24 घंटे में भारत ने टेस्ट कीं 3 खतरनाक मिसाइल, अग्नि-1, पृथ्वी-1 और आकाश प्राइम ………………….

भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद अपनी ताकत को और ज्यादा बढ़ाने को लेकर काम शुरू कर दिया है. सेना मिसाइल तकनीक को लेकर काफी तेजी से आगे बढ़ रही है. देश ने 16 और 17 जुलाई को रक्षा के क्षेत्र में तीन बड़े कारनामे किए हैं. भारत ने एक ही दिन में तीन अहम […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 18 जुलाई 2025, 08:05 AM 5 मिनट read
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24 घंटे में भारत ने टेस्ट कीं 3 खतरनाक मिसाइल, अग्नि-1, पृथ्वी-1 और आकाश प्राइम ………………….
Photo: UB India News Archive

भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद अपनी ताकत को और ज्यादा बढ़ाने को लेकर काम शुरू कर दिया है. सेना मिसाइल तकनीक को लेकर काफी तेजी से आगे बढ़ रही है. देश ने 16 और 17 जुलाई को रक्षा के क्षेत्र में तीन बड़े कारनामे किए हैं. भारत ने एक ही दिन में तीन अहम मिसाइलों का सफल टेस्ट किया है. यह खबर पाकिस्तान की टेंशन बढ़ा सकती है. आकाश प्राइम, अग्नि-1 और पृथ्वी-2 इस लिस्ट में शामिल हैं.

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि भारत ने पृथ्वी-2 और अग्नि-2 शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों के परीक्षण किए हैं, दोनों ही मिसाइलों के टेस्ट फायर पूरी तरह सफल रहे. ये परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (आईटीआर) से किए गए. दोनों मिसाइल परीक्षण स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड (एसएफसी) की निगरानी में हुए हैं.

लद्दाख में हुआ आकाश प्राइम का परीक्षण

24 घंटे में यह दूसरा महत्वपूर्ण सफल परीक्षण है. इससे पहले बुधवार को भारत ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को बेहतर करने के मिशन में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की थी. बुधवार को भारतीय सेना ने लद्दाख सेक्टर में करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर ‘आकाश प्राइम’ एयर डिफेंस सिस्टम का सफल परीक्षण किया था. यह एयर डिफेंस सिस्टम भारत ने स्वदेशी रूप से विकसित किया है. इस तरह भारत ने कुल तीन सफल टेस्ट कर लिए.

क्या हैं अग्नि-1 मिसाइल की खासियतें?
अग्नि-1 मिसाइल की मारक क्षमता 700 किलोमीटर तक की है। इस मिसाइल का भार 12 टन है और यह 1,000 किलो के परमाणु हथियार को अपने साथ ले जा सकती है। अग्नि 1 मिसाइल को उन्नत सिस्टम प्रयोगशाला ने रक्षा अनुसंधान विकास प्रयोगशाला और रिसर्च सेंटर इमरात के साथ मिलकर विकसित किया है। मिसाइल को हैदराबाद स्थित भारत डायनेमिक्स लिमिटेड ने पूरा किया है। इस मिसाइल को सबसे पहले साल 2004 में सेवा में लिया गया था। जमीन से जमीन पर वार करने वाली इस मिसाइल को  सॉलिड प्रॉपलैंट्स द्वारा बनाया गया है।

बैलिस्टिक मिसाइल पृथ्वी-2  मिसाइल 
पृथ्वी-2 बैलिस्टिक मिसाइल को स्वदेशी तरीके से विकसित किया है। पृथ्वी-2 मिसाइल की मारक क्षमता 350 किलोमीटर है। पृथ्वी-2 500 से 1,000 किलोग्राम भार तक के हथियारों को लेकर जाने में सक्षम है। सतह से सतह पर साढ़े तीन सौ किलोमीटर मार करने वाली मिसाइल है। इसमें लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम का उपयोग किया गया है। मिसाइल में एडवांस गाइडेंस सिस्टम लगा है जो अपने लक्ष्य को आसानी से मार गिरा सकता है। पृथ्वी मिसाइल 2003 से सेना में है, जो नौ मीटर लंबी है। पृथ्वी डीआरडीओ द्वारा निर्मित पहली मिसाइल है।

15 हजार फीट की ऊंचाई पर ‘आकाश प्राइम’ एयर डिफेंस सिस्टम का सफल परीक्षण

24 घंटे में यह दूसरा महत्वपूर्ण सफल परीक्षण है। इससे पहले बुधवार को भारत ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को बेहतर करने के मिशन में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की थी। बुधवार को भारतीय सेना ने लद्दाख सेक्टर में करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर ‘आकाश प्राइम’ एयर डिफेंस सिस्टम का सफल परीक्षण किया था। यह एयर डिफेंस सिस्टम भारत ने स्वदेशी रूप से विकसित किया है।

‘आकाश प्राइम’ एयर डिफेंस सिस्टम का सफल परीक्षण थल सेना की एयर डिफेंस विंग के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ। इस दौरान रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। डीआरडीओ ने ही यह एयर डिफेंस सिस्टम विकसित किया है।

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, एयर डिफेंस सिस्टम का परीक्षण करते समय सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों ने तेज गति से उड़ रहे दो लक्ष्यों पर सटीक वार किए। यह परीक्षण अत्यधिक ऊंचाई और विरल वायुमंडल वाले क्षेत्र में किया गया, जहां सामान्य संचालन भी कठिन होता है।

आकाश प्राइम सिस्टम को भारतीय सेना की तीसरी और चौथी ‘आकाश रेजिमेंट’ में शामिल किया जाएगा। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत की एयर डिफेंस प्रणाली ने पाकिस्तानी सेना के चीनी लड़ाकू विमानों और तुर्की ड्रोन से किए गए हवाई हमलों को नाकाम करने में अहम भूमिका निभाई थी।

भारतीय सेना को जल्द मिल जाएगी ‘आकाश प्राइम’

‘आकाश प्राइम’ एयर डिफेंस सिस्टम का सफल परीक्षण थल सेना की एयर डिफेंस विंग के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ. डीआरडीओ ने ही यह एयर डिफेंस सिस्टम विकसित किया है. आकाश प्राइम सिस्टम को भारतीय सेना की तीसरी और चौथी ‘आकाश रेजिमेंट’ में शामिल किया जाएगा. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत की एयर डिफेंस प्रणाली ने पाकिस्तानी सेना के चीनी लड़ाकू विमानों और तुर्की ड्रोन से किए गए हवाई हमलों को नाकाम करने में अहम भूमिका निभाई थी.

आकाश प्राइम की क्या है खूबी

आकाश प्राइम, आकाश सिस्टम का ही अपग्रेडेड वर्जन है, जो कि भारतीय सेना की जरूरत को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है. यह 30 से 35 किलोमीटर तक के लक्ष्यों को भेद सकती है. आकाश प्राइम 18 से 20 किलोमीटर की ऊंचाई तक प्रभावी है. यह लड़ाकू विमानों और क्रूज मिसाइलों के साथ-साथ ड्रोन को भी मार गिराने में सक्षम है.

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