावना है। यह दोनों देशों के बीच पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित करता है।

शास्त्री जी का ताशकंद से जुड़ा इतिहास भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों को एक विशेष भावनात्मक आयाम देता है।

ताशकंद से बिश्केक: अब SCO पर नजर

उज्बेकिस्तान के बाद प्रधानमंत्री मोदी किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक जाएंगे, जहां 31 अगस्त से 1 सितंबर तक 26वां SCO शिखर सम्मेलन आयोजित होगा।

इस वर्ष का सम्मेलन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर हो रहा है। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है।

SCO मंच पर प्रधानमंत्री भारत की प्राथमिकताओं के रूप में सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर पर जोर देंगे। साथ ही वे SCO देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कर सकते हैं।

भारत के लिए इस दौरे का बड़ा संदेश

प्रधानमंत्री मोदी का ताशकंद दौरा केवल भारत-उज्बेकिस्तान द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है। इसके पीछे भारत की व्यापक मध्य एशिया नीति दिखाई देती है।

भारत चाहता है कि मध्य एशिया में उसकी भूमिका केवल एक बाहरी आर्थिक साझेदार की न रहे, बल्कि वह व्यापार, तकनीक, ऊर्जा, सुरक्षा और कनेक्टिविटी का विश्वसनीय साझेदार बने।

ताशकंद और बिश्केक की यात्रा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा सकती है।

प्रधानमंत्री मोदी का ताशकंद दौरा ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया की बड़ी शक्तियां मध्य एशिया में अपनी रणनीतिक उपस्थिति बढ़ा रही हैं।

भारत के सामने अवसर भी बड़ा है और चुनौती भी।

उज्बेकिस्तान के साथ मजबूत रणनीतिक साझेदारी, ऊर्जा और व्यापार में विस्तार, डिजिटल सहयोग तथा सुरक्षा क्षेत्र में समन्वय भारत को मध्य एशिया में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर दे सकते हैं।

ताशकंद से बिश्केक तक प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का व्यापक संदेश यही है कि भारत अब मध्य एशिया को केवल पड़ोसी क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि अपनी वैश्विक रणनीति के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देख रहा है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मोदी-मिर्जियोयेव वार्ता और SCO शिखर सम्मेलन से निकलने वाले फैसले भारत की इस 'मध्य एशिया रणनीति' को किस हद तक नई गति देते हैं।

पीएम का ताशकंद दौरा LIVE: 

पीएम मोदी ने 52 उज्बेकिस्तानी साधकों के विशेष योग सत्र में लिया हिस्सा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ताशकंद में आयोजित एक विशेष योग सत्र में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में उज्बेकिस्तान के 52 योग साधकों ने भाग लिया और विभिन्न योगाभ्यास प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने योग साधकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के योग प्रदर्शन में सभी उम्र के लोगों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया और सभी ने शानदार योग का प्रदर्शन किया। पीएम मोदी ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के प्रयासों से उज्बेकिस्तान को योग से जोड़ने में मदद मिली है। प्रधानमंत्री ने योग कार्यक्रम में शामिल सभी प्रतिभागियों को बधाई भी दी।

रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने पर जोर, व्यापार-निवेश से रक्षा तक होगी चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान की दो दिवसीय यात्रा के दौरान दोनों देशों का जोर आपसी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के साथ व्यापार एवं निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी, रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर रहेगा। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा के दौरान दोनों नेताओं के वीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता होगी। इससे पहले शनिवार को ताशकंद पहुंचने पर पीएम मोदी का जोरदार स्वागत हुआ। राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ वार्ता के बाद द्विपक्षीय समझौतों के पैकेज पर हस्ताक्षर किए जाने की संभावना भी है। प्रधानमंत्री ताशकंद पहुंचने के बाद यांगी उज्बेकिस्तान पार्क पहुंचकर आजादी स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की, जिसे देश की आजादी की 30वीं वर्षगांठ पर बनाया गया था। पीएम शास्त्री स्मारक और महात्मा गांधी केंद्र भी गए।
07:49 AM, 30-Aug-2026

किर्गिस्तान दौरे पर पीएम मोदी के कार्यक्रमों में खास क्या?

  • प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त को 26वें एससीओ समिट में शामिल होने के लिए बिश्केक जाएंगे। यह एससीओ की 25वीं वर्षगांठ है। इस साल की थीम है 'एससीओ के 25 साल: टिकाऊ शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ-साथ'।
  • बिश्केक में होने वाले एससीओ लीडरशिप समिट के कार्यक्रमों में 31 अगस्त को वेलकम डिनर और अगले दिन समिट की मुख्य बैठक शामिल है।
  • यहां प्रधानमंत्री मोदी भाषण भी देंगे। बिश्केक में समिट के दौरान कई द्विपक्षीय बैठकें भी प्रस्तावित हैं।
  • इसी साल मई में, एससीओ के सेक्रेटरी जनरल और कजाकिस्तान के पूर्व रक्षा मंत्री नुरलान येरमेकबायेव ने भारत यात्रा के दौरान बिहार की नालंदा यूनिवर्सिटी का दौरा किया था।
06:48 AM, 30-Aug-2026

उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति और पीएम मोदी की पिछली मुलाकात कब हुई थी? 

पीएम मोदी और मिर्जियोयेव की मुलाकात 2023 में दुबई में सीओपी28 सम्मेलन के दौरान हुई थी। इसके बाद 2024 में कजान में आयोजित ब्रिक्स समिट के दौरान भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई थी। पिछली मुलाकात 2025 में चीन के तियानजिन में एससीओ समिट के दौरान हुई थी।

2026 की मुलाकात को लेकर विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच लंबे समय से सांस्कृतिक संबंध हैं। इस दौरे के बाद द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे। प्रधानमंत्री मोदी ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी में इंडोलॉजिस्ट (भारतीय संस्कृति के जानकार) और अन्य विद्वानों से भी बातचीत करेंगे।
06:05 AM, 30-Aug-2026

कनेक्टिविटी की बाधा दूर करेंगे भारत और उज्बेकिस्तान

विदेश मंत्रालय के मुताबिक उज्बेकिस्तान संसाधनों से समृद्ध देश है और भारत को अहम खनिजों की जरूरत है। ऐसे में दोनों देशों के बीच लंबे समय तक सप्लाई की सुदृढ़ व्यवस्था की संभावना पर भी चर्चा हो सकती है। राजदूत स्मिता पंत के मुताबिक भारत और उज्बेकिस्तान एक-दूसरे के लिए स्वाभाविक बाजार हैं। हम निश्चित रूप से ज्यादा आयात कर सकते हैं। बहुत ज्यादा निर्यात भी कर सकते हैं। लेकिन कनेक्टिविटी (संपर्क) एक बड़ी बाधा रही है। इसलिए, व्यापारिक संबंधों को बेहतर बनाने के लिए कनेक्टिविटी की इस बाधा को कैसे दूर किया जाए, इस मुद्दे पर भी दोनों पक्ष चर्चा करेंगे।
05:35 AM, 30-Aug-2026

फार्मा, कृषि और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे दोनों देश

उज्बेकिस्तान में भारत की राजदूत स्मिता पंत के मुताबिक, प्रधानमंत्री के दौरे का एजेंडा बहुत व्यापक है। 2015 में उनके पिछले द्विपक्षीय दौरे के बाद दोनों देशों का व्यापार 300% बढ़ा है। उज्बेकिस्तान में निवेश 700% से अधिक बढ़ा है। संस्कृति, फार्मास्युटिकल क्षेत्र, स्वास्थ्य, पारंपरिक दवाओं, कृषि और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर भी बात होगी। कई एमओयू पर हस्ताक्षर भी किए जाएंगे।
04:57 AM, 30-Aug-2026

चौथी बार उज्बेकिस्तान दौरे पर आए हैं पीएम मोदी, 31 अगस्त को किर्गिस्तान जाएंगे

विदेश मंत्रालय के मुताबिक पीएम मोदी चौथी बार उज्बेकिस्तान दौरे पर आए हैं। इससे पहले उन्होंने 2015 में उज्बेकिस्तान और मध्य एशिया के अन्य देशों का दौरा किया था। पीएम मोदी वर्ष 2016 और 2022 में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) समिट में शामिल होने के लिए उज्बेकिस्तान आए थे। 2026 में इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी 31 अगस्त को किर्गिस्तान रवाना हो जाएंगे। 
03:53 AM, 30-Aug-2026

पीएम मोदी से मिलने का उत्साह, कलाकारों और प्रवासियों में दिखी खुशी

उज्बेकिस्तान के ताशकंद पहुंचे पीएम मोदी के स्वागत में बच्चों, युवतियों और युवाओं की एक टीम ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया। कार्यक्रम के दौरान एक छोटे बच्चे को पीएम मोदी से मिलने के लिए खास तौर पर उत्साहित देखा गया। प्रस्तुति के बाद स्थानीय लोगों को इस जेस्चर की सराहना करते देखा जा सकता है।
02:52 AM, 30-Aug-2026

ताशकंद में प्रधानमंत्री के स्वागत में सांस्कृतिक कार्यक्रम

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UB India News Desk

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