भारत में किंगमेकर बन रहा है मिडिल क्लास , बजट में भी मिडिल क्लास के लिए दिखे कई अहम फैसले………….

भारत में पिछले कुछ दशकों में कई बदलाव आए हैं, जिनमें सबसे बड़ा बदलाव मिडिल क्लास का उभार रहा है. मिडिल क्लास या मध्यवर्ग, वह वर्ग है जो न तो अमीर है और न ही बहुत गरीब. यह एक ऐसा वर्ग है जो अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के बाद थोड़ी-बहुत बचत भी कर […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 3 फरवरी 2025, 04:55 AM 7 मिनट read
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भारत में किंगमेकर बन रहा है मिडिल क्लास , बजट में भी मिडिल क्लास के लिए दिखे कई अहम फैसले………….
Photo: UB India News Archive

भारत में पिछले कुछ दशकों में कई बदलाव आए हैं, जिनमें सबसे बड़ा बदलाव मिडिल क्लास का उभार रहा है. मिडिल क्लास या मध्यवर्ग, वह वर्ग है जो न तो अमीर है और न ही बहुत गरीब. यह एक ऐसा वर्ग है जो अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के बाद थोड़ी-बहुत बचत भी कर सकता है, अपनी संतुलित जीवनशैली बनाए रख सकता है, और साथ ही आगे बढ़ने की आकांक्षाएं भी रखता है.

यही मिडिल क्लास देश के विकास की धारा है, क्योंकि यह न सिर्फ खपत करता है, बल्कि समाज में बदलाव लाने के लिए प्रेरित भी करता है. हर साल जब देश का बजट पेश होता है, तो सरकारें मिडिल क्लास को आकर्षित करने के लिए कई ऐलान करती हैं.

इस साल 2025 के बजट में भी मिडिल क्लास के लिए कई अहम फैसले लिए गए हैं. लेकिन सवाल यह है कि मिडिल क्लास है कौन? यह वर्ग कितना बड़ा है और किस तरह की योजनाओं से इसे लाभ हो सकता है. इस रिपोर्ट में विस्तार से समझतें हैं

सबस पहले जानते हैं मिडिल क्लास को लेकर सरकार का फोकस

नरेंद्र मोदी सरकार 3.0 द्वारा 2025 का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मिडिल क्लास को खासतौर पर फोकस में रखा. उन्होंने कहा कि जिनकी सालाना आय 12 लाख रुपये तक है, उन्हें अब कोई आयकर नहीं देना होगा. इसके अलावा, उन्होंने आयकर स्लैब में भी कुछ बदलाव किए, जिनसे छोटे और मंझले आय वाले लोग फायदा उठा सकेंगे. इन फैसलों का उद्देश्य यह है कि मिडिल क्लास की खपत बढ़े और देश की अर्थव्यवस्था को गति मिले.

लेकिन जब मिडिल क्लास के बारे में बात होती है, तो सवाल यह उठता है कि क्या इसे किसी एक शब्द में परिभाषित किया जा सकता है? क्या हम कह सकते हैं कि जो लोग 5 लाख रुपये से 30 लाख रुपये सालाना कमाते हैं, वही मिडिल क्लास के सदस्य हैं? या फिर इससे भी अधिक आय वाले लोग इस वर्ग में शामिल होते हैं? यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मिडिल क्लास को लेकर अलग-अलग लोगों और संस्थानों की राय अलग-अलग है.

मिडिल क्लास की परिभाषा

मिडिल क्लास का कोई निश्चित परिभाषा नहीं है. इसके बारे में अलग-अलग रिसर्च और सर्वेक्षणों में अलग-अलग परिभाषाएं दी गई हैं. कुछ रिपोर्ट के अनुसार, मिडिल क्लास वह वर्ग है जिसकी सालाना आय 5 लाख रुपये से 30 लाख रुपये के बीच होती है, जबकि कुछ रिपोर्टें इसे 2 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक मानती हैं.

उदाहरण के तौर पर 2022 में प्रकाशित पीपुल्स रिसर्च ऑन इंडियन कस्टमर (PRICE) की रिपोर्ट ही ले लीजिये. इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में मिडिल क्लास वे लोग हैं जिनकी मासिक आय 1 लाख रुपये तक होती है. वहीं, भारत सरकार की नजर में 8 लाख रुपये से कम आय वाले लोग आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) में आते हैं.

इसके अलावा, दुनिया भर में मध्यवर्ग को एक अलग नजरिये से देखा जाता है. कुछ अंतरराष्ट्रीय अध्ययन जैसे कि अभिजीत बनर्जी और एस्थर डुफ्लो का 2008 का अध्ययन, मिडिल क्लास को दैनिक खर्च के आधार पर परिभाषित करता है. उन्होंने कहा कि जो लोग रोजाना 2 डॉलर (लगभग 160 रुपये) से 10 डॉलर (800 रुपये) तक खर्च करते हैं, वे मिडिल क्लास के सदस्य माने जा सकते हैं.

भारत में मिडिल क्लास की स्थिति

2022 में, PRICE ने मिडिल क्लास की जनसंख्या का अनुमान प्रकाशित किया था. 2020-21 में, भारत की मिडिल क्लास जनसंख्या लगभग 31% थी, जो करीब 43.2 करोड़ लोग थे. यानी 94,000 से ज्यादा परिवार. PRICE के अनुसार, 2046-47 तक मिडिल क्लास की जनसंख्या 100 करोड़ से ज्यादा हो सकती है, जो कुल जनसंख्या का 61% होगी.

हालांकि, भारत में मिडिल क्लास की जनसंख्या का आंकड़ा भी अलग-अलग स्रोतों में अलग-अलग बताया गया है. उदाहरण के लिए, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से जुड़े ऑक्सफोर्ड इकॉनॉमिक्स के विश्लेषण के अनुसार, 2022 में भारत में 46 करोड़ मिडिल क्लास भारतीय थे. वहीं, 2021 में, अमेरिकी थिंक टैंक पीयू रिसर्च सेंटर के विश्लेषण में पाया गया कि कोविड-19 महामारी से पहले भारत की मिडिल क्लास जनसंख्या 9.9 करोड़ थी, जो महामारी के बाद घटकर 6.6 करोड़ हो गई.

पीयू के अनुसार, अब मिडिल क्लास भारत की कुल जनसंख्या का सिर्फ 4.78% है. पीयू के अध्ययन के अनुसार ज्यादातर भारतीय कम आय वर्ग में आते हैं, जिनकी दैनिक प्रति व्यक्ति खर्च $2 से $10 के बीच होता है.

मिडिल क्लास का आकार बढ़ने के साथ-साथ उसकी जीवनशैली में भी बदलाव आ रहा है. पहले जो लोग अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा कर पाते थे, अब वही लोग अपनी सुख-सुविधाओं के लिए भी खर्च करने लगे हैं. वे अब शिक्षा, स्वास्थ्य, यात्रा, घर, और अन्य सुविधाओं में भी निवेश करने लगे हैं. यही कारण है कि इस वर्ग का खपत करने का तरीका और आकांक्षाएं भी बदल गई हैं.

मिडिल क्लास और सरकार की योजनाएं

भारत सरकार मिडिल क्लास के लिए कई योजनाएं चलाती है ताकि उनकी जीवनशैली बेहतर हो सके. बजट में किए गए घोषणाओं में भी यह वर्ग प्रमुख रूप से ध्यान में रखा जाता है. 2025 के बजट में वित्त मंत्री ने जो आयकर में बदलाव किए हैं, वह मिडिल क्लास को सीधा फायदा पहुंचाते हैं.

इसके अलावा, सरकार ने छोटे करदाताओं के लिए TDS (Tax Deducted at Source) की सीमा बढ़ा दी है, जिससे छोटे आय वाले लोगों को राहत मिलेगी. इसके साथ ही, सरकार ने एक नई आयकर विधेयक लाने की घोषणा की है, जो और अधिक पारदर्शी और मिडिल क्लास के अनुकूल होगा.

यही नहीं, दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी मिडिल क्लास को टारगेट करते हुए “मिडिल क्लास मैनिफेस्टो” जारी किया. इसमें सरकार से शिक्षा और स्वास्थ्य के बजट को बढ़ाने और टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाने की मांग की गई थी.

मिडिल क्लास की आकांक्षाएं

मिडिल क्लास की आकांक्षाएं लगातार बढ़ रही हैं. पहले लोग अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष करते थे, लेकिन अब वे जीवन को और आरामदायक बनाने के लिए खर्च करने लगे हैं. देश के इस वर्ग की यह आकांक्षाएं सरकार और व्यवसायों के लिए एक अच्छा अवसर भी पैदा करती हैं, क्योंकि यह वर्ग उत्पादों और सेवाओं की खपत करने वाला प्रमुख वर्ग है.

मिडिल क्लास को लेकर क्या होनी चाहिये सरकार की नीति

मिडिल क्लास को लेकर सरकार की नीति यह होनी चाहिए कि वह इस वर्ग की आकांक्षाओं को समझे और उन्हें पूरा करने के लिए योजनाएं बनाएं. इसके साथ ही, देश के इस वर्ग के लिए कर छूट, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, और घर खरीदने के लिए सस्ती योजनाएं भी जरूरी हैं.

भारत का मिडिल क्लास सिर्फ एक आर्थिक वर्ग नहीं है, बल्कि यह समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो देश की प्रगति में योगदान देता है. मिडिल क्लास के पास अवसर, आकांक्षाएं और साधन होते हैं जो उसे जीवन की बेहतर गुणवत्ता की ओर ले जाते हैं. सरकार द्वारा मिडिल क्लास के लिए किए गए उपायों से इस वर्ग को फायदा हो सकता है, लेकिन यह जरूरी है कि हम इस वर्ग की सही पहचान करें और इसके लिए योजनाएं बनाएं जो समाज के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचे.

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